राष्ट्रीय महिला दिवस और नारी शक्ति
राष्ट्रीय महिला दिवस और नारी शक्ति
हम 13 फरवरी को राष्ट्रीय महिला दिवस के रूप में मनाते है । इस दिन 1879 में सरोजिनी नायडू का हैदराबाद में जन्म हुआ था। जिन्होंने भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान असहयोग आंदोलन, नमक आंदोलन जैसे आंदोलनो में भाग लिया । तथा अपने जीवन में महिलाओ के अधिकारों और मुक्ति के लिए संघर्ष किया। अपनी लय बद्ध कविता रचनाओं के कारण प्रख्यात कवयित्री के साथ साथ ‘ नाईटेगल ऑफ इंडिया ‘ के नाम से उन्हें महात्मा गांधी जी के द्वारा पुकारा गया। इतना ही नहीं सरोजिनी नायडू सन् 1925 में कांग्रेस पार्टी की पहली महिला अध्यक्षा भी बनी और कानपुर अधिवेशन की अध्यक्षता की। तथा देश ब्रिटिश शासन से मुक्त होने के बाद संयुक्त प्रांत जो वर्तमान उत्तर प्रदेश है उसकी पहली राज्यपाल भी बनी और देश में पहली महिला राज्यपाल बनने का गौरव स्व. सरोजिनी नायडू ने हासिल किया।
उनका एक विशेष नारा भी रहा जो इस प्रकार से है ” सच्ची स्वतंत्रता वही है, जहाँ भय और शोषण का स्थान न हो।”
2 मार्च 1949 को हृदयाघात के कारण राज्यपाल रहते हुए उनकी मौत हो गई। नायडू एक महिला शक्ति का चेहरा थी। इसलिए उनकी याद के लिए और नारी शक्ति के प्रतीक दिन के लिए हमारे देश में 13 फरवरी को राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है। हालांकि अंतर्राष्ट्रीय पटल पर विश्व महिला दिवस 8 मार्च को मनाया जाता है। मेरे इस निबंध के माध्यम से राष्ट्रीय महिला दिवस पर महिला शक्ति पर कुछ विशेष बिंदु इस प्रकार से है:-
वैदिक काल में नारी की स्थिति:
वैदिक काल में महिलाओं को समाज में काफी ऊंचा स्थान प्राप्त था। उन्हें अभिव्यक्ति की पूर्ण स्वतंत्रता प्राप्त थी। वे धार्मिक पूजा पाठ, कर्मकांडो में भाग लेने के साथ साथ, धार्मिक क्रियाएं संपन्न कराने वाले पुरोहितों और ऋषियों के रूप में भी भाग लेती थी। उस काल की प्रसिद्ध विद्वान महिलाएं गार्गी, लोपामुद्रा, अदिति, रोमशा, अपाला, जुहू, वागाम्भृणी, विश्ववारा, शश्वती, सूर्या, इन्द्राणी, इन्द्रमातर, इन्द्रस्नुषा, रात्रि, सार्पराज्ञी, यमी जैसे अनेक नाम के रूप में नारी शक्ति के रूप में जानी गई। और नारी का समाज में एक विशेष महत्व था। जिसे संस्कृत श्लोक में इस प्रकार से वर्णन किया गया है:-
यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः ।
यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्राफलाः क्रिया:। अर्थात नारी का पूजन जहां है वही देवताओं का निवास बताया गया।
गुप्तकाल व मध्यकाल की नारी शक्ति देश के इतिहास में पहली महिला शासक के रूप में अनेक नाम आते है जैसे प्रभावती गुप्त, रानी दिद्दा, रूद्रमा देवी से लेकर रजिया सुल्तान तक। नारी जाती ने समय समय पर शासन की बागडोर भी संभाली।
हालांकि मध्यकाल में नारी की स्थिति दयनीय होती गई। दासी प्रथा, पुरूष प्रधान समाज, बहु पत्नी प्रथा, कन्या वध,दहेज प्रथा। इत्यादि
मध्यकाल उपरांत और आधुनिक भारतीय नारी शक्ति :- इस काल में झांसी की रानी लक्ष्मी बाई जिसने ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ प्रथम स्वतंत्रता आंदोलन में अंग्रेजों के खिलाफ तलवार उठाई थी। और स्वतंत्रता संग्राम को एक नारी शक्ति के रूप में तेज धार दी।इसलिए महिला दिवस पर सुभद्रा कुमारी चौहान की कविता कि पंक्तियां याद आ जाती हैं जैसे –
