सरदारशहर में विश्व आदिवासी दिवस पर मीणा समाज की बैठक:कहा-जल, जंगल और जमीन के मालिक अपने हक से वंचित, मणिपुर हिंसा के खिलाफ प्रस्ताव पारित
सरदारशहर में विश्व आदिवासी दिवस पर मीणा समाज की बैठक:कहा-जल, जंगल और जमीन के मालिक अपने हक से वंचित, मणिपुर हिंसा के खिलाफ प्रस्ताव पारित
सरदारशहर : सरदारशहर में मीणा गेस्ट हाउस में बुधवार को विश्व आदिवासी दिवस मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर हुआ। मीणा समाज समिति के अध्यक्ष रामनिवास मीणा ने कहा कि जल, जंगल और जमीन के असली मालिक आदिवासी आज भी अपने हक से वंचित हैं। देश की आजादी और विकास में अहम योगदान देने के बावजूद समाज को उपेक्षा झेलनी पड़ रही है।
उन्होंने बताया कि 9 अगस्त को संयुक्त राष्ट्र ने 1982 में आदिवासियों के हित में कार्यदल की पहली बैठक आयोजित की थी। इसके बाद इस दिन को विश्व आदिवासी दिवस घोषित किया गया। कार्यक्रम में राजेंद्र मीना ने कहा-आदिवासी समाज मुख्यधारा से पूरी तरह नहीं जुड़ पाया है। साथ ही उनकी संख्या भी घट रही है। सम्मान और अस्तित्व बचाने के लिए संघर्ष जरूरी है। इसी उद्देश्य से यह दिवस मनाया जाता है।
बैठक में मणिपुर हिंसा के खिलाफ प्रस्ताव पारित कर आदिवासियों के साथ एकजुटता जताई गई। साथ ही समान नागरिक संहिता में आदिवासियों का मौजूदा दर्जा बनाए रखने की मांग रखी गई।
ये रहे मौजूद
कार्यक्रम में नेमीचंद मीना, राजू मीना, केशरी मीना, सीताराम जेईएन, सुमित कुमार, अमित, महेंद्र, सुदर्शन मीना, पंकज और मुकेश सहित कई वक्ताओं ने विचार व्यक्त किए। इस मौके पर महेंद्र मीना, राजेंद्र मीना, परमेश्वर मीना, विक्रम सिंह मीना समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
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