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खंडेला चेयरमैन चुनाव में नया मोड़: कांग्रेस के रामगोपाल और निर्दलीय युधिष्ठिर सैनी ने नामांकन वापस लिया


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खंडेला चेयरमैन चुनाव में नया मोड़: कांग्रेस के रामगोपाल और निर्दलीय युधिष्ठिर सैनी ने नामांकन वापस लिया

अब आबिदा बानो-बनवारी लाल में सीधा मुकाबला, निर्दलीय तय करेंगे ताज

खंडेला : नगर पालिका चेयरमैन पद के चुनाव में शुक्रवार को नया मोड़ आ गया। वार्ड 31 से कांग्रेस पार्षद रामगोपाल ने चेयरमैन पद के लिए दाखिल अपना नामांकन वापस ले लिया। वहीं निर्दलीय पार्षद युधिष्ठिर सैनी ने भी नामांकन वापस ले लिया। नाम वापसी के बाद अब चेयरमैन पद के लिए कांग्रेस की ओर से वार्ड 25 की पार्षद आबिदा बानो और भाजपा की ओर से बनवारी लाल सैनी मैदान में हैं।

9 निर्दलीय पार्षदों पर टिकी निगाहें

खंडेला नगर पालिका के 40 वार्डों के चुनाव परिणाम में कांग्रेस के 18, भाजपा के 13 और 9 निर्दलीय पार्षद निर्वाचित हुए हैं। चेयरमैन पद के लिए 21 पार्षदों का समर्थन जरूरी है। ऐसे में कांग्रेस को बहुमत के लिए 3 और भाजपा को 8 पार्षदों के समर्थन की जरूरत है।बहुमत के इन आंकड़ों के चलते 9 निर्दलीय पार्षदों की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। दोनों प्रमुख दलों के सामने निर्दलीय पार्षदों का समर्थन जुटाने की चुनौती है। ऐसे में उनके रुख से चेयरमैन चुनाव का समीकरण प्रभावित हो सकता है।

नाम वापसी के बाद मुकाबला दो प्रत्याशियों के बीच

नामांकन वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब चेयरमैन पद का मुकाबला कांग्रेस की आबिदा बानो और भाजपा के बनवारी लाल सैनी के बीच है। दोनों दल अपने पक्ष में पार्षदों का समर्थन जुटाने में लगे हैं। खासतौर पर निर्दलीय पार्षदों के रुख पर राजनीतिक दलों और स्थानीय लोगों की निगाहें टिकी हैं।

खंडेला में कांग्रेस का रहा है दबदबा

स्थानीय चुनावी इतिहास के अनुसार, वर्ष 1995 से 2000 के कार्यकाल को छोड़कर खंडेला नगर पालिका में अध्यक्ष पद कांग्रेस के पास रहा है। कांग्रेस की स्थानीय राजनीति में पूर्व केंद्रीय मंत्री महादेव सिंह खंडेला की भूमिका भी लंबे समय से महत्वपूर्ण रही है। इस बार कांग्रेस 18 सीटों के साथ नगर पालिका में सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आई है। अब चेयरमैन चुनाव में बहुमत जुटाने की रणनीति और निर्दलीय पार्षदों के रुख से बोर्ड गठन की तस्वीर साफ होगी।

पुराने इतिहास पर टिकी नजर

40 सदस्यीय नगर पालिका में कांग्रेस बहुमत के आंकड़े से तीन सीट दूर है, जबकि भाजपा को बहुमत तक पहुंचने के लिए आठ पार्षदों का समर्थन चाहिए। ऐसे में चुनावी आंकड़ों के बीच निर्दलीय पार्षदों की भूमिका निर्णायक महत्व की हो गई है। अब देखना होगा कि चेयरमैन चुनाव में पार्षदों का समर्थन किसके पक्ष में जाता है और खंडेला नगर पालिका का अगला बोर्ड किस राजनीतिक समीकरण के साथ बनता है।

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