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कांग्रेस के गढ़ में खिला ‘कमल’ एक वोट से जीतकर अनुराधा सैनी बनीं पालिकाध्यक्ष : 10 पार्षदों वाली भाजपा ने निर्दलीयों के समर्थन से बनाई नगर की सरकार


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उदयपुरवाटीझुंझुनूंटॉप न्यूज़राजस्थानराज्य

कांग्रेस के गढ़ में खिला ‘कमल’ एक वोट से जीतकर अनुराधा सैनी बनीं पालिकाध्यक्ष : 10 पार्षदों वाली भाजपा ने निर्दलीयों के समर्थन से बनाई नगर की सरकार

कांटे की टक्कर में अनुराधा सैनी को मिले 18 वोट कांग्रेस के रूड़मल सैनी को 17 वोट पर ही संतोष करना पड़ा

जनमानस शेखावाटी सवांददाता :  कैलाश बबेरवाल

उदयपुरवाटी : नगरपालिका क्षेत्र में कांग्रेस के मजबूत गढ़ माने जाने वाली पालिका में बड़ा राजनीतिक उलटफेर देखने को मिला है। नगर पालिका अध्यक्ष पद के लिए हुए घमासान मुकाबले में भारतीय जनता पार्टी की अनुराधा सैनी पत्नी महेश सैनी वार्ड नंबर 22 ने बाजी मारते हुए अध्यक्ष पद की कुर्सी पर कब्जा जमा लिया है। अत्यंत रोमांचक और सांसें थाम देने वाले इस चुनाव में अनुराधा सैनी ने कांग्रेस प्रत्याशी रूड़मल सैनी को मात्र 1 वोट के अंतर से पराजित किया। मतदान में भाजपा की अनुराधा सैनी को 18 वोट मिले, जबकि कांग्रेस के रूड़मल सैनी को 17 वोटों से ही संतोष करना पड़ा।

निर्दलीयों के समर्थन से बनी भाजपा की सरकार
उदयपुरवाटी में 35 वार्डों वाली नगर पालिका में पार्षदों के गणित पर नजर डालें तो चुनाव परिणामों में कांग्रेस 11 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। भाजपा के खाते में 10 सीटें आई थीं, जबकि 13 निर्दलीय और 1 सीट सीपीएम के खाते में गई थी। स्पष्ट बहुमत न होने के कारण कुर्सी की चाबी निर्दलीय पार्षदों के हाथों में आ गई थी। भाजपा ने कुशल राजनीतिक बिसात बिछाते हुए निर्दलीय पार्षदों का समर्थन हासिल किया और नगर की सरकार बनाने में सफलता प्राप्त की।

सैनी बहुल वार्डों में बढ़त के बाद भी कांग्रेस के हाथ से फिसली कुर्सी
विधानसभा चुनावों में उदयपुरवाटी शहर से कांग्रेस प्रत्याशी और वर्तमान विधायक भगवानराम सैनी को बड़ी बढ़त (लीड) हासिल हुई थी। इसके अलावा पालिका चुनाव में भी सैनी बाहुल्य वार्डों में कांग्रेस का प्रदर्शन बेहतर रहा और पार्टी आगे रही। हालांकि इन तमाम अनुकूल परिस्थितियों और 11 सीटें होने के बावजूद कांग्रेस अपने प्रत्याशी को पालिकाध्यक्ष की कुर्सी तक नहीं पहुंचा सकी।

पूर्व विधायक शुभकरण चौधरी की रणनीति का दिखा प्रभाव
उदयपुरवाटी पालिकाध्यक्ष की कुर्सी पर भाजपा का परचम फहराने में पूर्व विधायक शुभकरण चौधरी की अहम भूमिका मानी जा रही है। शहर में कांग्रेस के दबदबे के बीच निर्दलीय पार्षदों को एकजुट कर भाजपा के पक्ष में मतदान कराने में पूर्व विधायक की रणनीति पूरी तरह सफल साबित हुई, जिससे स्थानीय राजनीति में उनका वर्चस्व एक बार फिर साबित हुआ है।

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