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वन विभाग में गड़बड़ियों की फाइल पहुंची एसीबी:टेंडर राशि से लेकर नीलामी तक में कमियां


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वन विभाग में गड़बड़ियों की फाइल पहुंची एसीबी:टेंडर राशि से लेकर नीलामी तक में कमियां

वन विभाग में गड़बड़ियों की फाइल पहुंची एसीबी:टेंडर राशि से लेकर नीलामी तक में कमियां

झुंझुनूं : झुंझुनूं वन मंडल में सरकारी राशि के कथित गबन और वित्तीय अनियमितताओं का मामला अब भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) तक पहुंच गया है। वन विभाग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी समेकित जांच एसीबी से कराने का फैसला किया है। जांच रिपोर्टों में केवल 3.37 लाख रुपए की धरोहर राशि राजकोष में जमा नहीं कराने का मामला ही सामने नहीं आया, बल्कि सरकारी रसीदों पर संदिग्ध हस्ताक्षर, लाखों रुपए की अन्य रसीदों का हिसाब नहीं मिलने, लकड़ी-कोयले की नीलामी से संबंधित मूल पत्रावलियां गायब होने और निविदा प्रक्रिया में अनियमितताओं के बिंदु भी उठाए गए हैं।

शासन उप सचिव शीलावती मीणा ने 22 अक्टूबर 2026 को महानिदेशक, भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो, राजस्थान, जयपुर को पत्र लिखकर पूरे प्रकरण की जांच कराने के निर्देश दिए हैं। पत्र में मुख्य वन संरक्षक, जयपुर की 2 सितंबर 2026 की रिपोर्ट और गठित जांच समिति की 15 सितंबर 2026 की रिपोर्ट का हवाला दिया गया है। सरकार ने लिखा है कि जांच रिपोर्टों के अनुसार प्रथम दृष्टया वित्तीय अनियमितताएं होना सामने आया है। ऐसे में एसीबी को जांच सौंपी गई है।

3.37 लाख रुपए नकद लिए, सरकारी खाते में जमा नहीं हुए

  • फतेहपुर की शारदा इंटरप्राइजेज ने वन विभाग के विकास कार्यों से संबंधित टेंडर की धरोहर राशि (ईएमडी) के रूप में 18 अगस्त 2026 को 3 लाख 37 हजार रुपए नकद जमा कराए थे।
  • इसके बदले वन विभाग की ओर से जीए-55 की रसीद संख्या 036 जारी की गई थी। यह रसीद बुक नंबर 0486760 की थी। जांच में सामने आया कि फर्म से राशि नकद लेने के बावजूद इसे नियमानुसार राजकोष अथवा सरकारी खाते में जमा नहीं कराया गया।
  • रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि नियमानुसार 500 रुपए से अधिक की राशि सामान्य तौर पर नकद स्वीकार नहीं की जानी चाहिए।
  • इसके बावजूद इतनी बड़ी रकम नकद लेने और उसे सरकारी खाते में जमा नहीं कराने का मामला सामने आया। इसी प्रकरण में कनिष्ठ सहायक एवं स्टोर इंचार्ज प्रहलाद सिंह के खिलाफ 3.37 लाख रुपए के कथित गबन को लेकर एफआईआर दर्ज कराई गई थी। उन्हें निलंबित भी किया जा चुका है।

चार रसीदों पर संदिग्ध हस्ताक्षर, करीब 7.11 लाख रुपए का मामला

जांच रिपोर्ट में सरकारी रसीदों की प्रामाणिकता को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। चार जीए-55 रसीदों पर करीब 7.11 लाख रुपए की राशि से संबंधित प्रविष्टियां मिलीं। इन रसीदों पर विभागीय मुहर और हस्ताक्षर अंकित थे, लेकिन जांच में हस्ताक्षर झुंझुनूं वन मंडल में पदस्थापित किसी भी सहायक वन संरक्षक के नहीं पाए जाने की बात सामने आई। रिपोर्ट में इन हस्ताक्षरों को संदिग्ध बताते हुए फर्जी तरीके से अंकित किए जाने की आशंका जताई गई। इसके साथ ही रसीद बुक के कई पन्ने और उनके काउंटरफॉइल भी गायब मिले।

