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“टाइम टेबल ‘आदर्श’ नहीं, ‘व्यावहारिक’ बनाएं, उसके मुताबिक पढ़ें और बोर्ड परीक्षाओं में सफलता पाएं”


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आर्टिकल

“टाइम टेबल ‘आदर्श’ नहीं, ‘व्यावहारिक’ बनाएं, उसके मुताबिक पढ़ें और बोर्ड परीक्षाओं में सफलता पाएं”

"टाइम टेबल 'आदर्श' नहीं, 'व्यावहारिक' बनाएं, उसके मुताबिक पढ़ें और बोर्ड परीक्षाओं में सफलता पाएं"

“वक्त का तकाजा है तूफान से जूझो
कब तक चलोगे किनारे किनारे।”

बोर्ड परीक्षाओं में सफलता प्राप्ति के लिए लिए गहन अध्ययन के गंभीरता भी जरूरी है। बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी में जुटे छात्र छात्राओं को ‘कम्फर्ट जोन’ से बाहर निकलने और तैयारी की चुनौतियों का डटकर सामना करने की प्रेरणा देना जरूरी होता है। एक सही रणनीति, सकारात्मक सोच और यथार्थवादी योजना के साथ बोर्ड परीक्षाओं में सफलता के नए आयाम भी छुए जा सकते हैं। तैयारी के लिए टाइम टेबल केवल पढ़ाई के घंटों का हिसाब नहीं है, बल्कि यह आपकी ऊर्जा और फोकस को सही दिशा में लगाने का तरीका है।

यहाँ कुछ व्यावहारिक टिप्स दिए गए हैं कि बच्चे टाइम टेबल के मुताबिक तैयारी कैसे कर सकते हैं:

1. यथार्थवादी (Realistic) टाइम टेबल बनाएं
अक्सर छात्र जोश में आकर 14-15 घंटे का टाइम टेबल बना लेते हैं, जिसे दो दिन बाद छोड़ना पड़ता है।
अपनी क्षमता पहचानें: शुरुआत 6-8 घंटे की फोकस्ड पढ़ाई से करें। धीरे-धीरे समय बढ़ाएं।
विषयों का संतुलन: कठिन विषयों (जैसे गणित या फिजिक्स) के लिए वह समय चुनें जब आपका दिमाग सबसे ताज़ा हो (अक्सर सुबह)। आसान विषयों को दोपहर या शाम के लिए रखें।

2. 50/10 का नियम अपनाएं (पोमोडोरो तकनीक)
लगातार घंटों तक रट्टा मारने से दिमाग थक जाता है।
50 मिनट पढ़ाई: पूरी एकाग्रता के साथ पढ़ें।
10 मिनट ब्रेक: इस दौरान टहलें, पानी पिएं या स्ट्रेचिंग करें। फोन या सोशल मीडिया से दूर रहें।
3. सिलेबस को छोटे लक्ष्यों में तोड़ें
पूरे सिलेबस को देखकर डरने के बजाय, उसे छोटे टुकड़ों में बांट लें।
दैनिक लक्ष्य: “आज मुझे विज्ञान के 2 चैप्टर और गणित के 10 सवाल हल करने हैं।”
साप्ताहिक लक्ष्य: “इस हफ्ते तक इतिहास की पूरी यूनिट खत्म करनी है।”

4. रिवीजन (दोहराव) के लिए समय तय करें
नया पढ़ने के साथ-साथ पुराना याद रखना भी जरूरी है। हर दिन सोने से पहले 30 मिनट पूरे दिन पढ़े हुए को रिवाइज करने में लगाएं।
सप्ताह में एक दिन (जैसे रविवार) केवल रिवीजन और मॉक टेस्ट (पुराने पेपर्स) के लिए रखें।

