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“हमिदखानी परिवार की तीसरी पीढ़ी की विरासत – आर्मी”


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“हमिदखानी परिवार की तीसरी पीढ़ी की विरासत – आर्मी”

“हमिदखानी परिवार की तीसरी पीढ़ी की विरासत - आर्मी”

जनमानस शेखावाटी सवंददाता : मोहम्मद अली पठान

चूरू : जिला मुख्यालय पर स्थित ‌ आथूना मोहल्ला मरहूम शकरू ख़ान हमिदखानी आर्मी में थे। उन्होंने अपने बेटों को भी देश सेवा के लिए आर्मी में जाने के लिए प्रेरित किया। इसका नतीजा यह रहा कि उनके बेटे आरिफ़ ख़ान और मुबारिक ख़ान दोनों आर्मी में सूबेदार बने।आरिफ़ ख़ान सूबेदार पद से रिटायर होकर इस समय शिक्षक प्रतियोगिता की तैयारी कर रहे हैं और अपनी तीसरी पीढ़ी, यानी अपने बेटे हसन ख़ान को अपने पिता की विरासत सौंप चुके हैं। हसन ख़ान भी आर्मी में हैं। आरिफ़ ख़ान ने अपने बेटे हसन की शादी बिना दहेज के की। उनके छोटे बेटे आफ़ताब ख़ान विदेश की एक बेहतरीन यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस कर रहे हैं। वे अपने डॉक्टर बेटे की शादी भी बिना दहेज के ही करेंगे।

युवाओं के लिए प्रेरणा : सूबेदार आरिफ़ ख़ान युवाओं को लेकर बहुत चिंतित रहते हैं। वे कहते हैं कि उनका निवास स्थान तुगलक कॉलोनी में खुले मैदान में है। अगर कोई भी युवा आकर मिलिट्री की ट्रेनिंग लेना चाहता है और देश के लिए कुछ कर गुजरने का मजबूत इरादा रखता है, तो वे ऐसे युवाओं को खुद बिल्कुल मुफ्त ट्रेनिंग देंगे।वे चाहते हैं कि मिलिट्री में उनकी कौम के घटते हुए पदों को बचाया जा सके और इसके लिए वे लगातार युवाओं को आर्मी की ओर प्रेरित कर रहे हैं। सूबेदार आरिफ़ ख़ान एक बहुत ही साधारण परिवार से निकलकर आगे बढ़े हुए युवा हैं। वे हंसमुख मिजाज, सरल स्वभाव और कौम के लिए चिंता करने वाले इंसान हैं।”

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