[pj-news-ticker post_cat="breaking-news"]

खेतों में बिजली टावर लगाने के खिलाफ किसान लामबंद:मुआवजे के साथ किराया देने की कर रहे मांग; रतनगढ़ से चैनपुरा तक बिछाई जा रही बिजली लाइन


निष्पक्ष निर्भीक निरंतर
  • Download App from
  • google-playstore
  • apple-playstore
  • jm-qr-code
X
टॉप न्यूज़राजस्थानराज्यसादुलपुरसीकर

खेतों में बिजली टावर लगाने के खिलाफ किसान लामबंद:मुआवजे के साथ किराया देने की कर रहे मांग; रतनगढ़ से चैनपुरा तक बिछाई जा रही बिजली लाइन

खेतों में बिजली टावर लगाने के खिलाफ किसान लामबंद:मुआवजे के साथ किराया देने की कर रहे मांग; रतनगढ़ से चैनपुरा तक बिछाई जा रही बिजली लाइन

सादुलपुर : सादुलपुर क्षेत्र के निकटवर्ती गांव धोलिया में बिना पूर्व सूचना के किसानों के खेतों में बिजली के टावर लगाए जाने को लेकर ग्रामीणों में गहरा आक्रोश देखने को मिल रहा है। रविवार को इस मुद्दे पर गांव में एक बैठक आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता गोपीराम राहड़ ने की। बैठक में सर्वसम्मति से एक संघर्ष समिति का गठन किया गया, जो विभागीय अधिकारियों और ठेकेदार से मिलकर मुआवजे की मांग करेगी।

ग्रामीणों का आरोप है कि ठेकेदार द्वारा किसानों को कोई पूर्व जानकारी दिए बिना जेसीबी और अन्य भारी मशीनों से खेतों में जबरन खुदाई की जा रही है। इस दौरान बड़े-बड़े गड्ढे खोद दिए गए, जिससे खड़ी फसल को नुकसान पहुंचा है और भूमि की उर्वरता प्रभावित हो रही है। किसानों का कहना है कि इस तरह की मनमानी को देखते हुए उन्होंने काम रुकवा दिया है।

हर टावर से दो बीघा जमीन हो रही खराब

किसानों के अनुसार, एक-एक बिजली टावर लगाने से करीब दो बीघा भूमि खराब हो रही है। इसके अलावा, निर्माण कार्य में लगे वाहन खड़ी चने की फसल के बीच से रास्ता बना रहे हैं। कंक्रीट, स्पॉटिंग सिस्टम, सरिया, रोड एंगल, जैक जैसी सामग्री खेतों में बेतरतीब तरीके से डाली जा रही है, जिससे फसलों को भारी नुकसान हो रहा है और किसानों को आर्थिक क्षति झेलनी पड़ रही है।

आश्वासन तक काम नहीं होने देने की चेतावनी

ग्रामीणों ने साफ कहा है कि जब तक उन्हें मुआवजे को लेकर लिखित आश्वासन नहीं दिया जाता, तब तक किसी भी प्रकार का कार्य आगे नहीं बढ़ने दिया जाएगा। उनका कहना है कि मौखिक भरोसे के आधार पर वे अब कोई जोखिम नहीं उठाना चाहते।

रतनगढ़ से चैनपुरा तक बिछाई जा रही बिजली लाइन

ग्रामीणों ने बताया कि यह बिजली लाइन रतनगढ़ से चैनपुरा तक बिछाई जा रही है। हालांकि, मौके पर मौजूद अधिकारियों के पास मुआवजे से जुड़ा कोई लिखित आदेश या स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं हैं। किसानों का आरोप है कि अधिकारी केवल मौखिक आदेशों के आधार पर काम करवा रहे हैं, जिससे भ्रम और असंतोष की स्थिति बनी हुई है।

मुआवजे के साथ किराए की भी मांग

संघर्ष समिति का कहना है कि जिन खेतों में बिजली के टावर लगाए गए हैं, वे जमीनें भविष्य में खेती योग्य नहीं रह जाएंगी। ऐसे में किसानों को एकमुश्त मुआवजे के साथ-साथ जमीन के उपयोग का किराया भी दिया जाना चाहिए। समिति ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ, तो उपखंड अधिकारी के माध्यम से जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर आंदोलन किया जाएगा।

इस बैठक में गोपीराम राहड़, गुलशन फागेडिया, दीनू राठौड़, देबू सिंह, जयवीर सिंह, विजेंद्र सिंह, रामचंद्र राहड़, पिंकू, तेजपाल सिंह, सुरेंद्र, सनोज और कानू सिंह सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।

Related Articles