5. नमूना टाइम टेबल (उदाहरण के लिए)
यह एक सामान्य ढांचा है, इसे अपनी स्कूल की छुट्टियों या सेल्फ-स्टडी के हिसाब से बदलें:
सुबह (Morning): सबसे कठिन विषय। (दिमाग ताज़ा रहता है)
दोपहर (Afternoon): स्कूल का काम या थोड़ा आसान विषय। (दोपहर में नींद आ सकती है, तो लिख कर प्रैक्टिस करें)
शाम (Evening): मध्यम कठिनाई वाला विषय और पिछले सालों के प्रश्न पत्र हल करना।
रात (Night): दिन भर का क्विक रिवीजन।

परीक्षाओं के नजदीक आते ही मानव मस्तिष्क की एड्रेनालाईन की वजह से चीजों को ग्रहण करने (Grasping Power) और याद रखने की क्षमता स्वाभाविक रूप से बढ़ जाती है। अतीत का रोना रोने के बजाय वर्तमान के समय का सदुपयोग करें। आत्मविश्वास ही सफलता की कुंजी है। खुद पर और अपनी तैयारी पर भरोसा रखें।

अपनी लय पहचानें: हर छात्र का ‘बॉडी क्लॉक’ अलग होता है। कोई सुबह 4 बजे उठकर बेहतर पढ़ सकता है, तो कोई रात की शांति में। आप बेहतर जानते हैं कि कब क्या और कैसे पढ़ना है। किसी और की नक़ल न करें।

सिलेबस को कैसे वश में करें?
पूरा सिलेबस एक साथ देखने पर पहाड़ जैसा लगता है। इसे मैनेज करने का तरीका है—’विभाजन और विजय’ (Divide and Rule)।
प्राथमिकता तय करें: सबसे पहले पूरा सिलेबस देखें। यह तय करें कि कौन से चैप्टर ज्यादा नंबर के हैं (High Weightage) और कौन से आसान।
छोटे लक्ष्य: सिलेबस को छोटे-छोटे टुकड़ों में बांट लें। जैसे— “आज मुझे सिर्फ प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) टॉपिक खत्म करना है,” न कि “आज पूरी बायोलॉजी खत्म करनी है।”
डेटा का संकलन: तारीखें, फॉर्मूले और महत्वपूर्ण परिभाषाओं को एक अलग नोटबुक में लिख लें। परीक्षा के दिन सुबह पूरी किताब पलटने के बजाय केवल इस पतली नोटबुक को देखना काफी होगा।

6. पढ़ाई की तकनीक: रट्टा नहीं, समझ और अभ्यास
सिर्फ किताब लेकर बैठने को पढ़ाई नहीं कहते।
लिख-लिख कर याद करना: पढ़ने के बाद किताब बंद करें और जो याद किया है उसे लिखने की कोशिश करें। यह वैज्ञानिक रूप से सिद्ध है कि लिखने से ‘मसल मेमोरी’ बनती है और चीजें लंबे समय तक याद रहती हैं।
रिवीजन (दोहराव) है असली चाबी: “बिना रिवीजन/दोहराए किए हुए कुछ नहीं।” हमारा दिमाग नई जानकारी को जल्दी भूलता है। इसलिए, सिलेबस पूरा करने के बाद रिवीजन का समय जरूर बचाएं।
समझ और मनन: रट्टा मारने के बजाय कॉन्सेप्ट को समझें। पढ़ने के बाद एकांत में बैठकर मनन (Visualise) करें कि आपने क्या पढ़ा। मुश्किल पाठ को याद करने के लिए निमोनिक्स (Mnemonics), फ्लो-चार्ट और चित्रों की मदद लें।

7. तनाव प्रबंधन: सेहत और हॉबी
बोर्ड परीक्षा का मतलब यह नहीं है कि आप मशीन बन जाएं।
नींद: उठने और सोने का समय आपका अलग हो सकता है, परंतु नींद पूरी करना (कम से कम 7 घंटे) बेहद जरूरी है। थका हुआ दिमाग जानकारी को प्रोसेस नहीं कर पाता।
हॉबी के लिए समय: तैयारी के बीच में थोड़ा ब्रेक लें और अपनी हॉबी को एन्जॉय करें—जैसे संगीत सुनना, वाद्य यंत्र बजाना, या पेंटिंग। यह समय की बर्बादी नहीं, बल्कि दिमाग का ‘रिचार्ज’ है।
योग और व्यायाम: मानसिक दबाव को दूर करने के लिए योग, प्राणायाम और हल्की एक्सरसाइज का लाभ लें। यह शरीर में ऑक्सीजन का प्रवाह बढ़ाता है।
काउंसलिंग: अगर घबराहट बहुत ज्यादा हो रही हो, तो हिचकिचाएं नहीं। माता-पिता, शिक्षक या काउंसलर से बात करें।

