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शेखावाटी की हवेलियां यूनेस्को की अस्थाई सूची में शामिल, पर्यटन को मिलेगी नई पहचान


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झुंझुनूंटॉप न्यूज़राजस्थानराज्य

शेखावाटी की हवेलियां यूनेस्को की अस्थाई सूची में शामिल, पर्यटन को मिलेगी नई पहचान

महनसर की प्रसिद्ध सोने की दुकान और बिसाऊ की विरासत को भी सूची में शामिल करने की उठी मांग

झुंझुनूं : शेखावाटी की ऐतिहासिक हवेलियों को यूनेस्को विश्व धरोहर की अस्थाई सूची में शामिल किए जाने से क्षेत्र में खुशी का माहौल है। पर्यटन विशेषज्ञ राजेश शर्मा ने इसे महत्वपूर्ण लेकिन प्रारंभिक कदम बताते हुए कहा कि आगे विरासत संरक्षण और पर्यटन विकास के लिए ठोस प्रयास जरूरी हैं।

उन्होंने कहा कि शेखावाटी अपनी भित्ति चित्रकला, स्थापत्य शैली और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के लिए देश-विदेश में प्रसिद्ध है। हवेलियों पर बनाए गए भित्ति चित्र राजस्थान की कला और संस्कृति की अनूठी झलक प्रस्तुत करते हैं। महनसर की विश्व प्रसिद्ध सोने की दुकान भी यदि इस सूची में शामिल होती है तो यह गांव के लिए गौरव और खुशी की बात होगी।

शर्मा ने कहा कि बिसाऊ को भी विश्व धरोहर के मानचित्र पर अलग पहचान दिलाने के प्रयास होने चाहिए। बिसाऊ का गढ़, सिंगतिया की हवेली और यहां की रामलीला इसकी समृद्ध विरासत का हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को स्थानीय नागरिकों के साथ मिलकर क्षेत्र की 662 हवेलियों का दोबारा सर्वे करवाना चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि इनमें से कौन-सी हवेलियां पर्यटकों के लिए खोली जा सकती हैं। केवल हवेलियों की संख्या बढ़ाने से पर्यटन को अपेक्षित लाभ नहीं मिलेगा।

उन्होंने विरासत से जुड़े मंदिरों, कुओं, छतरियों और जोहड़ों के संरक्षण व जीर्णोद्धार की जरूरत भी बताई। उनका कहना है कि इन ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण पारंपरिक निर्माण तकनीक और पुराने स्वरूप के अनुरूप किया जाए, तभी शेखावाटी की विरासत को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकेगा।

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