चमक उठी सन् सत्तावन में,
वह तलवार पुरानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह,
हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी,
वह तो झाँसी वाली रानी थी।
सावित्रीबाई फूले :
सावित्रीबाई फुले का जन्म 3 जनवरी 1831 को हुआ था। इनके पिता का नाम खन्दोजी नैवेसे और माता का नाम लक्ष्मीबाई था। सावित्रीबाई फुले का विवाह 1841 में महात्मा ज्योतिराव फुले से हुआ था।
सावित्रीबाई फुले समाज के विकट ताने बाने और कष्टों के विरुद्ध लड़ कर, शिक्षा हासिल की और भारत की पहली महिला शिक्षिका बनी।भारत के पहले बालिका विद्यालय की पहली प्रिंसिपल(महिला शिक्षिका)और पहले किसान स्कूल की संस्थापक बनी।
देश की पूर्व प्रधान मंत्री स्व. इंदिरा गांधी ने उनके सम्मान में एक बार कहा था कि अगर देश की पहली महिला शिक्षिका सावित्री बाई फूले नहीं होती तो आज मैं देश की प्रधान मंत्री नहीं होती। हालांकि अभी तक उन्हें देश का सबसे बड़ा पुरस्कार भारत रत्न नहीं मिला है।
देश की कार्यपालिका और व्यवस्थापालिका में नारी शक्ति: देश की प्रथम महिला प्रधान मंत्रीके रूप में स्व. प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी, देश की पहली महिला मुख्यमंत्री सुचेता कृपलानी, पहली महिला राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल, पहली लोकसभा स्पीकर के रूप में मीरा कुमारी, ऐसे ही नारी शक्ति के देश में अनेक उदाहरण है जैसे:
वर्तमान महामहिम राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू, बंगाल CM ममता बनर्जी, पूर्व CM राजस्थान वसुंधरा राजे, देहली CM रेखा गुप्ता, दिल्ली की पूर्व CM और पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज जैसे अनेकों प्रख्यात नामों को नारी सशक्तिकरण के रूप में जाना जाता है। देश की पहली लोक सभा में और राज्य सभा में महिलाओ की संख्या क्रमश 22 और 15 थी जो वर्तमान लोकसभा और राज्यसभा में 75 और 42 है। इसी प्रकार से प्रशासनिक सेवाओं और विदेश सेवाओं में भी महिलाओ की बड़ी भागीदारी लगभग देखने को मिलती है।
न्याय के क्षेत्र में नारी का सशक्तिकरण:
न्याय के क्षेत्र में देश की नारी शक्ति ने अपनी उल्लेखनीय छाप छोड़ी है। देश में पहली महिला न्यायधीश बनने का श्रेय स्व. अन्ना चांडी को जाता है। तथा देश के सुप्रीम कोर्ट की जज बनने का ये गौरव जस्टिस फातिमा बीबी को हासिल है। इसी प्रकार से आगामी चीफ जस्टिस कॉलेजियम सूची में न्याय मूर्ति बी. बी. नागरत्ना का नाम शामिल है। शायद 2027 तक सुप्रीम कोर्ट की चीफ जस्टिस बनने की भी उनकी संभावना है।
इसी प्रकार से देश में बहुत सी महिलाएं वकालत में एक उम्दा पेशेवर के रूप में कार्य कर रही हैं। इसी कड़ी में सुप्रीम कोर्ट की वकील सीमा समृध्दि कुशवाहा का नाम है। जिसने निर्भया हत्याकांड को न्याय की चौखट तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई थी और दोषियों को फांसी के फंदे तक पहुंचा कर, अंतर्राष्ट्रीय पटल पर भी नारी शक्ति का परिचय दिया।और आज देश में एक प्रख्यात सुप्रीम कोर्ट की एडवोकेट है।