8. परीक्षा हॉल की रणनीति: ‘टूरिज्म’ या ‘टेररिज्म’?
तैयारी कितनी भी अच्छी हो, परीक्षा के 3 घंटे ही आपका परिणाम तय करते हैं।
प्रश्न पत्र पढ़ना: प्रश्न पत्र के दिशा-निर्देश ध्यान से पढ़ें। कई बार जल्दबाजी में छात्र ‘टूरिज्म’ (Tourism) को ‘टेररिज्म’ (Terrorism) पढ़ लेते हैं और पूरा उत्तर गलत लिख देते हैं। ऐसी गलतियों से बचें।
समय प्रबंधन: जितना पूछा हो, उतना ही जवाब लिखें। 2 नंबर के प्रश्न में 2 पेज भरने से ज्यादा नंबर नहीं मिलेंगे, बल्कि दूसरे प्रश्नों के लिए समय कम पड़ जाएगा। पेपर का समय जितना होता है, उसके हिसाब से ही घर पर मॉक टेस्ट देकर तैयारी करें।
कठिन पेपर का सामना: अगर पेपर हार्ड लगे, तो उसे दो चरणों में हल करें। पहले चरण में वे प्रश्न करें जो आपको अच्छे से आते हैं। इससे आत्मविश्वास बढ़ेगा। दूसरे चरण में कठिन प्रश्नों पर दिमाग लगाएं।
खुद की सामग्री: परीक्षा में लिखने के काम आने वाली सामग्री जैसे पैन, पेंसिल, रबर, स्केल खुद लेकर जाएं। दोस्तों के भरोसे न रहें कि “वहाँ मांग लूंगा।” अतिरिक्त पैन हमेशा साथ रखें।
चित्र और प्रेजेंटेशन: प्रश्न के जवाब में जरूरत के अनुसार चित्र/डायग्राम और बिंदुओं (Points) का समावेश हो तो नंबर बढ़ जाते हैं। परीक्षक को कॉपी चेक करने में जितनी आसानी होगी, नंबर उतने अच्छे मिलेंगे।

9. पिछले वर्षों के प्रश्न पत्र (Previous Year Papers)
पिछले वर्षों के पेपर्स लाकर उनको हल जरूर कर लें। इससे आपको यह आइडिया मिलता है कि परीक्षक प्रश्न कैसे घुमाकर पूछता है। अक्सर बोर्ड परीक्षाओं में प्रश्न रिपीट होते हैं या उसी कॉन्सेप्ट पर आधारित होते हैं।

10. अभिभावकों की भूमिका: तुलना से बचें
यह हिस्सा अभिभावकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण है।
तुलना जहर है: Every child is special. अपने बच्चे की तुलना पड़ोसी या रिश्तेदार के बच्चों से न करें। इससे उनमें हीन भावना और अनावश्यक दबाव आता है।
सकारात्मक माहौल: बोर्ड परीक्षाओं का हौवा न बनाएं। बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ाते रहें।
आहार: परीक्षा के दिनों में पौष्टिक आहार दें। एग्जाम से ठीक पहले ज्यादा भारी खाना न दें, जिससे नींद आए।

11. सोशल मीडिया से दूरी
परीक्षाओं के दौरान सोशल मीडिया (Instagram, Facebook, etc.) सबसे बड़ा दुश्मन है। यह न केवल समय बर्बाद करता है बल्कि दूसरों की “झूठी प्रगति” दिखाकर आपको तनाव भी देता है। इन दिनों में इससे पूरी तरह दूरी बना लें।

