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नवलगढ़ में तिलका मांझी की 277वीं जयंती मनाई गई


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नवलगढ़ में तिलका मांझी की 277वीं जयंती मनाई गई

नवलगढ़ में तिलका मांझी की 277वीं जयंती मनाई गई

जनमानस शेखावाटी संवाददाता :  रविन्द्र पारीक

नवलगढ़ : स्वतंत्रता सेनानी एवं राष्ट्र नायक तिलका मांझी की 277वीं जयंती डॉ. भीमराव अंबेडकर चैरिटेबल ट्रस्ट नवलगढ़ के तत्वावधान में देवीपुरा बणी स्थित रामलाल बावरिया के निवास पर हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रामलाल बावरिया तथा अध्यक्ष रामनाथ सिंह सुरेला थे। मुख्य वक्ता केशर देव धानिया ने तिलका मांझी के कृतित्व एवं व्यक्तित्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए बताया कि वर्ष 1771 में 21 वर्ष की आयु में भागलपुर में उन्होंने अपने साथियों के साथ अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष छेड़कर स्वतंत्रता की चिंगारी को प्रज्वलित किया।

भागलपुर विश्वविद्यालय का नाम उनके सम्मान में तिलका मांझी विश्वविद्यालय रखा गया है। उन्होंने संथाल विद्रोह के नायक तिलका मांझी उर्फ जबरा पहाड़िया के साहस का उल्लेख करते हुए बताया कि 1784 में उन्होंने अंग्रेज अफसर क्लीवलैंड को मार गिराया था। इसके बाद अंग्रेज उनके पीछे पड़ गए और 35 वर्ष की आयु में उन्हें भागलपुर में फांसी दे दी गई। उन्होंने मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना बलिदान दिया।

अध्यक्ष रामनाथ सिंह सुरेला ने स्वतंत्रता आंदोलन के गुमनाम नायकों को याद करते हुए कहा कि हमें उनके बलिदान को सदैव स्मरण रखना चाहिए और देश की एकता-अखंडता के लिए संविधान का पालन करना चाहिए। कार्यक्रम का संचालन चौथमल सोंकरिया ने किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि हमें जाति-धर्म से ऊपर उठकर देश के महापुरुषों को याद करना चाहिए।

इस अवसर पर बनवारी लाल महरिया, नवरंग लाल महरिया, भंवरी देवी, नानची देवी, नारायणी देवी, पूजा देवी, सोनू कुमारी, मोहित कुमार, पंकज कुमार, राजेश कुमार, राकेश कुमार सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।

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