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राज्यपाल बोले-नौकरी मिली तो जल्दी छोकरी भी मिल सकती है:बात ध्यान में रखना, केवल डिग्री वाला है तो गांव-गांव घूमेगा, नौकरी मिलेगी क्या


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राज्यपाल बोले-नौकरी मिली तो जल्दी छोकरी भी मिल सकती है:बात ध्यान में रखना, केवल डिग्री वाला है तो गांव-गांव घूमेगा, नौकरी मिलेगी क्या

अघोरी को मिली पीएचडी की उपाधि, छात्रों ने किया विरोध:बोले-नशे का प्रचार करने वाले लोगों को सम्मानित करके प्रमोशन लेना चाहते हैं VC

जनमानस शेखावाटी सवंददाता : नैना शेखावत

सीकर : राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने कहा- आपने डिग्री तो हासिल की, लेकिन डिग्री हासिल करने के बाद आगे क्या करोगे। नौकरी मिली तो मिल जाएगी। बिजनेस करना होगा तो बिजनेस करोगे। लेकिन अपन को अच्छी नौकरी और झटपट नौकरी चाहिए। नौकरी मिली तो जल्दी छोकरी भी मिल सकती है, वरना नहीं। यह बात भी ध्यान में रखना।

हरिभाऊ बागड़े ने कहा- केवल डिग्री वाला है तो गांव-गांव घूमेगा, कि कहीं पर जॉब मिलेगी क्या। इसलिए हाथ में कौशल होना जरूरी है। राजस्थान तो कौशल की खान है। रणकपुर में भगवान महावीर का एक मंदिर है जिसे तैयार करने में 64 साल लगे। उसमें नक्काशी और कलाकारी का इतना बेहतरीन काम है। आप देखोगे तो मुंह में उंगली डालोगे कि क्या काम है।

सीकर की पंडित दीनदयाल उपाध्याय शेखावटी यूनिवर्सिटी में आज छठा दीक्षांत समारोह आयोजन हुआ। राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। यूनिवर्सिटी ने अघोरी शैलेंद्रनाथ को पीएचडी की मानद उपाधि दी। इसके विरोध में स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) के छात्रों ने प्रदर्शन किया।

यूनिवर्सिटी ने अघोरी शैलेंद्रनाथ को पीएचडी की मानद उपाधि दी।

राज्यपाल ने शेखावटी यूनिवर्सिटी कहीं ये 6 अहम बातें…

1. शेखावाटी की धरती सबसे ज्यादा फौजी-अधिकारी देने वाली

राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने कहा- शेखावाटी की धरती देश में सबसे ज्यादा फौजी और अधिकारी देने वाली है। यदि व्यापार जगत की बात करें तो खासकर मारवाड़ी लोग जैसे बिड़ला, बजाज देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाते हैं। इतना ही नहीं, राजस्थान के व्यापारी आपको देश और विदेश में मिलेंगे।

2. खुद की नौकरी करो, व्यापार करो और पैसे भी कमाओ

राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने कहा- दीक्षांत समारोह कोई अंत नहीं बल्कि जीवन की नई चुनौतियों की शुरुआत है। डिग्री प्राप्त की, इसका मतलब यह नहीं कि आपकी शिक्षा पूरी हो गई, यह नहीं मानना चाहिए। आपने विश्वविद्यालय में जो भी अध्ययन किया और जो भी ज्ञान प्राप्त किया, उससे देश की उन्नति और विकास कैसे हो, इसके बारे में सोचते रहो। खुद की नौकरी करो, व्यापार करो और पैसे भी कमाओ। लेकिन उसके साथ-साथ आप अपने समाज की भी चिंता करो।

राज्यपाल ने कहा कि हमारे देश में अंग्रेज आने के पहले 8 लाख गुरुकुल थे। उसका रिकॉर्ड भी उनके पास है। उन गुरुकुल में जो बच्चे जाते थे, वे आयुर्वेद और इंजीनियरिंग भी सीखते थे। पहले डिग्री नहीं होती थी, लेकिन कला होती थी। जिसके हाथ में कौशल होगा, वह कभी भूखा नहीं रहेगा।

यूनिवर्सिटी पहुंचने पर राज्यपाल ने यूनिवर्सिटी के गेट पर प्रेरणा स्थल का लोकार्पण किया।

