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जाखल में राम कथा का छठा दिन:रामवनवास प्रसंग ने भरत प्रेम, राम त्याग का संदेश दिया


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जाखल में राम कथा का छठा दिन:रामवनवास प्रसंग ने भरत प्रेम, राम त्याग का संदेश दिया

जाखल में राम कथा का छठा दिन:रामवनवास प्रसंग ने भरत प्रेम, राम त्याग का संदेश दिया

गुढ़ागौड़जी : जाखल गांव के सौंथलिया गेस्ट हाउस में ग्रामवासियों के सहयोग से आयोजित राम कथा का छठा दिन रामवनवास प्रसंग को समर्पित रहा। इस दौरान पंडित दिनेशानन्द धोद महाराज ने रामवनवास यात्रा का मार्मिक वर्णन किया, जिसे सुनने के लिए सैकड़ों की संख्या में महिला-पुरुष श्रद्धालु उपस्थित रहे। कथा स्थल पर दिनभर भक्ति और श्रद्धा का वातावरण बना रहा।

कथावाचक पंडित दिनेशानन्द महाराज ने बताया कि भगवान श्रीराम ने देवताओं के कार्य सिद्ध करने के लिए चौदह वर्षों का वनवास स्वीकार किया था। उन्होंने इस प्रसंग को जीवन में धैर्य, त्याग और कर्तव्य पालन की प्रेरणा देने वाला बताया। महाराज ने यह भी कहा कि भगवान श्रीराम ने माता-पिता की आज्ञा को सर्वोपरि मानते हुए राजपाट का त्याग किया।

पंडित दिनेशानन्द महाराज ने केवट द्वारा भगवान श्रीराम को गंगा पार कराने के प्रसंग का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह दर्शाता है कि भगवान को भी अपने भक्तों की आवश्यकता होती है, जिससे भक्त और भगवान का संबंध अटूट बनता है। कथा के दौरान भाई भरत के भ्रातृ प्रेम और भगवान श्रीराम के त्याग पर विशेष प्रकाश डाला गया, जिसे मानव जीवन के लिए आदर्श बताया गया।

छठे दिन की कथा के मुख्य यजमान बसंत सिंह शेखावत रहे। आयोजन समिति ने अतिथियों एवं श्रद्धालुओं का स्वागत किया। कथा के समापन पर आरती की गई और प्रसाद वितरित किया गया। ग्रामीणों ने जानकारी दी कि राम कथा का आयोजन आगामी दिनों में भी श्रद्धा और उत्साह के साथ जारी रहेगा।

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