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संस्कारों की जन्मभूमि गायत्री विद्यापीठ में भव्य ‘ज्ञानोदय महोत्सव–2026’ सम्पन्न


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संस्कारों की जन्मभूमि गायत्री विद्यापीठ में भव्य ‘ज्ञानोदय महोत्सव–2026’ सम्पन्न

संस्कारों की जन्मभूमि गायत्री विद्यापीठ में भव्य ‘ज्ञानोदय महोत्सव–2026’ सम्पन्न

नवलगढ़ : अत्यंत भव्य, गरिमामय, ऐतिहासिक एवं जनसहभागिता से परिपूर्ण आयोजन के रूप में शनिवार को गायत्री विद्यापीठ में ‘ज्ञानोदय महोत्सव–2026’ का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम पूज्य महाराज श्री सेवादास जी महाराज, पीठाधीश्वर खटीकान बगीची, सीकर के पावन सानिध्य में सम्पन्न हुआ।

महाराज श्री के कर-कमलों द्वारा विद्यालय की विशाल एवं अत्याधुनिक विज्ञान प्रयोगशाला, समृद्ध प्रज्ञा पुस्तकालय तथा आधुनिक कंप्यूटर लैब का विधिवत फीता काटकर उद्घाटन किया गया। अपने आशीर्वचनों में उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल डिग्री प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि संस्कार, अनुशासन और राष्ट्रभावना जागृत करने की साधना है। उन्होंने प्रारंभिक कक्षाओं से प्रयोगात्मक शिक्षा एवं डिजिटल सुविधाओं के विस्तार को दूरदर्शी एवं समाजहितकारी कदम बताया।

प्रयोगात्मक शिक्षा पर विशेष बल

समारोह के मुख्य अतिथि डॉ. दया शंकर जांगिड़ ने कहा कि प्रतिस्पर्धात्मक युग में वही विद्यार्थी आगे बढ़ेगा, जिसे प्रारंभ से ही प्रयोगात्मक ज्ञान और तकनीकी दक्षता प्राप्त हो। उन्होंने विद्यालय की विज्ञान प्रयोगशाला में घुलनशीलता, घनत्व, चुंबकीय गुण एवं विद्युत परिपथ जैसे प्रयोगों की व्यवस्था की सराहना करते हुए इसे वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास बताया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रधानाचार्य कृष्ण कुमार दायमा ने की। उन्होंने कहा कि विद्यालय का उद्देश्य केवल उत्कृष्ट परीक्षा परिणाम देना नहीं, बल्कि ऐसे विद्यार्थी तैयार करना है जो ज्ञान में प्रखर, संस्कारों में दृढ़, अनुशासन में आदर्श और व्यवहार में श्रेष्ठ हों। उन्होंने विज्ञान प्रयोगशाला और आधुनिक कंप्यूटर लैब को भविष्य निर्माण की आधारशिला बताया।

वाईस प्रिंसिपल श्रीमती ज्योति दायमा ने कहा कि गायत्री विद्यापीठ संस्कार और विज्ञान का संगम है, जहाँ तीसरी कक्षा से ही प्रयोगात्मक शिक्षा दी जाती है तथा डिजिटल सशक्तिकरण पर विशेष बल दिया जाता है।

विद्यार्थियों का सम्मान

कार्यक्रम के दौरान सैकड़ों विद्यार्थियों को खेल, अनुशासन एवं विभिन्न प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए अतिथियों द्वारा पुरस्कार प्रदान किए गए। इससे बच्चों में उत्साह और आत्मविश्वास का संचार हुआ। विशिष्ट अतिथियों एवं गणमान्य नागरिकों ने विद्यालय की प्रगति, पारदर्शी व्यवस्था और सामाजिक योगदान की सराहना की। आयोजन में अनुशासन, गरिमा और ऊर्जा का अद्भुत समन्वय देखने को मिला।

‘ज्ञानोदय महोत्सव–2026’ ने यह संदेश दिया कि जब स्पष्ट उद्देश्य, समर्पित नेतृत्व और समाज का सहयोग एक साथ जुड़ते हैं, तब शिक्षा वास्तव में परिवर्तन का सशक्त माध्यम बनती है। इस अवसर पर अतिथियों का शाल, श्रीफल एवं पुष्पहार से सम्मान किया गया तथा विद्यालय परिवार, अभिभावकों और सैकड़ों नागरिकों की गरिमामयी उपस्थिति रही।

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