हज समिति की जमीन बेचनें के आरोप में आजम खान समेत 5 लोगों के विरुद्ध विजिलेंस ने FIR दर्ज कराई
हज समिति की जमीन बेचनें के आरोप में आजम खान समेत 5 लोगों के विरुद्ध विजिलेंस ने FIR दर्ज कराई
लखनऊ : यूपी की राजधानी लखनऊ में स्थित हज समिति की जमीन को बेंचने में धांधली करने के आरोप में सपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री आजम खान समेत 5 लोगों के विरुद्ध विजिलेंस ने एफ आई आर दर्ज करवाई है। इससे आजम खान की मुश्किलें फिर बढ़ गई हैं।
सपा के वरिष्ठ नेता आजम खान की मुश्किलें थमने का नाम नहीं ले रही हैं। इसकी वजह यूपी में भाजपा सरकार के सीएम योगी आदित्यनाथ की आजम खान से एक तरह से व्यक्तिगत दुश्मनी का होना और खुन्नस का होना है।आजम खान जनाधार वाले और जनता के बीच मजबूत पैठ रखने वाले राजनेता हैं। योगी आदित्यनाथ की यह सोंच है कि अगर आजम खान को तमाम तरह के मामलों में फंसाकर जेल में बंद रखा जाए,तो इससे वे जनता से कट जाएंगे और उनका जनाधार भी खत्म हो जाएगा।आजम के जेल में बंद होने से उनके समर्थकों और उनसे जुड़ी जनता का मनोबल टूट जाएगा,जिससे जनता उनसे दूर हो जाएगी। इससे यूपी में आजम खान के इशारे या उनकी एक आवाज पर वोट डालने वाले मतदाताओं को बड़ा धक्का लगेगा और वह मजबूर होकर आजम खान से किनारा कर लेंगे।इससे उनसे जुड़े वोटर नए राजनीतिक दल में ठिकाना ढूढ़ेंगे और ऐसी स्थिति में सपा भाजपा से मुकाबला नहीं कर पाएगी । भाजपा यूपी में लंबे समय तक राज्य की सत्ता में बैठने में कामयाब रहेगी। यही वजह है कि योगी आदित्यनाथ के इशारे पर आजम खान उनकी पत्नी तंजीन फातमा और बेटे अब्दुल्ला आजम के खिलाफ तमाम मुकदमें दर्ज करवाए गए और उनको जेल भी जाना पड़ा।आजम खान द्वारा रामपुर में बनाई गई जौहर यूनिवर्सिटी को खत्म करने के भी प्रयास हुए। ई डी और इनकम टैक्स की रेड भी डलवाई गई। लेकिन आजम खान इससे नहीं डरे और डटे रहे।आजम खान के ऊपर दर्ज हुए तमाम मुकदमें खत्म भी हो गए हैं।लेकिन वह अब बचे हुए 2- 3 मामलों में अदालत का सामना कर रहे हैं और जेल में बंद हैं।
आजम खान किसी भी सूरत में जेल से बाहर नहीं आने पाएं, इसलिए योगी सरकार के इशारे पर आजम खान के खिलाफ मुकदमें दर्ज होते रहते हैं।आजम खान के खिलाफ हज समिति की जमीन बेंचने में धांधली करने के आरोप में विजिलेंस ने जो एफ आई आर दर्ज करवाई है,वह भी इसी कड़ी का एक हिस्सा है।आजम खान को जबरिया इस मामले में फंसाया गया है। आजम खान को जबरिया इस मामले में फंसाने को इस तरह से समझा जा सकता है कि आजम खान अखिलेश यादव की सरकार में मंत्री थे और वह 2017 में योगी सरकार के बनने से पूर्व मंत्री के साथ यूपी में हज समिति के अध्यक्ष भी थे। 2017 में यूपी में भाजपा की सरकार बनी और योगी आदित्यनाथ सीएम बने। लेकिन योगी आदित्यनाथ ने अपना 5 वर्ष का कार्यकाल पूरा कर लिया और उनको हज समिति की जमीन बेंचने में धांधली की खबर नहीं पता चली।योगी आदित्यनाथ को गड़बड़ी की खबर मई 2024 में तब पता चली,जब उन्होंने आजम खान को राजनीतिक रूप से खत्म करने का बीड़ा उठा रखा था और आजम खान के खिलाफ उनके इशारे पर मुकदमें दर मुकदमें दर्ज हो रहे थे।योगी आदित्यनाथ ने 3 मई 2024 को आजम खान के खिलाफ हज समिति की जमीन बेंचने में धांधली करने के खिलाफ विजिलेंस जाँच बैठाई। अब जाकर यह जाँच पूरी हुई है और विजिलेंस ने आजम खान समेत 5 लोगों के खिलाफ एफ आई आर दर्ज करवाई है।
