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एसएसबी जवान मुकेश गुर्जर का सैन्य सम्मान से अंतिम संस्कार


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एसएसबी जवान मुकेश गुर्जर का सैन्य सम्मान से अंतिम संस्कार

15 साल के बेटे ने दी मुखाग्नि, तिरंगा सौंपते ही नम हुईं आंखें

जनमानस शेखावाटी सवंददाता : नैना शेखावत

रींगस : परसरामपुरा गांव के वीर सपूत एसएसबी जवान मुकेश कुमार गुर्जर को रविवार को सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई।
घर के पास ही शहीद स्मारक के लिए चिन्हित स्थान पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। जवान के 15 वर्षीय बेटे दीपक गुर्जर ने पिता को मुखाग्नि दी तो पूरा माहौल गमगीन हो गया।

 “भारत माता की जय” के नारों से गूंजा परसरामपुरा गांव

देर रात दो बजे जवान की पार्थिव देह तिरंगे में लिपटी रींगस थाने पहुंची। सुबह गांव पहुंचने पर “मुकेश गुर्जर अमर रहे”, “वंदे मातरम” और “भारत माता की जय” के नारे गूंज उठे। गांव के हर घर की आंखें नम थीं।

गार्ड ऑफ ऑनर में दी अंतिम सलामी

एसएसबी इंस्पेक्टर रमेश गुर्जर की अगुवाई में जवानों ने शहीद को गार्ड ऑफ ऑनर दिया। इंस्पेक्टर ने जवान के पुत्र दीपक को तिरंगा सौंपा, जिस पल हर किसी की आंखों से अश्रु बह निकले।

नेताओं और अधिकारियों ने दी श्रद्धांजलि

अंत्येष्टि के दौरान विधायक सुभाष मील, पूर्व केंद्रीय मंत्री महादेव सिंह खंडेला, भाजपा नेता श्याम चौधरी, नगर पालिका अध्यक्ष हरिशंकर निठारवाल, एसडीएम बृजेश कुमार, तहसीलदार महेश ओला समेत कई अधिकारी मौजूद रहे। सभी ने पार्थिव देह पर पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।

बिहार में चुनाव ड्यूटी के दौरान हादसा

39 वर्षीय जवान मुकेश गुर्जर, पुत्र नानूराम गुर्जर, एसएसबी की 71वीं बटालियन में तैनात थे। वह बिहार के पूर्वी चंपारण जिले, मोतिहारी में सेवा दे रहे थे। हाल ही में उन्हें मुजफ्फरपुर में चुनाव ड्यूटी पर भेजा गया था। 24 अक्टूबर की शाम करीब 6 बजे वह छत से गिरकर घायल हुए और अस्पताल में उपचार के दौरान उनका निधन हो गया।

12 साल की सेवा, जन्मदिन से 16 दिन पहले मिली वीरगति

मुकेश ने 29 जून 2013 को एसएसबी जॉइन किया था। उन्होंने 12 साल 3 महीने 25 दिन तक देश की सेवा की। उनका 39वां जन्मदिन 10 नवंबर को आने वाला था, लेकिन उससे सिर्फ 16 दिन पहले वह वीरगति को प्राप्त हो गए।

परिवार में कोहराम, गांव में नहीं जले चूल्हे

जवान की शहादत की खबर से परिवार में मातम पसरा हुआ है। मां मनभरी देवी, पत्नी सुमन, बहन पिंकी और बच्चे पायल (17) व दीपक (15) का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव में शोक का ऐसा माहौल कि आसपास के घरों में चूल्हे तक नहीं जले। मुकेश अपने पिता नानूराम गुर्जर (राजस्व विभाग से रिटायर्ड तहसील रीडर) की चार संतानों में दूसरे नंबर पर थे। बड़ा भाई राजेश गुर्जर विदेश में नौकरी करता है और छोटा भाई मनोज खेती-बाड़ी संभालता है।

विधायक सुभाष मील ने किया शहीद स्मारक का ऐलान

परिजनों और ग्रामीणों ने जवान के सम्मान में शहीद स्मारक और परिलाभों में बढ़ोतरी की मांग रखी। विधायक सुभाष मील ने अपने निजी खर्चे से शहीद स्मारक निर्माण की घोषणा की। वहीं एसडीएम बृजेश कुमार ने जवान के घर के पास सवाईचक भूमि से 500 वर्गमीटर जगह स्मारक के लिए आवंटित करने की घोषणा की। अंत्येष्टि भी उसी स्थान पर सैन्य सम्मान के साथ की गई।

ग्रामीण बोले – मुकेश ने गांव का नाम रोशन किया

गांव के बुजुर्गों ने कहा कि मुकेश हमेशा मददगार और सरल स्वभाव के थे। देश सेवा में रहते हुए उन्होंने अपने परिवार और गांव का नाम ऊंचा किया।

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