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खेजड़ी की जड़ों से उतारते हैं बच्चों के जात-जड़ूले:होली-दीपावली पर लगता है मेला, 500 साल पुराने वृक्ष से जुड़ी है आस्था


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खेजड़ी की जड़ों से उतारते हैं बच्चों के जात-जड़ूले:होली-दीपावली पर लगता है मेला, 500 साल पुराने वृक्ष से जुड़ी है आस्था

खेजड़ी की जड़ों से उतारते हैं बच्चों के जात-जड़ूले:होली-दीपावली पर लगता है मेला, 500 साल पुराने वृक्ष से जुड़ी है आस्था

कंचनपुर : कंचनपुर के दूल्हेपुरा रोड स्थित जाट बाबा महामाई धाम पर दीपावली के मौके पर 500 साल से भी पुराने खेजड़ी वृक्ष की पूजा होती है। यहां दूर-दूर से श्रद्धालु मनोकामनाएं लेकर आते हैं।

मंदिर के पुजारी भंवर लाल के मुताबिक, यह धाम करीब 500 साल से भी पुराना है। मान्यता है कि यहां हजारों साल पहले एक गांव बसा था, जो प्राकृतिक कारणों से अब अस्तित्व में नहीं है। उस जगह एक तपस्वी संत ने समाधि ली थी। बाद में वहां खेजड़ी का वृक्ष उग आया।

कंचनपुर के इतिहासकार और लेखक ताराचंद मीणा ने बताया कि प्राचीन उखलड़ा गांव के जागीरदार पुत्र प्राप्ति की मनोकामना लेकर यहां आए थे। मान्यता है कि बाबा के चमत्कार से उन्हें पुत्र की प्राप्ति हुई। इसके बाद आसपास के लोगों की इस धाम के प्रति आस्था बढ़ी और यह परंपरा आज भी जारी है।

तब से हर साल दीपावली और होली पर यहां मेला लगता है। इस वृक्ष को अब जाट बाबा के नाम से जाना जाता है। भक्त खेजड़ी यानी जाट वृक्ष की जड़ों के बीच से अपने बच्चों के जात-जड़ूले उतारते हैं। भक्तों ने यहां मंदिर भी बनवाया है। श्रद्धालु मंदिर में फेरी लगाकर मन्नतें मांगते हैं।

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