‘राम पुस्तक पढ़ता है’ लिखना आता है, लेकिन पढ़ना नहीं: दीपचंद्र शास्त्री
‘राम पुस्तक पढ़ता है’ लिखना आता है, लेकिन पढ़ना नहीं: दीपचंद्र शास्त्री
चूरू : श्री ऋषिकुल ब्रह्मचर्याश्रम एवं राजकीय सर्वहितकारिणी पुत्री पाठशाला में गीता मनीषी एवं लोकतंत्र सेनानी दीपचंद्र शर्मा ने विद्यार्थियों और शिक्षकों को देवनागरी लिपि के सही पठन का महत्व समझाया। उन्होंने कहा कि आज स्थिति यह है कि छात्र ही नहीं, कई आचार्य, प्राचार्य और कुलपति तक पहली कक्षा की पुस्तक पढ़ने में कठिनाई महसूस करते हैं।
उन्होंने कहा कि संस्कृत भाषा और देवनागरी लिपि को अलग-अलग समझना जरूरी है। ‘राम’, ‘रामौ’, ‘रामाः’, ‘पठति’ जैसे शब्द संस्कृत भाषा के हैं, जबकि इन्हें देवनागरी लिपि में लिखा गया है। उन्होंने हलन्त, अनुस्वार और विसर्ग के सही उच्चारण की जानकारी देते हुए कहा कि किसी भी बड़े ग्रंथ को एक साथ पढ़ने की जरूरत नहीं है। पहले एक पृष्ठ, फिर एक पंक्ति, एक शब्द और उसके बाद एक-एक अक्षर पढ़ने की आदत डालनी चाहिए। इसी क्रम से पूरा ग्रंथ आसानी से पढ़ा जा सकता है।
दीपचंद्र शर्मा ने बताया कि उन्होंने देश-विदेश के एक हजार से अधिक शिक्षण संस्थानों में गीता पठन और श्लोक कंठस्थ कराने का कार्य किया है। उन्होंने ‘विद्या’ शब्द का उदाहरण देते हुए कहा कि बहुत से विद्यार्थियों को इसके अक्षरों और उच्चारण की सही जानकारी नहीं है। उन्होंने इस विषय को व्यापक स्तर पर प्रचारित करने की आवश्यकता बताई और कहा कि इस संबंध में उन्होंने राष्ट्रपति को भी पत्र लिखा है। चूरू प्रवास के दौरान उन्होंने शेखावाटी की नव कवयित्री एवं ताइक्वांडो खिलाड़ी अनिशा भार्गव को ‘श्रीमद्भगवद्गीता सुगम पाठ’ की प्रति भेंट की।
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