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बीकानेर में कार्यवाहक संस्था प्रधान से मारपीट के विरोध में काली पट्टी बांधकर जताया रोष


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झुंझुनूंटॉप न्यूज़राजस्थानराज्य

बीकानेर में कार्यवाहक संस्था प्रधान से मारपीट के विरोध में काली पट्टी बांधकर जताया रोष

शिक्षक सुरक्षित नहीं तो शिक्षा सुरक्षित नहीं - संजू नेहरा

झुंझुनूं : राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय टोंक छिलरी के कार्मिकों एवं अभिभावकों ने बीकानेर में कार्यरत कार्यवाहक संस्था प्रधान किशनाराम कयाल के साथ हुई मारपीट की घटना पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया। गुरूवार को कार्यालय समय में सभी शिक्षकों व कर्मचारियों ने काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन किया तथा घटना की घोर निंदा की। संस्था प्रधान संजू नेहरा ने कहा कि भारतीय संस्कृति में शिक्षक का स्थान भगवान के समान माना गया है।

इस प्रकार की घटनाएं शिक्षक समुदाय की गरिमा को ठेस पहुंचाती हैं। उन्होंने दोषियों के विरुद्ध कठोर एवं ठोस कार्रवाई की मांग की। ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। विरोध प्रदर्शन के दौरान वाइस प्रिंसिपल मोनिका पालीवाल, व्याख्याता संदीप कुमार, हरिश कुमार, अर्पणा सैनी, वरिष्ठ अध्यापक महावीरप्रसाद सैनी, ताराचंद डूडी, सतीश कुमार पालीवाल, रामलखन सैनी, अध्यापक जीवनराम, रमेशचंद, कनिष्ठ सहायक अभिषेक, पंचायत सहायक सुमन शर्मा, सेवानिवृत्त वरिष्ठ लेखाधिकारी सत्यनारायण सैनी सहित अभिभावक परमेश्वरी देवी उपस्थित रहे।

सोशल मीडिया पर भी अपने अपने तरीके से जताया गुस्सा
इधर, शिक्षकों ने सोशल मीडिया पर भी घटना के विरोध में आक्रोश जताया। मोबाइल स्टेटस, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर स्टोरी साझा करते हुए लिखा गया कि “जो हाथ बच्चों को भविष्य सिखाते हैं, उन्हीं हाथों पर जबरन अन्य विभागों के कार्य एवं दस्तावेज प्रमाणित करने का दबाव और हिंसा अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। यदि शिक्षक सुरक्षित नहीं तो शिक्षा सुरक्षित नहीं।” शिक्षकों ने यह भी स्पष्ट किया कि जाति, मूल एवं आय प्रमाण पत्र बनाना पटवारी और तहसीलदार का कार्य है, न कि सरकारी शिक्षकों का।

कुछ स्थानों पर दो दिनों तक आय एवं जाति प्रमाण पत्रों पर हस्ताक्षर नहीं करने संबंधी संदेश भी सोशल मीडिया पर वायरल हुए। इसके अलावा “सरकारी स्कूल का प्रिंसिपल, लेक्चरर या शिक्षक आपके दस्तावेजों पर साइन करे, यह आपका अधिकार नहीं है, केवल सुविधा है। शिक्षक के स्वाभिमान से समझौता नहीं।” जैसे मैसेज भी सामने आए है। शिक्षक समुदाय ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

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