कोतवाल को चकमा देकर भागने वाले बिजली विभाग के वाहन को पुलिस का लगा झटका, मुख्य ड्राइवर आज भी फरार
पुलिस को रात भर दौड़ाता रहा बिजली विभाग का वाहन; इमरजेंसी सेवाओं के नाम पर जनता की जान से खिलवाड़, दो घंटे कोतवाल महेंद्र मीणा ने किया था पीछा, भागने में सफल हुआ बिजली विभाग का एफ आर टी वाहन 7 दिन बाद सीज, रात भर गायब एफ आर टी वाहन, बाइक सवार के हवाले विद्युत सप्लाई मेंटीनेंस; लाखों का खेल और जनता बेहाल
जनमानस शेखावाटी सवंददाता : आबिद खान
फतेहपुर : एक ओर जहाँ उपभोक्ताओं को बेहतर और उच्च गुणवत्ता की बिजली सप्लाई देने के लिए सरकारें आए दिन दावे कर रही हैं, तो वहीं धरातल पर जिम्मेदार ही इन नियमों की धज्जियाँ उड़ा रहे हैं। बिजली विभाग ने जिन एफ.आर.टी. (FRT) वाहनों को ‘इमरजेंसी सेवा’ के लिए तैनात किया है, ताकि जनता को राहत मिले वे वाहन आज खुद जनता और पुलिस के लिए सिरदर्द बन चुके हैं। बिजली विभाग की ये गाड़ियाँ कानून की रक्षा करने वाले कोतवाल महेंद्र मीणा के आगे ‘नो-दो-ग्यारह’ हो होकर निगम की छवि की तार तार कर रही हैं। रात-रात भर पुलिस को सड़कों पर दौड़ाने वाली ये गाड़ियाँ साबित कर रही हैं कि विभाग के अंदर गड़बड़झाला चल रहा हैं। और ठेकेदारों के हौसले बुलंद हैं।
7 दिन पहले की वो खौफनाक रात: जब बिजली विभाग का ‘इमरजेंसी वाहन’ बना ‘भगोड़ा’
प्राप्त जानकारी के अनुसार, करीब 7 दिन पहले धानुका अस्पताल के आगे बिजली विभाग का एफ.आर.टी. वाहन संदिग्ध अवस्था में खड़ा था। कोतवाली पुलिस को मुखबिर ने सूचना दी कि वाहन के अंदर कुछ संदिग्ध वस्तुएं हो सकती हैं और ड्राइवर नशे में धुत है। ‘इमरजेंसी सेवा’ के नाम पर खड़ी इस गाड़ी की हकीकत जानने जब कोतवाल महेंद्र मीणा तुरंत मौके पर खुद पहुँचे, तो पुलिस को देख ड्राइवर के हाथ-पांव फूल गए। वह पुलिस को देख गाड़ी लेकर रफूचक्कर हो गया। कोतवाल महेंद्र मीणा ने अपनी टीम के साथ दो घंटे तक उसका पीछा किया, लोकेशन ट्रेस की, लेकिन शातिर ड्राइवर फोन बंद कर पुलिस को चकमा देने में कामयाब रहा। सवाल यह उठता है कि अगर गाड़ी में सब कुछ सही था, तो उसे पुलिस को देख भागने की क्या जरूरत थी? क्या यह वाहन किसी बड़ी अनहोनी को अंजाम देने वाला था? इस वाहन के अंदर जीपीएस ट्रैकर लगा होता हैं। क्या सहायक अभियंता या निगम के पास इसे ट्रेक करने के संसाधन नही थे।

कोतवाल जी पैनी नजर से पकड़ में आया बिजली विभाग का ये वाहन
कहते हैं पुलिस से पंगा कई बार पद जाता हैं महंगा?कानून के हाथ लंबे होते हैं, इस बात को कोतवाल महेंद्र मीणा ने सच कर दिखाया। पुलिस ने अपने मुखबिर तंत्र के आधार पर गुरुवार को उस एफ.आर.टी. वाहन को जब्त कर लिया। बताया जा रहा हैं। कि, वह ड्राइवर आज भी फरार है जो पुलिस को चकमा देकर भागा था। कोतवाल महेंद्र मीणा ने बताया कि उपरोक्त वाहन को 207 MV ACT में सीज किया गया है। जाँच में सामने आया कि वाहन के पास न तो आरसी थी, न इंश्योरेंस और न ही चालक के पास ड्राइविंग लाइसेंस। जिस वाहन को जनता की सुरक्षा के लिए सड़कों पर होना चाहिए था, वह बिना दस्तावेजों के और चालक बिना लाइसेंस के ‘मौत का कबाड़’ लेकर दौड़ रहा था।
लगातार सुर्खियों में निगम, फिर भी फतेहपुर की सड़कों पर दौड़ रहा ‘खतरा’
बीते दिनों जन मानस शेखावाटी की स्पेशल टीम ने इन एफ.आर.टी. वाहनों पर बड़ा स्टिंग किया था, जिसमें कई वाहन बिना कागजों के कबाड़ मिले थे। इसके बाद एसई सीकर ने सख्त आदेश भी निकाले, लेकिन फतेहपुर में अधिकारियों की मिलीभगत से ये कबाड़ वाहन आज भी सड़कों पर बेखौफ दौड़ रहे हैं। ये वाहन न केवल पुलिस को परेशान कर रहे हैं, बल्कि अंधेरी रातों में किसी भी बड़े हादसे को न्यौता दे सकते हैं।

