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एआई के दौर में ‘विरासत’ और ‘विकास’ का संतुलन जरूरी: अर्जुन राम मेघवाल


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एआई के दौर में ‘विरासत’ और ‘विकास’ का संतुलन जरूरी: अर्जुन राम मेघवाल

एआई के दौर में ‘विरासत’ और ‘विकास’ का संतुलन जरूरी: अर्जुन राम मेघवाल

सीकर : डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी “डिजिटल समाज और मानवीय मूल्य: एआई युग में एकात्म मानव दर्शन का पुनरुद्धार” का रविवार को गरिमामय समापन हुआ। समापन सत्र के मुख्य अतिथि केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि एआई के इस युग में ‘विरासत’ और ‘विकास’ का संतुलन अनिवार्य है। तकनीकी प्रगति का उद्देश्य मानव कल्याण होना चाहिए और डिजिटल क्रांति पूर्णतः मानव-केंद्रित होनी चाहिए।

दीप प्रज्वलन एवं सरस्वती वंदना से कार्यक्रम की शुरुआत हुई, जिसमें 800 से अधिक शोधकर्ताओं और शिक्षाविदों ने भाग लिया। मंत्री मेघवाल ने हालिया वैश्विक एआई शिखर सम्मेलन का उल्लेख करते हुए कहा कि 86 देशों द्वारा समावेशी तकनीक पर सहमति भारत की अग्रणी भूमिका को दर्शाती है। उन्होंने ‘विकसित भारत’ के संकल्प को सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ते हुए कहा कि भारत की सभ्यतागत विरासत आधुनिक तकनीक को नैतिक दिशा देने में सक्षम है।

कार्यक्रम में शिक्षाविदों ने भी अपने विचार रखे। आर.के. मित्तल ने तकनीक को बहती नदी बताते हुए कहा कि एआई को सही दिशा देना हमारी जिम्मेदारी है। शांतिश्री धूलिपुडी पंडित ने शिक्षक की भूमिका को ‘सुविधा प्रदाता’ बताते हुए नैतिक विवेक की आवश्यकता पर बल दिया। अध्यक्षीय उद्बोधन में नारायणलाल गुप्ता ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानव दर्शन को एआई के संतुलित उपयोग की आधारशिला बताया।

राजस्थान शिक्षक संघ राष्ट्रीय के सभाध्यक्ष संपत सिंह ने बताया कि संगोष्ठी का आयोजन अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ द्वारा किया गया। दो दिनों में 250 से अधिक शोध-पत्र प्रस्तुत किए गए। ‘राष्ट्रीय सुरक्षा- एआई-प्रेरित युग’ विषयक प्लेनरी सत्र सहित विभिन्न चर्चाओं के बाद ‘वंदे मातरम्’ के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

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