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ई-मित्र संचालकों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा:गिरदावरी टोकन गड़बड़ी मामले में नोटिस का विरोध, जांच रद्द करने की मांग


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ई-मित्र संचालकों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा:गिरदावरी टोकन गड़बड़ी मामले में नोटिस का विरोध, जांच रद्द करने की मांग

ई-मित्र संचालकों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा:गिरदावरी टोकन गड़बड़ी मामले में नोटिस का विरोध, जांच रद्द करने की मांग

बीदासर : बीदासर तहसील के ई-मित्र संचालकों ने गिरदावरी टोकन में कथित गड़बड़ी को लेकर जिला कलेक्टर के नाम उपखंड अधिकारी अमीलाल यादव को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने विभाग द्वारा जारी नोटिसों को तत्काल रद्द करने की मांग की है। ज्ञापन में बताया गया कि राज्य सरकार ने राजफैड के माध्यम से फसल तुलाई के लिए ई-मित्र से टोकन कटवाने की व्यवस्था की थी। ई-मित्र संचालकों ने किसानों द्वारा ऑनलाइन गिरदावरी डाउनलोड करवाकर टोकन जारी किए थे।

संचालकों का कहना है कि इस प्रक्रिया में उनका कोई निजी हित नहीं था, न ही वे स्वयं किसान या बटाईदार हैं। इसके बावजूद जिला कलेक्टर ने उन्हें नोटिस जारी कर जांच के लिए स्पष्टीकरण मांगा है। उन्होंने तर्क दिया कि टोकन जारी करने के लिए राज्य सरकार ने सत्यापन संबंधी कोई दिशानिर्देश जारी नहीं किए थे। ऐसे में ई-मित्र संचालकों के लिए दस्तावेजों का सत्यापन करना संभव नहीं था, और न ही यह उनके अधिकार क्षेत्र में आता है। उनका कार्य केवल सरकारी योजनाओं का पंजीकरण करना है।

ई-मित्र संचालकों को राज्य सरकार से कोई आर्थिक सहायता नहीं मिलती; पंजीकरण से होने वाली आय ही उनका गुजारा है। विभाग द्वारा उन्हें चूरू बुलाकर स्पष्टीकरण मांगना अनुचित है, क्योंकि इससे उनका पूरा दिन खराब होता है और आर्थिक नुकसान होता है। संचालकों ने कहा कि टोकनों में गड़बड़ी के लिए गिरदावरी तैयार करने वाले जिम्मेदार हैं, न कि ई-मित्र धारक। उन्होंने मांग की कि विभाग द्वारा जारी नोटिसों को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए, अन्यथा वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

उन्होंने सुझाव दिया कि केवल उन्हीं कियोस्क से संबंधित टोकनों के दस्तावेज मंगवाए जाएं जिनमें गड़बड़ी पाई गई है, और यह प्रक्रिया ऑनलाइन ईमेल के माध्यम से की जाए ताकि ई-मित्र संचालकों का समय और धन बर्बाद न हो। इस मौके पर कन्हैयालाल पड़िहार, गजानंद बिहानी, संजू मोदी, कैलाश ढाका, अनिल पारीक, धर्मेंद्र, सीताराम माचरा, सीताराम प्रजापत, कन्हैयालाल सिवल, नेमाराम मेघवाल, चंद्रकांत और ओमप्रकाश सारण सहित कई ई-मित्र संचालक उपस्थित थे।

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