विजिलेंस ने एफ आई आर में आजम खान तत्कालीन अध्यक्ष हज समिति , तत्कालीन सचिव हज समिति लईक अहमद,तत्कालीन सचिव डा.एम ए ए खान , अमिश डेवलेपर्स से जुड़े मोहम्मद अयूब और मुस्तकीम अहमद को नामजद करते हुए आरोपी बनाया है। इनके ऊपर आरोप लगाया गया है कि इन्होंने हज हॉउस निर्माण करने के लिए राज्य हज समिति की ऐशबाग स्थित 60 हजार वर्ग फिट जमीन की बिक्री में नियमों की अनदेखी करते हुए कथित रूप से अमिश डेवलपर्स के पक्ष में बैनामा करवाया। इससे हज समिति को लगभग 2.08 करोड़ रुपए की राजस्व की हानि हुई।
एफ आई आर में आरोप लगाया गया है कि तत्कालीन हज समिति के पदाधिकारियों ने अपने पद का दुरूपयोग करते हुए निजी फर्म के साथ कथित साँठ गाँठ कर उसे अनुचित लाभ पहुंचाया।
विजिलेंस ने अपनी जाँच में जमीन की रजिस्ट्री,टेंडर, समिति के प्रस्ताव और संबंंधित राजस्व अभिलेखों की जाँच की और उसने पाया कि इस मामले में गड़बड़ी हुई है। इसके बाद इस मामले में धोखाधड़ी ,आपराधिक साजिश और भ्र्ष्टाचार निवारण अधिनियम में विभिन्न धाराओं में इन लोगों के खिलाफ लखनऊ विजिलेंस के इंस्पेक्टर ध्रुव चंद्र मौर्य की ओर से एफ आई आर दर्ज करवाई गई। आजम खान के खिलाफ जिस तरह से यूपी सरकार द्वारा लम्बी चुप्पी साधे रहने के बाद अब काफी वक्त बीतने के बाद एफ आई आर दर्ज करवाई गई है,उसको लेकर सवाल उठ रहे हैं।यह आम चर्चा है कि जिस तरह से यह एफ आई आर दर्ज कराई गई है,वह केवल आजम खान को जेल में बंद रखने और उनके राजनीतिक कैरियर को खत्म करने की योगी आदित्यनाथ की चाल है।अगर आजम खान इस मामले में दोषी हैं, तो इतनी देर से और अब यूपी में विधानसभा चुनाव नजदीक होना देखकर आजम खान के विरुद्ध एफ आई आर क्यों दर्ज कराई गई है?
इस एफ आई आर में राजनीतिक नफा – नुकसान का गणित छुपा हुआ है। आजम खान के विरुद्ध एफ आई आर दर्ज होने से अब फिर से उनकी मुश्किलें बढ़ गई हैं।उनकी मुश्किलें खत्म ही नहीं हो रही हैं।
आजम खान चूँकि जेल में बंद हैं, इसलिए विजिलेंस जल्द ही अदालत से अनुमति लेकर उनका बयान लेने के लिए रामपुर जेल जाने की तैयारी कर रही है। इस मामले में बाकी अन्य आरोपियों को विजिलेंस ने नोटिस देकर उनको विजिलेंस दफ्तर में बयान देने के लिए बुलाया है।आजम खान जैसे बड़े राजनेता और उनके साथ अन्य आरोपियों पर केवल 2 करोड़ 8 लाख रुपये की धांधली करने का आरोप आम लोगों के गले के नीचे नहीं उतर पा रहा है और लोगों को इस पर भरोसा नहीं है। लेकिन फिलहाल आजम खान की इस मामले में मुश्किलें कम नहीं होती दिखाई पड़ रही हैं।
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