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विधायक मील ने 2011 से पूर्वनियुक्त शिक्षकों का मुद्दा उठाया:बोले- नियुक्ति के समय एक्ट अनिवार्य नहीं था, अब परीक्षा थोपना गलत


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विधायक मील ने 2011 से पूर्वनियुक्त शिक्षकों का मुद्दा उठाया:बोले- नियुक्ति के समय एक्ट अनिवार्य नहीं था, अब परीक्षा थोपना गलत

विधायक मील ने 2011 से पूर्वनियुक्त शिक्षकों का मुद्दा उठाया:बोले- नियुक्ति के समय एक्ट अनिवार्य नहीं था, अब परीक्षा थोपना गलत

जनमानस शेखावाटी सवंददाता : अशोक सिंह शेखावत

रींगस : विधानसभा सत्र के दौरान शुक्रवार शाम को विधायक सुभाष मील खंडेला ने 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि नियुक्ति के समय एक्ट की कोई अनिवार्यता नहीं थी, इसलिए अब उन पर परीक्षा थोपना न्यायसंगत नहीं है। विधायक मील ने बताया कि प्रदेश में जिन शिक्षकों की नियुक्तियां 2011 से पहले नियमों के अनुसार हुई थीं, उन पर सर्वोच्च न्यायालय के एक्ट अनिवार्य संबंधी निर्णय के बाद राज्य सरकार द्वारा एक्ट लागू करने की प्रक्रिया की जा रही है। उन्होंने कहा कि उस समय एक्ट की कोई अनिवार्यता नहीं थी और नियुक्तियां नियमों व योग्यता के आधार पर ही हुई थीं।

विधायक ने कहा कि कई सालों से लगातार सेवाएं दे रहे इन शिक्षकों पर दोबारा परीक्षा थोपना उचित नहीं है। इस स्थिति के कारण हजारों शिक्षकों और उनके परिवारों में असुरक्षा और तनाव का माहौल बना हुआ है। गुणवत्ता में सुधार के लिए प्रशिक्षण और मूल्यांकन के अन्य विकल्प भी अपनाए जा सकते हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि अनेक न्यायालयों, जिनमें सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया भी शामिल है, ने अपने मत में कहा है कि नियुक्ति के समय लागू नियम ही निर्णायक होने चाहिए। सरकार से मांग की गई है कि 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को एक्ट की अनिवार्यता से शिथिलता प्रदान की जाए। वैकल्पिक रूप से, सुप्रीम कोर्ट में दोबारा विचार याचिका दायर कर शिक्षकों का पक्ष रखा जाए।

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