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भाजपा-कांग्रेस को निर्दलीयों का सहारा: सीकर-चूरू-झुंझुनूं की 6 नगर परिषदों में 4 जगह निर्दलीय तय करेंगे सभापति


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भाजपा-कांग्रेस को निर्दलीयों का सहारा: सीकर-चूरू-झुंझुनूं की 6 नगर परिषदों में 4 जगह निर्दलीय तय करेंगे सभापति

भाजपा-कांग्रेस को निर्दलीयों का सहारा: सीकर-चूरू-झुंझुनूं की 6 नगर परिषदों में 4 जगह निर्दलीय तय करेंगे सभापति

जनमानस शेखावाटी सवांददाता : नैना शेखावत

झुंझुनूं : शेखावाटी के तीन जिलों सीकर, चूरू और झुंझुनूं की नगर परिषदों में शहर की सरकार का फैसला अब पार्षदों के समर्थन के गणित पर टिका है। तीनों जिलों की छह नगर परिषदों में से दो जगह एक दल को स्पष्ट बहुमत मिला है, जबकि चार नगर परिषदों में भाजपा और कांग्रेस दोनों को निर्दलीय पार्षदों के समर्थन की जरूरत पड़ सकती है। 21 सितंबर को सभापति पद के लिए मतदान के साथ ही इन निकायों की तस्वीर साफ हो जाएगी। राजस्थान में नगर निकाय अध्यक्ष एवं सभापति पद के चुनाव 21 सितंबर को और उपाध्यक्ष पद के चुनाव 22 सितंबर को निर्धारित हैं।

चुनाव परिणाम आने के बाद बहुमत से दूर दलों ने अपने पार्षदों को एकजुट रखने के लिए बाड़ाबंदी शुरू कर दी है। जिन निकायों में स्पष्ट बहुमत नहीं है, वहां निर्दलीय पार्षदों का समर्थन हासिल करने की कोशिशें भी तेज हैं। 21 सितंबर को पार्षद बाड़ेबंदी से बाहर निकलकर सभापति के चुनाव में मतदान करेंगे।

छह नगर परिषदों में यह है गणित

झुंझुनूं नगर परिषद: यहां कुल 60 वार्ड हैं। कांग्रेस ने 30, भाजपा ने 15 और निर्दलीयों ने 15 सीटें जीती हैं। कांग्रेस के अब्दुल्ला अगवान और भाजपा के मनु धनखड़ के बीच सभापति पद के लिए मुकाबला है। कांग्रेस को बहुमत के लिए एक पार्षद के समर्थन की जरूरत है, जबकि भाजपा को बहुमत तक पहुंचने के लिए अधिक समर्थन जुटाना होगा। यहां निर्दलीय पार्षद चुनावी गणित में अहम हैं।

सीकर नगर परिषद: यहां कांग्रेस ने 65 में से 38 वार्ड जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया है। भाजपा को 22, निर्दलीयों को 4 और रालोपा को 1 सीट मिली है। सभापति पद के लिए कांग्रेस की खतीजा बानो और भाजपा की कंचन खड़ोलिया आमने-सामने हैं। बहुमत के आंकड़े से कांग्रेस आगे है।

फतेहपुर नगर परिषद: 55 वार्डों वाली परिषद में कांग्रेस के 21, भाजपा के 13 और निर्दलीयों के 21 पार्षद निर्वाचित हुए हैं। सभापति पद पर भाजपा की अंजू भिंडा और कांग्रेस की निकिता रिणवा के बीच मुकाबला है। दोनों दल बहुमत से दूर हैं, ऐसे में निर्दलीय पार्षदों का समर्थन महत्वपूर्ण होगा।

चूरू नगर परिषद: 60 वार्डों में भाजपा के 30, कांग्रेस के 24 और निर्दलीयों के 6 पार्षद हैं। भाजपा के विनय गोयनका और कांग्रेस के संजय भाटी सभापति पद के प्रत्याशी हैं। भाजपा बहुमत के आंकड़े से एक सीट दूर है, इसलिए निर्दलीयों का समर्थन चुनावी गणित में महत्वपूर्ण हो सकता है।

सुजानगढ़ नगर परिषद: यहां भाजपा ने 60 में से 31 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया है। कांग्रेस के 9 और निर्दलीयों के 20 पार्षद हैं। इस स्थिति में भाजपा बहुमत के आंकड़े से आगे है।

सरदारशहर नगर परिषद: यहां 55 वार्डों में भाजपा के 25, कांग्रेस के 22 और निर्दलीयों के 8 पार्षद हैं। भाजपा और कांग्रेस दोनों बहुमत से दूर हैं। ऐसे में निर्दलीय पार्षद सभापति चुनाव के समीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

नगर पालिकाओं में भी कई जगह निर्दलीयों की भूमिका

नगर परिषदों के अलावा तीनों जिलों की नगर पालिकाओं में भी कई जगह अध्यक्ष पद का चुनाव बहुमत के गणित और निर्दलीय पार्षदों के समर्थन पर निर्भर है। वहीं कुछ नगर पालिकाओं में किसी दल ने स्पष्ट बहुमत हासिल किया है या अध्यक्ष निर्विरोध निर्वाचित हो चुका है।

झुंझुनूं जिले की खेतड़ी नगरपालिका में भाजपा की गीता सैनी निर्विरोध अध्यक्ष निर्वाचित हो चुकी हैं। सीकर जिले की पलसाना नगरपालिका में भी भाजपा के नरेश कुमावत निर्विरोध अध्यक्ष चुने जा चुके हैं।

सीकर जिले में श्रीमाधोपुर नगरपालिका में भाजपा ने 35 में से 19 वार्ड जीतकर बहुमत हासिल किया है। इसके अलावा कई अन्य निकायों में किसी एक दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है, जिससे निर्दलीय पार्षदों की भूमिका महत्वपूर्ण बनी हुई है।

चूरू जिले में रतननगर और साहवा में कांग्रेस को बहुमत मिला है, जबकि तारानगर में भाजपा ने बहुमत हासिल किया है। वहीं अन्य कई निकायों में अध्यक्ष पद के लिए समर्थन जुटाने का गणित मतदान के समय सामने आएगा।

21 सितंबर को खुलेगा शहर की सरकार का पत्ता

सीकर, चूरू और झुंझुनूं की नगर परिषदों और नगर पालिकाओं में अब सबसे ज्यादा नजर उन निकायों पर है, जहां भाजपा या कांग्रेस बहुमत के आंकड़े से दूर हैं। परिणामों के बाद शुरू हुई बाड़ेबंदी और समर्थन जुटाने की कवायद के बीच अंतिम फैसला पार्षदों के मतदान से होगा।

21 सितंबर को होने वाले अध्यक्ष और सभापति पद के चुनाव के बाद ही स्पष्ट होगा कि किस निकाय में भाजपा, कांग्रेस या किसी अन्य समूह के समर्थन से शहरी सरकार का गठन होता है।

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