चिकित्सा, अंतरिक्ष विज्ञान, रक्षा, पत्रकारिता के क्षेत्र में महिलाओ की भागीदारी:- आज चिकित्सा, विज्ञान, अंतरिक्ष टेक्नोलॉजी, कंप्यूटर विज्ञान, इंजीनियरिंग के क्षेत्र में महिलाओ की सक्रिय भागीदारी देखने को मिल रही हैं। ये नारी सशक्तिकरण का ही रूप है। देश में पश्चिमी चिकित्सा पद्धति से पहली महिला डॉक्टर बनने का गौरव आनंदी बाई गोपाल जोशी
को जाता है। तथा अंतरिक्ष वैज्ञानिक बनने का श्रेय टेसी टामस को जाता है। जिन्होंने अग्नि मिसाईल वैरियंट IV और V का नेतृत्व किया। इसरो में काम करते हुए, देश के मिशाइल रक्षा तंत्र को मज़बूत करने में योगदान दिया है। देश के सेना में अधिकारी से लेकर एक जवान तक महिलाएं अपने शौर्य का परिचय दे रही है। एक लड़ाकू विमान की पायलट से लेकर,BSF में सीमा पर प्रहरी और पेट्रोलिंग में भाग लेती महिलाएं, अटारी बाघा बॉर्डर पर प्रेड में भाग लेती महिलाएं, गणतंत्र और स्वतंत्रता दिवस पर, राजधानी दिल्ली में परेड में भाग लेती महिलाएं और विभिन्न विभिन्न टोलियों का नेतृत्व करती महिलाएं नारी शक्ति की ही प्रतीक है।
ऑपरेशन सिंदूर में कर्नल सोफिया कुरैशी और विंग कमांडर हेलीकॉप्टर पायलट व्योमिका सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस देश, दुनिया के सामने ऑपरेशन सिंदूर की जानकारी दी। और देश की एकता, समरसता का संदेश एक देवी के रूप में दिया। आज पत्रकारिता के क्षेत्र में एक बेस्ट एंकर के रूप में देश में नामचीन हस्तियों के रूप में अंजना ओम कश्यप और श्वेता सिंह का नाम आगे है।
केंद्र सरकार द्वारा महिलाओ के सशक्तिकरण को प्रोत्साहन देने वाली विभिन्न योजनाएं:- उच्च शिक्षण संस्थाओं में महिला आरक्षण, महिला छात्र वृति योजना, सुकन्या समृद्धि योजना, लखपति दीदी, ड्रोन दीदी स्कीम, मिशन इंद्र धनुष उज्जवला योजना, प्रधान मंत्री आवास योजना, महिला हेल्प लाइन नंबर, महिला शक्ति केंद्र, विभिन्न स्टैंड अप कार्यक्रम, तथा 2023 में केंद्र सरकार द्वारा लाया गया 128 वां संशोधन विधेयक नारी शक्ति वंदन अधिनियम जो लोक सभा और राज्य सभा में महिलाओ को एक तिहाई आरक्षण की गारंटी देता है। नारी सशक्तिकरण में और उनकी भागीदारी में एक मील का पत्थर साबित होगा।
निष्कर्ष :- केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय महिला दिवस पर सरकारी और अर्ध सरकारी संस्थानों, विभागों और मंत्रालयी स्तर पर महिला सशक्तिकरण हेतु अनेक कार्यक्रम आयोजित किए जाते है। और देश की नारी शक्ति ईमानदारी से देश के विकास में अपनी सहभागिता सुनिश्चित करने के अथक, निरंतर प्रयास रत है, और आगे बढ़कर भाग ले रही हैं। नारी ने समाज के विकास में सदैव अपना योगदान दिया है। नारी को समाज में देवी, लक्ष्मी के रूप में पूजा गया है। एक शिक्षित नारी का पूरे परिवार और समाज पर असर पड़ता है। इसलिए वर्तमान समय में नारी की शिक्षा का आधार भारतीय समाज संस्कृति हो, और दक्षता विश्व स्तर की हो। जब इन दोनों तत्वों का, दोनों गुणों का सामंजस्य बना रहेगा, तो सदैव नारी की सशक्तिकरण के अनेक रूपों में जैसे लक्ष्मी, देवी, मातृ शक्ति, आदि रूपों में पूजा, वंदना होती रहेगी।
जय मां भारती।
संजय सैनी अलसीसरिया, सीनियर ट्रेन मैनेजर, रेलवे, जिला- झुंझुनूं
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