14 लाख की लकड़ी-कोयले की नीलामी की मूल पत्रावली गायब

वन मंडल में नीलामी प्रक्रिया के रिकॉर्ड को लेकर भी अनियमितताएं सामने आई हैं। रिपोर्ट के अनुसार 30 जुलाई 2026 को लकड़ी और कोयले की नीलामी संपन्न हुई थी। इसमें अधिकतम बोली करीब 14 लाख रुपए तक पहुंची है।

लेकिन नीलामी से संबंधित मूल पत्रावली कार्यालय में उपलब्ध नहीं मिली। इसके अलावा झुंझुनूं, चिड़ावा, खेतड़ी, उदयपुरवाटी और नवलगढ़ रेंज से संबंधित नीलामी की पत्रावलियां भी गायब बताई गईं। नीलामी प्रक्रिया में बोलीदाताओं का विवरण, स्वीकृत बोली, भुगतान की स्थिति, राशि जमा कराने के दस्तावेज और संबंधित अधिकारियों की स्वीकृति महत्वपूर्ण रिकॉर्ड होते हैं। मूल पत्रावलियां उपलब्ध नहीं होने से नीलामी की पूरी प्रक्रिया संदेह के घेरे में है।

निविदा संख्या 13 से 17, 20 से 25, 28 तथा 30 से 33/2026-27 सहित कई टेंडरों में सफल निविदादाताओं को कार्यादेश जारी करने से पहले कार्य संपादन प्रतिभूति और अतिरिक्त प्रतिभूति राशि जमा कराने की प्रक्रिया में गड़बड़ी बताई गई। नियमों के अनुसार सफल निविदादाता को निर्धारित शर्तों के अनुसार आवश्यक प्रतिभूति राशि जमा करानी होती है। इसके बाद ही नियमानुसार कार्यादेश जारी किया जाता है। जांच में इसी प्रक्रिया के पालन और संबंधित वित्तीय दस्तावेजों को लेकर सवाल उठाए गए हैं।

आरा मशीनों के नवीनीकरण शुल्क वसूलने का मामला भी जांच में

रिपोर्ट में आरा मशीनों के नवीनीकरण से संबंधित रसीदों का मामला भी उठाया गया है। वर्ष 2020 से आरा मशीनों के नवीनीकरण पर रोक होने के बावजूद कई संचालकों से नवीनीकरण शुल्क वसूलने और इसके बदले जीए-55 रसीदें जारी करने का उल्लेख किया गया है। इन रसीदों पर सक्षम अधिकारियों के हस्ताक्षर होने के दावों की भी जांच की जानी है। ऐसे में यह पता लगाना जरूरी होगा कि रोक के बावजूद शुल्क किस आधार पर वसूला गया, किस अधिकारी की अनुमति से रसीदें जारी हुईं और प्राप्त राशि सरकारी खाते में जमा कराई गई या नहीं।

पहले विभागीय जांच, कर्मचारी निलंबित और एफआईआर

इन अनियमितताओं के सामने आने के बाद वन विभाग ने पहले विभागीय स्तर पर कार्रवाई शुरू की थी। कनिष्ठ सहायक एवं स्टोर इंचार्ज प्रहलाद सिंह को निलंबित किया गया और 3.37 लाख रुपए की धरोहर राशि के कथित गबन के मामले में एफआईआर दर्ज कराई गई। मुख्य वन संरक्षक की रिपोर्ट के आधार पर आगे गठित जांच समिति ने भी 15 सितंबर 2026 को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की। दोनों रिपोर्टों में सामने आए तथ्यों के आधार पर सरकार ने अब मामला एसीबी को सौंपने का निर्णय लिया है।

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