“सकारात्मक सोच और सही रणनीति: बोर्ड परीक्षाओं की जीत का मंत्र”
"सकारात्मक सोच और सही रणनीति: बोर्ड परीक्षाओं की जीत का मंत्र"
बोर्ड परीक्षाओं का नाम सुनते ही अक्सर छात्र छात्राएं और अभिभावक तनाव में आ जाते हैं। लेकिन याद रखें, यह केवल एक परीक्षा है, कड़ी मेहनत और सकारात्मक विचारों के साथ आप अच्छे अंक प्राप्त कर सकते हैं। जैसा कि कहा गया है, “जब जागो तभी सवेरा” तो घबराने के बजाय आज से ही जुट जाएं।
यहाँ एक संतुलित और प्रभावी रणनीति दी गई है:
1. टाइम टेबल: ‘आदर्श’ नहीं, ‘व्यावहारिक’ बनाएं, अक्सर छात्र दूसरों की देखा-देखी या जोश में ऐसा “आदर्श टाइम टेबल” बना लेते हैं जिसे फॉलो करना असंभव होता है।
- अपनी लय पहचानें: आप बेहतर जानते हैं कि आप कब अच्छा पढ़ते हैं (सुबह या रात)। उसी हिसाब से समय तय करें।
- लचीलापन (Flexibility): टाइम टेबल ऐसा हो जिसे आप वास्तव में निभा सकें।
- ब्रेक है जरूरी: लगातार पढ़ने के बजाय बीच में छोटे ब्रेक लें (जैसे 50 मिनट पढ़ाई, 10 मिनट ब्रेक)। इस समय में अपनी हॉबी को एन्जॉय करें, जैसे संगीत सुनना या वाद्य यंत्र बजाना, ताकि दिमाग तरोताजा रहे।
2. पढ़ाई का तरीका: रट्टा नहीं, समझ और अभ्यास केवल सिलेबस पूरा करना लक्ष्य नहीं होना चाहिए, उसे दिमाग में बिठाना जरूरी है।
- लिख-लिख कर याद करें: पढ़ने के बाद उसे बिना देखे लिखने की कोशिश करें। इससे याददाश्त पक्की होती है।
- रिवीजन की शक्ति: “बिना दोहराए कुछ नहीं।” सिलेबस पूरा करने के बाद रिवीजन का समय जरूर रखें। जो महत्वपूर्ण बिंदु (Important Points) आपने बनाए हैं, परीक्षा से पहले उन्हें जरूर देखें।
- स्मार्ट स्टडी: रट्टा मारने के बजाय कॉन्सेप्ट को समझें और एकांत में मनन करें। मुश्किल पाठ के लिए चित्रों (Diagrams) और पॉइंट्स का सहारा लें।
- पिछले वर्षों के प्रश्नपत्र: समय निकालकर मॉडल पेपर और पुराने पेपर्स हल करें। इससे आपको पेपर के पैटर्न और समय प्रबंधन (Time Management) का सही अंदाजा लगेगा।
3. तनाव और सेहत का प्रबंधन: ‘हौवा’ खत्म करें दबाव में पढ़ाई नहीं होती, खुले दिमाग से होती है।
- नींद और आहार: उठने-सोने का समय अलग हो सकता है, लेकिन नींद पूरी करना बेहद जरूरी है। पौष्टिक और हल्का खाना खाएं ताकि आलस न आए।
- योग और व्यायाम: मानसिक दबाव दूर करने के लिए थोड़ी देर योग, प्राणायाम या हल्की एक्सरसाइज करें।
- काउंसलिंग और बात करें: अगर घबराहट ज्यादा हो, तो अपने टीचर, दोस्त या किसी काउंसलर से बात करें। दोस्तों के अनुभव सुनें, लेकिन उन्हें आँख बंद करके फॉलो न करें।
4. परीक्षा हॉल की रणनीति: छोटी-छोटी मगर मोटी बातें, तैयारी का असली इम्तेहान परीक्षा हॉल में होता है।
- सामग्री खुद ले जाएं: पैन, पेंसिल, रबर, स्केल और एक्स्ट्रा पैन खुद लेकर जाएं। दोस्तों के भरोसे न रहें।
- प्रश्न ध्यान से पढ़ें: जल्दबाजी न करें। कई बार जल्दबाजी में ‘टूरिज्म’ (Tourism) को ‘टेररिज्म’ (Terrorism) पढ़ लिया जाता है, जिससे पूरा उत्तर गलत हो सकता है।
- समय सीमा: जितना पूछा गया है, उतना ही लिखें। बिना वजह लंबा लिखने से बाकी पेपर छूट सकता है।
- पहले आसान, फिर कठिन: अगर पेपर कठिन लगे, तो घबराएं नहीं। पहले उन प्रश्नों को हल करें जो आपको अच्छे से आते हैं, इससे आत्मविश्वास बढ़ता है।
- चित्र और डायग्राम: जहाँ जरूरत हो, वहाँ चित्र जरूर बनाएं, इससे नंबर बढ़ते हैं।
5. अभिभावकों के लिए विशेष सलाह : बच्चों की सफलता में घर के माहौल का बड़ा हाथ होता है।
- तुलना न करें: Every child is special. अपने बच्चे की तुलना दूसरों से न करें, इससे उनमें हीन भावना आती है।
- साथ दें: बोर्ड परीक्षाओं का हौवा न बनाएं। बस यह सुनिश्चित करें कि बच्चा टाइम टेबल फॉलो कर रहा है और उसे पौष्टिक आहार मिल रहा है।
- निष्कर्ष: आत्मविश्वास ही कुंजी है, नंबरों की दौड़ से ज्यादा अपनी तैयारी पर फोकस करें। परिणाम की चिंता में अपना आज खराब न करें। अपनी पूरी ताकत झोंक दें और खुद पर भरोसा रखें।
- अंत में, आस्था चौधरी मैम की यह बात हमेशा याद रखें: ”तैयारी में पूरी ताकत झोंक दें, फिर याद रखिए ‘समंदर सूखे तो भी घुटनों से नीचे नहीं जाता’।” (अर्थात्, आपकी मेहनत कभी बेकार नहीं जाएगी, आप हमेशा एक बेहतर स्तर पर ही रहेंगे।)
- आस्था चौधरी, व्याख्याता राउमावि बाघौली, उदयपुरवाटी, Founder आस्था फाउंडेशन
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