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खबर का असर : खुली पोल तो सीढ़ी लेकर दौड़ा सिस्टम, लाइनमैनो की जान से खिलवाड़ पर लगी लगाम


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खबर का असर : खुली पोल तो सीढ़ी लेकर दौड़ा सिस्टम, लाइनमैनो की जान से खिलवाड़ पर लगी लगाम

मौत के मुहाने पर चढ़कर काम कर रहे थे कर्मचारी, 'जन मानस' की खबर से जागा विभाग

जनमानस शेखावाटी सवंददाता : ​आबिद खान

​फतेहपुर : सीकर के फतेहपुर बिजली विभाग की सीटी और ग्रामीण शाखा में अब तक जो काम ‘जुगाड़’ के सहारे भगवान भरोसे चल रहा था, उसे “जनमानस शेखावाटी” की कलम ने ऐसी रफ्तार दी कि विभाग में काम कर रही संधा एंड कंपनी की सुस्त गाड़ी पटरी पर आ गई है। सालों से जिस ‘मौत के खेल’ को विभाग और संधा एंड कंपनी अपनी आंखों पर पट्टी बांधकर देख रहे थे, उस पर अब सुरक्षा का ताला लगता नजर आ रहा हैं।

​‘जुगाड़’ का अंत, सीढ़ी का स्वागत

​फतेहपुर सिटी और ग्रामीण शाखा में पिछले काफी समय से सुरक्षा के नाम पर मजाक चल रहा था। संधा एंड कंपनी की मेहरबानी देखिए-लाइनमैनों को बिजली के खंभों पर चढ़ाने के लिए न सीढ़ी थी, न सुरक्षा कवच। कर्मचारी अपनी जान को हथेली पर रखकर तारों के बीच लटक रहे थे। और गाड़ियों को सीढ़ी बनाकर काम कर रहे थे लेकिन जैसे ही “जनमानस शेखावाटी” ने इस लापरवाही का पोस्टमार्टम किया, विभाग की नींद ऐसी उड़ी कि आनन-फानन में एफआरटी (FRT) गाड़ियों पर सीढ़ियां चढ़ा दी गईं। ​अब फतेहपुर की सड़कों पर दौड़ती ये गाड़ियां केवल संसाधन नहीं, बल्कि सुरक्षा का ‘नया प्रतीक’ भी बन गई हैं। जो सिस्टम कल तक संसाधनों की कमी का कमी का बखान रहा था, आज वही विभाग सीढ़ी लेकर दोड़ता नजर आया।



क्या विभाग की नींद सिर्फ ‘खबर’ से ही टूटती है?

​यह बदलाव खुशी तो देता है, लेकिन एक चुभता हुआ सवाल भी छोड़ जाता है। क्या बिजली विभाग के अधिकारियों को अपनी जिम्मेदारी का एहसास सिर्फ तब होता है जब कोई मीडिया हाउस उनकी पोल खोलता है?
​क्या एक लाइनमैन की जान की कीमत किसी अखबार की सुर्खीयों  से कम है?

​सुरक्षा के जो नियम आज रातों-रात लागू हो गए, वे कल तक फाइलों में कहां दफन थे?

​यह सुधार सराहनीय है, लेकिन विभाग की कार्यशैली पर यह बड़ा तमाचा भी है कि उन्हें ‘जवाबदेही’ समझाने के लिए “जनमानस शेखावाटी” को मैदान में उतरना पड़ता हैं। संधा एंड कंपनी और विभाग के जिम्मेदार अधिकारी यह न भूलें कि यह सिर्फ एक शुरुआत है। ​सुरक्षा के ये इंतजाम कागजी न रहें, इसे सुनिश्चित करना अब विभाग की जिम्मेदारी है। “जनमानस शेखावाटी” की टीम अब पूरी तरह मुस्तैद है। किसी भी विभाग में अगर भ्रष्टाचार, लापरवाही या कर्मचारियों की सुरक्षा से खिलवाड़ हुआ, तो अगली खबर केवल पन्नों पर नहीं, बल्कि सीधे सिस्टम के ऑपरेशन की छपेगी क्योंकि “जनमानस शेखावाटी” की नज़रें अब हर उस ‘जुगाड़’ और भ्रष्टाचार पर हैं, जो जनता या कर्मचारीयो  की सुरक्षा से समझौता करते है।

“जनमानस शेखावाटी” का मकसद किसी अधिकारी या संस्था की साख पर सवाल उठाना नही हैं। बल्कि हमारा मकसद केवल खराब व्यवस्थाओं में सुधार याद दिलाना हैं।

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