सनातन की अनदेखी पर उबाल: विप्र कल्याण बोर्ड का पुनर्गठन नहीं हुआ तो होगा आंदोलन – महेश बसावतिया
अन्य समाजों को बोर्ड, विप्र समाज की उपेक्षा; सरकार पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप
जनमानस शेखावाटी संवाददाता : चंद्रकान्त बंका
झुंझुनूं : राज्य सरकार द्वारा विप्र कल्याण बोर्ड के पुनर्गठन में हो रही लगातार देरी को लेकर सियासी माहौल गरमा गया है। विप्र सेना के प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष महेश बसावतिया ने सरकार पर सनातन संस्कृति एवं ब्राह्मण समाज की उपेक्षा का गंभीर आरोप लगाते हुए स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही विप्र कल्याण बोर्ड का पुनर्गठन नहीं किया गया, तो विप्र समाज को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा।
बसावतिया ने कहा कि ब्राह्मण समाज सनातन धर्म की रीढ़ है। वेद, पुराण, संस्कार, आयुर्वेद, ज्योतिष और वास्तु शास्त्र जैसी भारतीय ज्ञान परंपराओं को जीवित रखने वाला यह समाज आज स्वयं हाशिये पर खड़ा है, जो सरकार की नीतियों पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि एक ओर सरकार अन्य समाजों के कल्याण बोर्डों को सक्रिय कर रही है, वहीं दूसरी ओर विप्र समाज के बोर्ड को ठंडे बस्ते में डालकर भेदभावपूर्ण रवैया अपनाया जा रहा है।
पूर्व कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए महेश बसावतिया ने कहा कि अशोक गहलोत सरकार ने विप्र समाज की भावनाओं से खिलवाड़ किया। विप्र कल्याण बोर्ड को केवल नाम मात्र की संस्था बनाकर छोड़ दिया गया-न तो उसे अधिकार दिए गए, न पर्याप्त बजट मिला और न ही समाज हित की कोई ठोस योजनाएं धरातल पर उतारी गईं।
उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से मांग की कि भाजपा सरकार को सत्ता में मिले जनादेश का सम्मान करते हुए विप्र कल्याण बोर्ड का तत्काल पुनर्गठन किया जाए तथा इसकी जिम्मेदारी किसी ऐसे निष्ठावान, अनुभवी और सनातन विचारधारा से जुड़े विप्र नेतृत्व को सौंपी जाए, जो समाज के अधिकारों की मजबूती से पैरवी कर सके।
महेश बसावतिया ने दो टूक शब्दों में कहा कि विप्र समाज अब केवल आश्वासनों से संतुष्ट नहीं होगा। यदि सरकार ने शीघ्र ठोस निर्णय नहीं लिया, तो प्रदेशभर में जनआंदोलन खड़ा किया जाएगा, जिसकी नैतिक और राजनीतिक जिम्मेदारी सरकार की होगी।
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