खरखड़ा में कुम्भाराम लिफ्ट परियोजना की पाइपलाइन लीकेज, लाखों लीटर पानी व्यर्थ बहा ,जल संकट के बीच बड़ी लापरवाही उजागर
खरखड़ा में कुम्भाराम लिफ्ट परियोजना की पाइपलाइन लीकेज, लाखों लीटर पानी व्यर्थ बहा ,जल संकट के बीच बड़ी लापरवाही उजागर
जनमानस शेखावाटी संवाददाता : विजेन्द्र शर्मा
खेतड़ी : खेतड़ी उपखंड क्षेत्र के खरखड़ा गांव में शीलाटी माता मंदिर के पास कुम्भाराम नहर लिफ्ट परियोजना की मुख्य पाइपलाइन में हुए बड़े लीकेज ने जलापूर्ति व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर कर दिया है। पाइपलाइन फटने से लाखों लीटर पीने का पानी व्यर्थ बह गया। रिसाव इतना भीषण था कि करीब 15 फीट ऊंची पानी की फव्वारे उठती रहीं और लगभग 500 मीटर तक नालों व रास्तों में पानी फैल गया। कई घंटों तक पानी बहता रहा, जिससे स्पष्ट है कि स्थिति को नियंत्रित करने में विभाग पूरी तरह विफल रहा।
ग्रामीणों के अनुसार पाइपलाइन पिछले चार-पांच दिनों से लीकेज थी और इसकी सूचना संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों को दी जा चुकी थी। इसके बावजूद न तो तत्काल आपूर्ति रोकी गई और न ही समय पर स्थायी मरम्मत करवाई गई। लगातार लाखों लीटर पानी का बहना यह दर्शाता है कि निगरानी तंत्र निष्क्रिय है या शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा। जल संकट से जूझ रहे क्षेत्र में इस तरह की अनदेखी प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाती है।

कुम्भाराम लिफ्ट परियोजना के अंतर्गत खेतड़ी विधानसभा क्षेत्र को मांग के अनुसार कुल 28.70 एमएलडी नहरी पानी मिलना निर्धारित है, लेकिन वर्तमान में प्रतिदिन लगभग 10 एमएलडी की कटौती की जा रही है। परिणामस्वरूप क्षेत्र को केवल 17 से 18 एमएलडी पानी ही उपलब्ध हो पा रहा है। जब पहले से ही कम आपूर्ति हो रही है, तब उपलब्ध पानी का भी इस प्रकार व्यर्थ बह जाना विभागीय जिम्मेदारी पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।
पानी की कमी को लेकर कई गांवों में ग्रामीण विरोध प्रदर्शन कर चुके हैं। ज्ञापन देने और बार-बार शिकायतों के बावजूद पाइपलाइन कई दिनों तक लीकेज रहना केवल तकनीकी समस्या नहीं बल्कि कार्यशैली की गंभीर कमजोरी को दर्शाता है। विधायक ईजी. धर्मपाल गुर्जर ने भी विधानसभा में निर्धारित 28.70 एमएलडी पानी पूर्ण रूप से उपलब्ध कराने की मांग उठाई थी, लेकिन जमीनी स्तर पर सुधार नजर नहीं आ रहा।
ग्रामीणों ने मांग की है कि लीकेज की तत्काल स्थायी मरम्मत करवाई जाए, जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय हो और नियमित निरीक्षण की सख्त व्यवस्था लागू की जाए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की लापरवाही दोबारा न हो।
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