3. मंदिर बनाने के बाद 80 टन का पत्थर रखा गया

राज्यपाल ने कहा- कर्नाटक के मैसूर में भी एक मंदिर है, जो 270 फीट का है। उस मंदिर के ऊपर एक 80 टन का पत्थर लेकर गए। मंदिर बनाने के बाद 80 टन का पत्थर रखा गया। उस जमाने में तो ऐसी कोई मशीनरी नहीं थी फिर भी उन्होंने सोचा कि इस तरह से पत्थर ऊपर लेना है तो उन्होंने मिट्टी का 6 किलोमीटर का एक रैंप बनाया और हाथियों के जरिए पत्थर वहां रखा गया, यही तो इंजीनियरिंग है।

यूनिवर्सिटी में टॉप करने वाले छात्रों को मेडल देकर सम्मानित करते राज्यपाल।

4. लोगों का धर्मांतरण किया और काटा भी, मारा भी था

राज्यपाल ने आगे कहा- भारत ने तो हजारों साल तक संकट देखे हैं, लड़ाई और आक्रमण के। यहां पर आक्रमण करने वालों ने हमारी संस्कृति को भी उखाड़ने का सोचा, हमारी शिक्षा पद्धति उन्होंने बदल दी। अंग्रेजों ने भी बोला कि हमें भारत के लोगों को गुलाम बनाना है तो उनको भूखा मारना होगा। जब तक भारत के लोग भूखे नहीं रहेंगे तब तक तो अपने गुलाम नहीं बनेंगे।

मुगलों का भी संकट था, उन्होंने लोगों का धर्मांतरण किया और काटा भी, मारा भी था। यह संकट भी हमने सह लिए। अभी न पेट्रोल बढ़ा, न डीजल बढ़ा और न गैस बढ़ा फिर भी लोग बोल रहे हैं यह बढ़ा, वह बढ़ा। वह लोग तो राजनीति कर रहे हैं। यह बात राजनीति की नहीं बल्कि सबके एक साथ एकजुट रहने की बात है। जो अलग चलता है उनका मत सुनो, लोग भी नहीं सुनेंगे।

अघोरी शैलेंद्रनाथ को मानद उपाधि दिए जाने के विरोध को देखते हुए कार्यक्रम स्थल पर पुलिस बल भी तैनात किया गया था।
अघोरी शैलेंद्रनाथ को मानद उपाधि दिए जाने के विरोध को देखते हुए कार्यक्रम स्थल पर पुलिस बल भी तैनात किया गया था।

5. आक्रमण करने वालों को बप्पा रावल ने बहुत पीटा

राज्यपाल ने आगे कहा- जब हमारे पास नालंदा और तक्षशिला जैसे विश्वविद्यालय थे तब विदेश के लोग यहां पर पढ़ने के लिए आते थे। तक्षशिला पंजाब में था रावलपिंडी के पास। अभी भी 34-35 किलोमीटर दूर खंडहर पड़ा होगा। रावलपिंडी पता है किसके नाम से है।

चित्तौड़गढ़ का राजा बप्पा रावल जिन पर आक्रमण हुआ था। उन पर आक्रमण करने वालों को बप्पा रावल ने बहुत पीटा। पीटते-पीटते उनको ईरान और इराक तक पहुंचा दिया, फिर वह लोग वापस एक गांव में आ गए। उसी जगह का नाम रावल और पिंडी का मतलब पंजाब में गांव को पिंडी बोलते हैं। इसलिए ही वह रावलपिंडी हो गया जो बप्पा रावल नाम से बना है।

अघोरी शैलेंद्रनाथ को पीएचडी की मानद उपाधि देने को लेकर छात्रों ने कटराथल बस स्टैंड से लेकर यूनिवर्सिटी के गेट तक विरोध रैली निकाली।
अघोरी शैलेंद्रनाथ को पीएचडी की मानद उपाधि देने को लेकर छात्रों ने कटराथल बस स्टैंड से लेकर यूनिवर्सिटी के गेट तक विरोध रैली निकाली।

6. इतिहास हमें कहां पर पढ़ाया गया

राज्यपाल ने कहा- इतिहास हमें कहां पर पढ़ाया गया है? ऐसा इतिहास हमें स्कूल में नहीं पढ़ाया गया। हमको इतिहास पढ़ाया गया मुगलों का। औरंगजेब बड़ा ताकतवर था, अकबर भी बहुत होशियार था, यह सब कुछ पढ़ाया गया। राणा प्रताप नहीं पढ़ाया गया, छत्रपति शिवाजी महाराज नहीं पढ़ाया गया।

जिनसे हमारा धैर्य बढ़ जाता है, ऐसे महापुरुषों और योद्धाओं के बारे में हमें नहीं पढ़ाया गया। ऐसे लोगों को कोई पहचान तक नहीं दी गई। अब नालंदा और तक्षशिला का इतिहास फिर से लौट कर आएगा। यह भावना रखो, ऐसा जरूर हो सकता है।

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