मदरसे के बच्चे भी पढ़ रहे हैं विवेकानंद के संदेश
प्रदेशभर में मुस्लिम युवा ने बांटे 80 हजार विवेकानंद कैलेंडर
सीकर : सीकर जिले के कई सरकारी विद्यालयों और मदरसों में छात्रों को स्वामी विवेकानंद के प्रेरक संदेशों से जोड़ने के उद्देश्य से वर्ष 2026 के विवेकानंद कैलेंडर नि:शुल्क वितरित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में मदरसा डॉ. जाकिर हुसैन उच्च प्राथमिक विद्यालय में 154 छात्र-छात्राओं और शिक्षकों को विवेकानंद कैलेंडर वितरित किए गए।
इस अवसर पर मदरसे के प्रधानाचार्य करण सिंह सामोता, समस्त स्टाफ तथा भीमसर निवासी डॉ. जुल्फिकार ने विद्यार्थियों को स्वामी विवेकानंद और खेतड़ी के राजा अजीत सिंह के ऐतिहासिक संबंधों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि स्वामी विवेकानंद अपने जीवनकाल में तीन बार खेतड़ी आए थे और उनका नाम, पोशाक तथा पगड़ी से जुड़ी कई ऐतिहासिक घटनाएं शिकागो के विश्व धर्म सम्मेलन सहित खेतड़ी से जुड़ी हुई हैं।
उन्होंने बताया कि खेतड़ी में देश का पांचवां और राजस्थान का पहला अजीत-विवेक संग्रहालय स्थापित है, जिसमें स्वामी विवेकानंद और राजा अजीत सिंह के साथ बिताए 109 दिनों की महत्वपूर्ण घटनाओं को प्रदर्शित किया गया है। इससे पहले भी डॉ. जुल्फिकार सीकर जिले के लक्ष्मणगढ़, जाजोद सहित कई गांवों के विद्यालयों में छात्र-छात्राओं और युवाओं को विवेकानंद कैलेंडर नि:शुल्क वितरित कर चुके हैं।
शोध और लेखन में भी सक्रिय
डॉ. जुल्फिकार ने स्वामी विवेकानंद पर पीएचडी की है और उनके जीवन तथा विचारों पर अब तक पांच पुस्तकें लिख चुके हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2005 से 2009 के बीच किए गए अपने शोध ने उनके जीवन की दिशा बदल दी। उनका कहना है कि स्वामी विवेकानंद के विचार किसी एक धर्म तक सीमित नहीं हैं, बल्कि मानवता, राष्ट्र निर्माण और युवाशक्ति को प्रेरित करने वाले हैं। उन्होंने यह भी बताया कि रामकृष्ण मिशन खेतड़ी पर पीएचडी करने वाले वे देश के पहले मुस्लिम युवा हैं।
80 हजार कैलेंडर कर चुके वितरित
डॉ. जुल्फिकार पिछले सात वर्षों से स्वामी विवेकानंद के प्रेरक संदेशों वाले कैलेंडर नि:शुल्क वितरित कर रहे हैं। अब तक वे दिल्ली सहित राजस्थान के अलवर, जयपुर, बीकानेर, सीकर, चूरू, हनुमानगढ़ और झुंझुनूं जिलों के सरकारी और निजी विद्यालयों, मदरसों, वेद विद्यालयों, महाविद्यालयों तथा विश्वविद्यालयों में लगभग 80 हजार कैलेंडर वितरित कर चुके हैं।
वे भीमसर, नूआं, सिरियासर, आबूसर, अणगासर, अलसीसर, मलसीसर और टमकोर सहित लगभग 35 गांवों में पहुंचकर युवाओं से संवाद करते हैं। उनके हाथ में किताबें और जुबान पर प्रेरणा के संदेश होते हैं। उनका कहना है कि स्वामी विवेकानंद ने शक्ति, सेवा और आत्मविश्वास की जो त्रिवेणी दी है, वह हर धर्म के लिए समान रूप से प्रेरणादायक है। उनका लक्ष्य एक लाख युवाओं तक स्वामी विवेकानंद के विचार पहुंचाने का है। विवेकानंद कैलेंडर 2026 सभी धर्मों के प्रति सम्मान, प्रेम और सहिष्णुता का संदेश देता है तथा एकता और भाईचारे को बढ़ावा देता है।
रामकृष्ण मिशन से बचपन का जुड़ाव
डॉ. जुल्फिकार के पिता जाफर हुसैन खेतड़ी स्थित हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड में कार्यरत थे, जहां से उनकी प्रारंभिक शिक्षा हुई। स्कूली दिनों में ही वे रामकृष्ण मिशन से जुड़े और मिशन के कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी करने लगे। इसी वातावरण ने उनके मन में स्वामी विवेकानंद पर कुछ विशेष करने की प्रेरणा दी।
पीएचडी के दौरान उन्होंने देश के प्रसिद्ध बेलूर मठ सहित 50 से अधिक मठों का भ्रमण किया तथा सिंगापुर, श्रीलंका और बांग्लादेश के मठों में रहकर भी अध्ययन किया।
विवेकानंद पर लिखी प्रमुख पुस्तकें
डॉ. जुल्फिकार स्वामी विवेकानंद पर कई चर्चित पुस्तकें लिख चुके हैं, जिनमें रामकृष्ण मठ एवं रामकृष्ण मिशन, स्वामी विवेकानंद चिंतन एवं रामकृष्ण मिशन खेतड़ी, राजस्थान में स्वामी विवेकानंद, रामकृष्ण मिशन बांग्लादेश (ढाका) का अध्ययन तथा स्वामी विवेकानंद की कुछ प्रेरक घटनाएं शामिल हैं।
उनका मानना है कि महापुरुषों के विचार किसी एक धर्म की सीमाओं में नहीं बंधते। उनका यह अभियान सामाजिक समरसता का अनूठा उदाहरण बन गया है, जिसमें एक मुस्लिम युवा स्वामी विवेकानंद को अपना आदर्श मानकर भारतीय संस्कृति और राष्ट्रभाव को मजबूत करने का प्रयास कर रहा है।
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