12 विषयवार कुछ खास बातें ध्यान रखें और परीक्षाओं में अंतराल का सदुपयोग करें:-
‘गैप स्ट्रैटेजी’ (Gap Strategy) :-
गैप के सदुपयोग की रणनीति का मूल मंत्र है- “समय का सम्मान और सही विभाजन।”
कम गैप = सिर्फ रिवीजन (No New Topics).
ज्यादा गैप = डीप स्टडी + मॉक पेपर्स।
यहाँ विषयों की प्रकृति (Nature of Subject) के अनुसार एक विस्तृत योजना दी गई है।
चूंकि हर विषय की मांग अलग होती है (जैसे गणित में अभ्यास चाहिए और इतिहास में याददाश्त), इसलिए हम आपकी स्ट्रैटेजी को विषयवार (Subject-wise) इस प्रकार लागू कर सकते हैं:

– आस्था चौधरी (प्राध्यापक, राउमावि, बाघौली, उदयपुरवाटी) Founder आस्था फाउंडेशन

A. गणित (Mathematics) – “बैलेंस्ड मोड” (3-5 दिन का गैप मानकर)
गणित को पढ़ने से ज्यादा ‘करने’ की जरूरत होती है।
Day 1 (कठिन चैप्टर्स): कैलकुलस, ट्रिगोनोमेट्री या वो चैप्टर्स जिनमें आप अटकते हैं। केवल भारी वेटेज वाले सवाल करें।
Day 2 (मध्यम): उन चैप्टर्स को देखें जो आसान हैं लेकिन गलतियां होती हैं (जैसे Statistics/Probability)।
Day 3 (रिवीजन): पूरी फॉर्मूला शीट को लिखकर याद करें।
Day 4 (मॉक टेस्ट): ‘बायोलॉजिकल क्लॉक’ नियम का पालन करें। जिस समय एग्जाम है, ठीक उसी समय बैठकर पूरा पेपर हल करें।
प्रो-टिप: गणित में गैप के दौरान प्रश्नों को ‘पढ़ें’ नहीं, बल्कि ‘हल’ करें। हाथ चलने से ही दिमाग चलेगा।

B. विज्ञान (Physics/Chemistry/Biology) – “मास्टर/बैलेंस्ड मोड”
विज्ञान में डायग्राम्स, न्यूमेरिकल्स और थ्योरी का मिश्रण होता है।
Physics: गैप के पहले दिन ही सभी फॉर्मूले और डेरिवेशन (Derivations) रिवाइज कर लें। न्यूमेरिकल्स के लिए नए प्रश्न न उठाएं, केवल PYQs (पिछले साल के प्रश्न) करें।
Chemistry:
Organic: नेम रिएक्शन्स (Name Reactions) को लिखकर देखें।
Physical: फॉर्मूले देखें।
Biology: डायग्राम्स की प्रैक्टिस ‘रैपिड रिवीजन मोड’ में करें। NCERT के डायग्राम्स को देखें और लेबलिंग (Labeling) की प्रैक्टिस करें।
प्रो-टिप: अगर गैप लंबा है (6+ दिन), तो ‘गोल्डन टाइम’ (शुरुआती 2 दिन) का उपयोग उस विषय के डीप कॉन्सेप्ट्स पढ़ने में करें जो आपको सबसे ज्यादा डराता है।

C. सामाजिक विज्ञान (Social Science) – “स्टोरी टेलिंग मोड”
यह विषय बहुत विस्तृत (Vast) होता है, इसलिए यहाँ आपकी ‘टुकड़ों में बांटने’ (50-30-20) वाली रणनीति सबसे सटीक बैठेगी।
इतिहास (History): रट्टा मारने के बजाय घटनाओं को एक कहानी (Timeline) की तरह पढ़ें।
भूगोल (Geography): मैप वर्क (Map Work) के लिए हर दिन 30 मिनट निकालें। यह मुफ्त के नंबर होते हैं।
राजनीति/अर्थशास्त्र: केवल बुलेट पॉइंट्स और हेडिंग्स याद करें।
प्रो-टिप: उत्तर लिखने की प्रैक्टिस करें। सामाजिक विज्ञान में ‘क्या लिखना है’ से ज्यादा ‘कैसे प्रेजेंट करना है’, यह महत्वपूर्ण है।

