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झुंझुनूं में ‘मिट्टी के लड्डू’,बीजों से लगाया मानसून का अनुमान:शीलता माता को ठंडे पकवानों भोग लगाया, खेजड़ी की पूजा कर घर लाई गई छाल


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झुंझुनूं में ‘मिट्टी के लड्डू’,बीजों से लगाया मानसून का अनुमान:शीलता माता को ठंडे पकवानों भोग लगाया, खेजड़ी की पूजा कर घर लाई गई छाल

झुंझुनूं में ‘मिट्टी के लड्डू’,बीजों से लगाया मानसून का अनुमान:शीलता माता को ठंडे पकवानों भोग लगाया, खेजड़ी की पूजा कर घर लाई गई छाल

झुंझुनूं : झुंझुनूं जिले के ग्रामीण अंचलों में शीतलाष्टमी पर आस्था और खेती से जुड़ी अनोखी परंपरा देखने को मिली। यहां महिलाओं ने खरीफ फसलों के बीजों को मिट्टी में मिलाकर विशेष ‘मिट्टी के लड्डू’ बनाए। मान्यता है कि इन लड्डुओं में बीजों के अंकुरण और उनकी स्थिति को देखकर आने वाले मानसून और फसलों की पैदावार का पूर्वानुमान लगाया जाता है।

बीजों के अंकुरण से फसल का लगाया जाता है अंदाजा

ग्रामीण क्षेत्रों में यह परंपरा वर्षों से निभाई जा रही है। महिलाएं अलग-अलग फसलों के बीज मिट्टी में मिलाकर छोटे-छोटे लड्डू बनाती हैं और उन्हें सुरक्षित स्थान पर रखती हैं। ग्रामीण महिला चंद्रकला ने बताया कि यह परंपरा खेती से जुड़ी लोकज्ञान की अनोखी विधि है। बीजों के अंकुरण को देखकर अंदाजा लगाया जाता है कि इस साल किस फसल की पैदावार बेहतर रहेगी। यह परंपरा आस्था के साथ-साथ खेती के अनुभव और ज्ञान का भी हिस्सा है।

महिलाओं ने खरीफ की फसलों के विभिन्न बीजों को मिट्टी में मिलाकर विशेष 'मिट्टी के लड्डू' तैयार किए।
महिलाओं ने खरीफ की फसलों के विभिन्न बीजों को मिट्टी में मिलाकर विशेष ‘मिट्टी के लड्डू’ तैयार किए।

खेजड़ी की पूजा कर घर लाई गई छाल

शीतलाष्टमी के अवसर पर महिलाओं ने समूह बनाकर खेजड़ी के पेड़ की पूजा भी की। ग्रामीण मान्यता के अनुसार पूजा के बाद खेजड़ी की छाल का छोटा हिस्सा घर लाना शुभ माना जाता है। ग्रामीणों का विश्वास है कि खेजड़ी की यह छाल घर में सकारात्मकता, शांति और समृद्धि लाती है। यह परंपरा प्रकृति के प्रति सम्मान और पर्यावरण संरक्षण का भी संदेश देती है।

माता के मंदिरों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

शीतलाष्टमी के अवसर पर झुंझुनूं के शहरी और ग्रामीण इलाकों में सुबह से ही मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ दिखाई दी। रंग-बिरंगी पारंपरिक वेशभूषा में सजी महिलाओं ने शीतला माता की पूजा-अर्चना की। इस दिन परंपरा के अनुसार घरों में चूल्हा नहीं जलाया जाता। महिलाएं एक दिन पहले यानी सप्तमी को बनाए गए ठंडे पकवानों (बासोड़ा) जैसे दही, राबड़ी, पुए और पकौड़ी का माता को भोग लगाती हैं।

ठंडा भोजन करने की भी मान्यता

श्रद्धालु कौशल्या ने बताया कि शीतला माता की पूजा सदियों से की जा रही है। इस दिन ठंडा भोजन करने की परंपरा है। मान्यता है कि माता के आशीर्वाद से चर्म रोगों सहित अन्य बीमारियों से मुक्ति मिलती है और परिवार निरोग रहता है।

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