क्षेत्र में आवारा पशुओं के आतंक से परेशान लोगों को प्रशासन कि तरफ से कोई राहत नहीं
जनहित में किया जाए इस समस्या का समाधान प्रशासन ले सज्ञान
जनमानस शेखावाटी सवंददाता : मोहम्मद अली पठान
लाडनूं : शहर के मुख्य रास्तों व आम गलियों में भी पशुओं का रहता है खतरा सामाजिक कार्यकर्ता मो० मुश्ताक खान कायमखानी ने जनहित में क्षेत्र की जनता की जिंदगी से जुड़े हुए इस महत्वपूर्ण मामले को उठाते हुए बताया कि लगभग समूचे शहरी क्षेत्र में बेसहारा आवारा गोवंश के अनियंत्रित विचरण के चलते नागरिकों की समस्याएं लगातार बढ़ती ही जा रही है। इस समस्या से लोगों को राहत दिलाने के लिए स्थानीय नगर पालिका और उपखंड प्रशासन कोई भी बातों और वायदों से ऊपर नहीं निकल पा रहे हैं। राज्य सरकार ने विभिन्न नगर पालिका क्षेत्रों में नंदी शालाओं का निर्माण करवाया है, लेकिन लाडनूं में अभी तक ऐसा कोई प्रयास सामने फलीभूत नहीं हुआ है।

खिंदास की नंदीशाला का भी नहीं हो रहा उपयोग स्थानीय रामानंद गौशाला में दानदाताओं और भामाशाहों की ओर से खिंदास स्थित रामानंद गौशाला की ब्रांच में एक विशाल नंदी शाला का निर्माण करवाया गया था, परन्तु उसमें आवारा गोवंश की भर्ती के नाम पर सिर्फ कागजी खानापूर्ति ही हुई है, धरातल पर नागरिकों के लिए समस्या पूर्ववत ही बनी हुई है, उसमें एक प्रतिशत का भी फर्क नजर नहीं आया है। बताया जा रहा है कि प्रशासनिक स्तर पर इसकी उपेक्षा किए जाने से समाधान अब तक ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। गौरतलब है कि इस नंदी शाला में करीब 400 नंदियों के रहने की व्यवस्था की गई है।

पीछले दिनों में तीन दर्जन लोग हुए आवारा सांडों से चोटिल कायमखानी ने बताया की शहर के पहली पट्टी दड़ा से लेकर जैन विश्व भारती तक और अन्य पट्टियों और जैन विश्व भारती के ईर्द-गिर्द के क्षेत्र, शहरीया बास चौक, काली जी का चौक, कुम्हारों का बास, कमल चौक, मालियों का बास, सब्जी मंडी, बस स्टैंड, न्याय के मंदिर न्यायालय परिसर आदि शहर के सभी प्रमुख क्षेत्रों में आवारा गोवंश घूमते हुए और आपस में लड़ते हुए देखा जा सकता है इसके अलावा आवारा सांड दिन-रात खुलेआम क्षेत्र की गलियों और आम रास्तों में घूमते हुए नजर आते रहते हैं और लोगों को चोटिल तक करते रहते हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 7 दिनों में कम से कम 20 लोग इन आवारा पशुओं के आतंक की वजह से चोटिल हो गए।
रात्रि के समय यही सांड सड़कों पर आकर आपस में लड़ते हैं और वाहनों को नुकसान पहुंचाते हैं। तब नजारा और भी चिंताजनक हो जाता है, जब ये आवारा पशु अस्पतालों और सार्वजनिक स्थानों सहित भीड़-भाड़ वाले स्थानों पर बेखौफ होकर अपनी जोर-आजमाइश करते हैं और भिड़ते हुए राहगीरों, वाहनों आदि पर टकराते हैं। इससे अनेक बड़े-बुजुर्ग, महिलाओं-बच्चे, बीमार आदि चोटिल हो जाते हैं। लिखित सूचनाओं का भी प्रशासन पर कोई असर नहीं।
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