नीमकाथाना विधायक ने विधानसभा में उठाए भूमि संबंधी मुद्दे:किसानों के खातेदारी हक, राजस्व सुधारों पर की पैरवी, भूमिहीन को जमीन आवंटन की मांग
नीमकाथाना विधायक ने विधानसभा में उठाए भूमि संबंधी मुद्दे:किसानों के खातेदारी हक, राजस्व सुधारों पर की पैरवी, भूमिहीन को जमीन आवंटन की मांग
नीमकाथाना : राजस्थान विधानसभा में राजस्व संबंधी मांगों पर चर्चा के दौरान नीमकाथाना विधायक सुरेश मोदी ने भूमि आवंटन, खातेदारी अधिकार और राजस्व व्यवस्था में सुधार से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए।
भूमिहीन गरीब परिवारों को नियमित रूप से भूमि आवंटन प्रक्रिया संचालित करने की मांग
विधायक सुरेश मोदी ने राजस्थान भू राजस्व (कृषि हेतु भूमि आवंटन) नियम, 1970 के तहत भूमिहीन गरीब परिवारों को नियमित रूप से भूमि आवंटन प्रक्रिया संचालित करने की मांग की। उन्होंने बताया कि नियम 13 व 20 के अनुसार उपखंड स्तर पर आवंटन सलाहकार समिति की वार्षिक बैठक अनिवार्य है। हालांकि, वर्तमान में न तो इसकी उद्घोषणाएं हो रही हैं और न ही बैठकें आयोजित की जा रही हैं, जिससे पात्र लाभार्थी अपने अधिकार से वंचित हैं।
उन्होंने वर्षों से राजकीय भूमि पर खेती कर रहे किसानों को खातेदारी अधिकार प्रदान करने की पैरवी की। इसके अतिरिक्त, नीमकाथाना क्षेत्र में ‘गैर मुमकिन पहाड़’ के रूप में दर्ज भूमि के वास्तविक स्वरूप के अनुसार संशोधन कर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की मांग भी रखी।
विधायक ने कई राज्यों का उदाहरण दिया
किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए, विधायक मोदी ने हरियाणा सहित अन्य राज्यों का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार इन राज्यों में किसानों को मालिकाना हक दिया गया है, उसी तर्ज पर राजस्थान में भी सकारात्मक निर्णय लिया जाना चाहिए। राजस्व विभाग में पारदर्शिता लाने के लिए उन्होंने रजिस्ट्री प्रक्रिया में डिजिटल ऐप लागू करने, नामांतरण (म्यूटेशन) की स्वतः प्रविष्टि सुनिश्चित करने तथा खसरा नंबरों में हेरफेर करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
इसके अतिरिक्त, उन्होंने सामूहिक खातों के विभाजन के मामलों का समयबद्ध निस्तारण, चरागाह भूमि पर वर्षों से बसे परिवारों का नियमन और ग्रामदानी गांवों के किसानों को खातेदारी अधिकार देने की आवश्यकता पर भी बल दिया। अंत में, विधायक सुरेश मोदी ने राजस्व मंत्री से आग्रह किया कि किसानों, भूमिहीनों और ग्रामीण परिवारों के हित में इन सभी मुद्दों पर ठोस एवं प्रभावी कदम उठाए जाएं। उनका उद्देश्य राजस्व व्यवस्था को पारदर्शी, न्यायसंगत और जनहितकारी बनाना है।
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