D. भाषा (Hindi/English) – “रैपिड रिवीजन मोड” (1-2 दिन का गैप)
इन विषयों में गैप अक्सर कम मिलता है।
फॉर्मेट (Formats): सबसे पहले पत्र, नोटिस, और निबंध के फॉर्मेट पक्के करें। इसमें पूरे नंबर मिलते हैं।
साहित्य (Literature): पूरी कहानियां दोबारा न पढ़ें। केवल ‘चैप्टर समरी’ (Chapter Summary) और ‘कवि परिचय’ पढ़ें।
व्याकरण (Grammar): नियम (Rules) देखें और 5-10 उदाहरण हल करें।
प्रो-टिप: स्पेलिंग की गलतियों से बचने के लिए कठिन शब्दों को एक बार लिखकर देख लें।

E. विशेष स्थिति: अगर गैप बहुत लंबा हो (6+ दिन) तो छात्र छात्रा सुस्त हो जाते हैं।
सब्जेक्ट रोटेशन (Subject Rotation): अगर फिजिक्स के लिए 8 दिन मिले हैं, तो बोरियत से बचने के लिए बीच में 1-2 दिन ‘फिजिकल एजुकेशन’ या ‘इंग्लिश’ के 1-2 चैप्टर पढ़ लें। इससे मुख्य विषय (Physics) पर वापस लौटने पर दिमाग तरोताजा महसूस करेगा।

अंग्रेजी : ग्रामर और वोकेबुलरी का ध्यान रखने के साथ प्रश्न के फॉर्मेट और वर्ड लिमिट का ध्यान रखे, उत्तर में की-वर्ड्स का समावेश करें। स्पेलिंग मिस्टेक और ओवर राइटिंग से बचें।
हिंदी : वर्तनी की शुद्धता का ध्यान रखें, मात्राओं और व्याकरण की गलती से बचें। काटा-पीटी नहीं करें सुलेख का ध्यान देवें। परिभाषाओं के साथ दो उदाहरण भी याद करें। लिखकर अभ्यास करें।
गणित : गणित में रटने की नहीं, समझने और बार बार अभ्यास करने की जरूरत होती है। उत्तर में पूरी प्रोसेस लिखे, स्टेप्स कम न करें। यदि उत्तर पता है फिर भी फार्मूला लिखे, मान रखें फिर गणना करें और यूनिट जरूर लिखें। ज्यामिती में माप अनुसार साफ चित्र बनाएं।
विज्ञान : परीक्षक कॉपी में तर्क, स्पष्टीकरण और सटीक शब्दावली ढूंढता हैं। अवधारणाओं में तकनीकी शब्दावली प्रयोग में लें, नामांकित चित्र बनाएं।
भूगोल : भूगोल में अवधारणाओं और चित्रात्मक प्रस्तुति पर गौर करें। मानचित्र अच्छे से तैयार करें। वास्तविक दुनिया के उदाहरण लिखें। तकनीकी शब्दावली का प्रयोग और आसपास के सजीव उदाहरण से समझे।
संस्कृत : व्याकरण, अशुद्धियों और अनुवाद का विशेष ध्यान रखें। भावार्थ को समझे। पिछले वर्षों के प्रश्न पत्र हल करें

निष्कर्ष: परिणाम नहीं, प्रयास महत्वपूर्ण है
अंत में, याद रखें कि कोई एक पेपर खराब हो जाए तो उसका असर दूसरे पेपर्स की तैयारी पर न पड़ने दें। नंबरों की दौड़ से ज्यादा अपनी तैयारी और ज्ञान पर फोकस करें।

“तैयारी में पूरी ताकत झोंक दें, अपने भीतर ज्ञान का समंदर भर लेवें। फिर याद रखिए
‘समंदर सूखे तो भी घुटनों से नीचे नहीं जाता’।”

– आस्था चौधरी (प्राध्यापक, राउमावि, बाघौली, उदयपुरवाटी) Founder आस्था फाउंडेशन

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