आरटीओ की कार्रवाई पर सवाल तो वही निगम ने दिया आरटीआई में गोलमाल जवाब
एक ओर जहाँ परिवहन विभाग के आरटीओ हनुमान सिंह और कोतवाल महेंद्र मीणा ने इन वाहनों पर कार्रवाई की है, बावजूद इसके कबाड़ वाहन बे खोफ होकर दौड़ रहे हैं। वहीं दूसरी ओर विभाग सूचना के अधिकार (RTI) के तहत जानकारी देने से बच रहा है। जब जागरूक नागरिकों ने चालकों के लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन की जानकारी माँगी, तो सहायक अभियंता (सिटी) ने इसे ‘निजी सूचना’ बताकर टाल दिया। जनता पूछ रही है कि सरकारी खजाने से लाखों रुपये लेने वाली कंपनी की जानकारी ‘जनहित’ में सार्वजनिक क्यों नहीं है? क्या इसी ‘गोलमाल’ की वजह से पुलिस को रात भर दौड़ाया जाता है?
3 लाख का भारी-भरकम बिल, और जनता ‘बाइक सवारों’ के भरोसे
हमारी पड़ताल में चौंकाने वाला सच सामने आया है। एक एफ.आर.टी. वाहन के लिए विद्युत विभाग संधा एंड कंपनी को प्रतिमाह करीब 2 लाख 99 हजार रुपये देता है। लेकिन ये गाड़ियाँ या तो रात भर गायब रहती हैं या पुलिस के साथ आंख-मिचौली का खेल खेलती हैं।

धरातल पर एक दर्जन से अधिक गांवों में मेंटेनेंस का काम ‘बाइक सवार’ कर रहे हैं:
भाकरवासी जीएसएस के गांवों में अंकित नाम का युवक बाइक से मेंटेनेंस कर रहा है। नवीपुरा जीएसएस के गांवों में प्रताप नाम का व्यक्ति बाइक के भरोसे सप्लाई संभाल रहा है। भगासरा जीएसएस में बाबू लाल नाम का बाइक सवार जनता की बिजली ठीक कर रहा है। जनता के टैक्स के लाखों रुपये ठेकेदार की जेब में जा रहे हैं और उपभोक्ता की बिजली सुरक्षा राम भरोसे चल रही है।
सवाल बड़ा यह हैं कि क्या एमडी अजमेर इस मामले पर कोई कार्रवाई करेंगे या या फिर पुलिस और बिजली विभाग का सड़को पर भागने का ये खेल जारी रहेगा
इनका क्या कहना हैं
”हमने संबंधित वाहन पर 207mv एक्ट में कार्यवाही कर वाहन को जब्त कर लिया गया हैं जांच चल रही हैं जांच के बाद साफ होगा कि आखिर पुलिस के आगे क्यों भगा था बिजली विभाग का ये वाहन – महेंद्र मीणा, थाना प्रभारी कोतवाली थाना फतेहपुर
”हमने विशेष जांच अभियान चलाकर बिजली विभाग के कई एफ आर टी वाहनों के चालान काटे थे कुछ वाहन ऑफिस छोड़कर भाग गए थे दो लोडर बिना कागजों के सीज किए गए तथा एक मशीन का एक लाख रुपए का चालान काटा गया बाकी अभी हमारी विशेष जांच चल रही हैं। बिना कागजों के वाहनों को बकसेंगे नही” – हनुमान सिंह तरड़, आर टी ओ उप परिवहन कार्यालय फतेहपुर सीकर
”यह मामला सुनकर अफसोस हुआ हैं। हमारे यहां ये सब भी चल रहा हैं क्या आपके पास जो भी एविडेंस हैं वो मुझे व्हाट्सएप या मेल पर उपलब्ध करवाए सभी पूर्व की खबरों की प्रतियां उपलब्ध करवाए मैं विशेष उच्च स्तरीय टीम बनाकर जांच करवाता हूं दोषियों को किसी भी हाल में माफ नही किया जाएगा” – सीशराम वर्मा, संभागीय मुख्य अभियंता (Chief Engineer) झुंझुनूं
आम आदमी का बिजली का तार कट जाए तो विभाग जुर्माना ठोक देता है, लेकिन यहाँ लाखों डकारने वाले ठेकेदार बिना कागजों और बिना लाइसेंस के ‘इमरजेंसी सेवा’ का मजाक उड़ा रहे हैं। अब देखना होगा कि क्या संभागीय मुख्य अभियंता की ‘जांच’ इस भ्रष्टाचार के अंधकार को दूर कर पाएगी या फतेहपुर की जनता इसी तरह कबाड़ वाहनों और बाइक सवारों के भरोसे बिजली के करंट का खतरा झेलती रहेगी। क्या आर टी ओ हनुमान सिंह इन कबाड़ वाहनों पर कानून का डंडा चला पाएंगे या नहीं ये देखना होगा
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