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माहे रमजान एक पवित्र महीना है । जो इबादत-आत्म संयम-आत्म शुद्धि और जरूरतमंदों की मदद के लिए समर्पित है – अयूब खान रिटायर्ड एडिशनल एसपी


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माहे रमजान एक पवित्र महीना है । जो इबादत-आत्म संयम-आत्म शुद्धि और जरूरतमंदों की मदद के लिए समर्पित है – अयूब खान रिटायर्ड एडिशनल एसपी

माहे रमजान एक पवित्र महीना है । जो इबादत-आत्म संयम-आत्म शुद्धि और जरूरतमंदों की मदद के लिए समर्पित है - अयूब खान रिटायर्ड एडिशनल एसपी

जनमानस शेखावाटी सवंददाता : मोहम्मद अली पठान

चूरू : जिला मुख्यालय से रिटायर्ड एडिशनल एसपी अयूब खान ने माहे रमजान की मुबारकबाद देते हुए कहा की माहे रमजान इस्लामिक कैलेण्डर का सबसे पवित्र महिना है। जो इबादत आत्म संयम, आत्मशुद्धि और जरूरत मंदो की मदद के लिए समर्पित है।
इस माह में रोजा रखना इस्लाम के प्रमुख पांच स्तम्भों (पिलर्स) में से एक है। इस महीने में पैगम्बर मोहम्मद साहब पर कुरआन -ए -पाक नाजिल हुआ। ‌ जो रूहानी तरक्की और भाई चारे का संदेश देता है। रमजान के पवित्र और पाक महीने में अल्लाह ने पैगंबर मोहम्मद साहब के जरीए ‌ कुराने-ए- पाक को मानवता के मार्गदर्शन के लिए भेजा।

माहे रमजान में सुबह सेहरी से शाम इफ्तार, तक बिना कुछ खाए -पिए रोजा रखना केवल शारीरिक भूख को नियंत्रित नहीं करता ‌ बल्कि आत्मा को शुद्ध करने और अल्लाह के करीब आने का एक बड़ा माध्यम है। इस महिने में की गई इबादत ओर नेकी का सवाब कई गुणा बढ जाता है। तराबीह की नमाज में पूरा कुरआने ए पाक पढ़ाया और सुनाया जाता है।

रमजान ‌का महिना दान ‌- पुण्य और सहानुभूति अर्थात जकात की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।

रमजान ‌का महिना गरीबों और जरूरत मंदो की मदद करने की प्रेरणा देता है। जकात देने से ‌ सामाजिक एकता और भाईचारे को बढावा मिलता है। यह महीना ‌ धैर्य ,अनुशासन और बुरी आदतों को छोड़ने के ‌ अभ्यास का बेहतरीन समय देता है। इस महीने में शबे -ए- कद्र ‌ एक रात बेहद ख़ास ‌ आती है। जो इबादत के लिए बहुत पवित्र रात मानी जाती है ।यह महीना रहमतों और बरकतों का महीना है। रमजान में रोजा रखना हर मुसलमान पर फर्ज है।

रोजेदारों के लिए बाब-ए-रेयान नाम से एक खास दरवाजा बनाया गया है‌। जिससे रोजेदार सीधे ही जन्नत में दाखिल हो सकेंगे। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी रोजे की महत्वा साबित हो चुकी है। रोजा रखने से शारीरिक फिटनेस ‌ बल्कि मानसिक ‌ संतुलन भी बना रहता है। अब तो ‌ शारीरिक शुद्धता के साथ -साथ यहां तक की कैंसर ‌‌ तक की बीमारी से भी रोजे के माध्यम से बचाव की बात सामने आ रही है। माहे रमजान में कुरान शरीफ की नियमित रूप से तिलावत करनी चाहिए। अब तो कुरान शरीफ इतनी सरल भाषाओं में उपलब्ध है। इस्लामिक ‌ जरीए से कुरान शरीफ का तर्जुमा हर जुबान में आसानी से मिल जाता है ।यह किताब पूरी इंसानियत को हकीकी रास्ता दिखलाती है।

इस प्रकार हम निस्‌कर्ष रूप से कह सकते हैं। कि रमजान पवित्र और बरकतों का महीना है । जो आत्म चिंतन, सहन्‌शीलता, ‌ आत्म शुद्धि और ‌ अल्लाह के प्रति पूर्ण रूप से समर्पण का महीना है। जो इन्सान को एक बेहतर इन्सान बनने के लिए प्रेरित करता है।

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