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फ्लिपकार्ट इंस्टाकार्ट पर उपभोक्ता आयोग ने लगाया 13,800 का जुर्माना:कम दाम पर ऑर्डर लेकर महंगे दाम पर बेचते, डार्क पैटर्न बताया


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झुंझुनूंटॉप न्यूज़राजस्थानराज्य

फ्लिपकार्ट इंस्टाकार्ट पर उपभोक्ता आयोग ने लगाया 13,800 का जुर्माना:कम दाम पर ऑर्डर लेकर महंगे दाम पर बेचते, डार्क पैटर्न बताया

फ्लिपकार्ट इंस्टाकार्ट पर उपभोक्ता आयोग ने लगाया 13,800 का जुर्माना:कम दाम पर ऑर्डर लेकर महंगे दाम पर बेचते, डार्क पैटर्न बताया

झुंझुनूं : झुंझुनूं में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने ई कॉमर्स कंपनियों की कार्यप्रणाली पर सख्त रुख अपनाया है। फ्लिपकार्ट और उसकी सहयोगी कंपनी इंस्टाकार्ट सर्विसेज द्वारा कम दाम का ऑर्डर स्वीकार कर बाद में बिना सहमति रद्द करने और महंगे दाम पर बेचने के मामले में आयोग ने इसे डार्क पैटर्न मानते हुए 13800 रुपए का जुर्माना लगाया है। यह मामला आनंदपुरा निवासी उपभोक्ता की शिकायत पर सामने आया।

902 रुपए में ट्रिमर बुक, भुगतान के बाद ऑर्डर रद्द

आनंदपुरा निवासी लोकेश सिंह ने फ्लिपकार्ट प्लेटफॉर्म से 902 रुपए में एक ट्रिमर बुक किया था। कंपनी ने ऑर्डर स्वीकार किया और पूरी भुगतान राशि भी ले ली। इसके कुछ समय बाद फ्लिपकार्ट ने बिना ग्राहक की सहमति या पूर्व सूचना के ऑर्डर को रद्द कर दिया।

वही ट्रिमर 2097 रुपए में दोबारा बिक्री पर दिखा

ऑर्डर रद्द होने के बाद लोकेश सिंह ने देखा कि वही ट्रिमर फ्लिपकार्ट प्लेटफॉर्म पर 2097 रुपए में बिक्री के लिए उपलब्ध है। जब उन्होंने पुराने दाम पर सामान देने की मांग की तो कंपनी ने इससे इनकार कर दिया।

आयोग ने कार्यप्रणाली को डार्क पैटर्न माना

मामले की सुनवाई के दौरान आयोग के अध्यक्ष मनोज कुमार मील और सदस्य प्रमेंद्र कुमार सैनी की पीठ ने कहा कि कम दाम पर ऑर्डर लेकर उसे रद्द करना और फिर अधिक कीमत पर बेचना केवल सेवा में कमी नहीं, बल्कि उपभोक्ताओं के साथ किया गया धोखा है। आयोग ने इस प्रक्रिया को डार्क पैटर्न की श्रेणी में रखा और इसे डिजिटल इंडिया के तहत ई कॉमर्स में पारदर्शिता और भरोसे के खिलाफ बताया।

मार्केटप्लेस और पिनकोड के तर्क खारिज

सुनवाई के दौरान फ्लिपकार्ट ने खुद को केवल एक मार्केटप्लेस बताते हुए जिम्मेदारी सेलर पर डालने की कोशिश की। कंपनी ने पिनकोड की समस्या का हवाला भी दिया, लेकिन आयोग ने पाया कि ग्राहक को पिनकोड समस्या नहीं बल्कि डिलीवरी में देरी का संदेश दिया गया था। आयोग ने इस विरोधाभास को कंपनी की गलत मंशा से जोड़ते हुए सभी तर्क खारिज कर दिए।

मानसिक पीड़ा और खर्च के लिए मुआवजा तय

हालांकि ऑर्डर की राशि उपभोक्ता को वापस कर दी गई थी, लेकिन आयोग ने मानसिक संताप और असुविधा के लिए 10500 रुपए तथा न्यायिक व्यय के रूप में 3300 रुपए देने के आदेश दिए। इस तरह फ्लिपकार्ट और इंस्टाकार्ट सर्विसेज पर कुल 13800 रुपए का जुर्माना लगाया गया।

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