सरकेल परिवार द्वारा हाशमी मस्जिद मे रोजा इफ्तार की दावत में देश- प्रदेश के लिए अमन चैन की दुआएं की
सरकेल परिवार द्वारा हाशमी मस्जिद मे रोजा इफ्तार की दावत में देश- प्रदेश के लिए अमन चैन की दुआएं की
जनमानस शेखावाटी सवंददाता : मोहम्मद अली पठान
चूरू : जिला मुख्यालय पर कृषि उपज मंडी के पीछे मस्जिद अल- हाशमी में मरहूम शौकत खा सरकेल के परिवार द्वारा रोजा इफ्तार की दावत रखी गई जिसमें काफी संख्या में रोजेदारों ने शिरकत की ओर देश और प्रदेश के लिए अमन- चैन की दुआएं की, रमज़ान के पवित्र महीने में रोज़ा इफ्तार सूर्यास्त के समय रोज़ा खोलने की एक अत्यंत महत्वपूर्ण और खुशी की रस्म है। दिनभर भूखे-प्यासे रहने के बाद, मुसलमान मगरिब की अजान की आवाज के साथ ही रोजेदार खजूर, पानी और स्वादिष्ट व्यंजनों के साथ इफ्तार करते हैं। इफ्तार से पहले दुआ पढ़ना और सामूहिक रूप से रोजा खोलने भाईचारे को बढ़ाता है। इफ्तार का समय मग़रिब की अज़ान (सूर्यास्त) के साथ शुरू होता है।

पैगंबर मुहम्मद साहब के अनुसार, रोज़ा खजूर या पानी से खोलना सुन्नत है। रोजा इफ्तार की दुआ: मस्ज़िद अल-हाशिमी के इमाम मौलाना कुर्बान साहब ने पढ़ाई “अल्लाहुम्मा इन्नी लाका सुमतु व बिका आमन्तु व अलैका तवक्कलतु व अला रिज़्किका आफतारतु” (हे अल्लाह, मैंने तेरे लिए रोज़ा रखा और तेरे रिज़्क से इफ्तार किया) रोजा इफ्तार मे आदिल खान, साजिद खान, गुलाम नबी खा चायल, हाजी इब्राहिम खान, हाजी अनवर तुगलक, अब्बास खान, हाजी मोहम्मद हुसैन, तौफीक खान पार्षद, शेर मोहम्मद, निजामुद्दीन खान, अयूब खा गोड, मोहम्मद अली खान, गजल भाटी आदि ने शिरकत की रोजा इफ्तार सदभावना भाईचारा का संदेश देता हैं । जिससे समुदाय में एकता और करुणा की भावना मजबूत होती है। इफ्तार सिर्फ भोजन नहीं, बल्कि अल्लाह के करीब आने और रोज़े की इबादत को मुकम्मल करने का एक अनमोल अवसर है। इफ्तार में सैकड़ो की संख्या में लोगों ने रोजा इफ्तार किया और नमाज अदा की देश विदेश के लिए अमन-चैन-शांति की दुआए की। साजिद खान एवं आदिल खान ने मेहमान नवाजी की।
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