मासूमों की जान से खिलवाड़! 19 साल पुरानी बस में बच्चों का सफर, फिटनेस-परमिट सालों से खत्म
फतेहपुर में स्कूल वाहनों की लापरवाही पर सवाल: न्यू राजस्थान स्कूल की बस के दस्तावेज 2022 से एक्सपायर होने का दावा, प्रिंस स्कूल की बस रॉन्ग साइड में दौड़ती नजर आई
जनमानस शेखावाटी सवांददाता : आबिद खान दाडून्दा
फतेहपुर : सीकर जिले के फतेहपुर क्षेत्र में स्कूली वाहनों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। जनमानस शेखावाटी न्यूज की ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, मंगलवार को स्कूल बसों की पड़ताल के दौरान ऐसे मामले सामने आए, जिनमें नियमों की अनदेखी का आरोप है। एक ओर न्यू राजस्थान स्कूल की करीब 19 साल पुरानी बस के फिटनेस, परमिट और टैक्स से जुड़े दस्तावेज लंबे समय से समाप्त बताए जा रहे हैं, वहीं प्रिंस सी. सै. स्कूल की बस रॉन्ग साइड में चलती नजर आई।
2022 में खत्म हो चुका फिटनेस, फिर भी सड़क पर बस
रिपोर्ट के मुताबिक न्यू राजस्थान स्कूल के नाम दर्ज बस RJ23PA1358 बच्चों को लेकर संचालित हो रही है। उपलब्ध वाहन विवरण के आधार पर बस का फिटनेस प्रमाण-पत्र 19 अक्टूबर 2022, रूट परमिट 26 अक्टूबर 2022 और रोड टैक्स 31 दिसंबर 2022 को समाप्त होने का दावा किया गया है।
यदि ये दस्तावेज वास्तव में नवीनीकृत नहीं हुए हैं तो मामला बेहद गंभीर है। करीब 19 साल पुराने वाहन का बिना वैध फिटनेस और परमिट के स्कूली बच्चों को लेकर सड़क पर चलना परिवहन नियमों के साथ-साथ बच्चों की सुरक्षा पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है।

रॉन्ग साइड में दौड़ती दिखी प्रिंस स्कूल की बस
इसी पड़ताल के दौरान प्रिंस सी. सै. स्कूल की बस RJ23PB7790 के रॉन्ग साइड में चलने का भी दावा किया गया है। संकरी सड़क पर गलत दिशा से बस के गुजरने की स्थिति में सामने से आने वाले वाहनों से टक्कर का खतरा बना रहता है। स्कूल बसों में बड़ी संख्या में बच्चे सफर करते हैं। ऐसे में यातायात नियमों का उल्लंघन मामूली गलती नहीं माना जा सकता।
अभिभावकों की चिंता बढ़ी, जिम्मेदार विभागों पर सवाल
निजी स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा के लिए अभिभावक भारी फीस खर्च करते हैं। ऐसे में स्कूल वाहनों के फिटनेस, परमिट, बीमा और यातायात नियमों की नियमित जांच की जिम्मेदारी संबंधित विभागों की भी है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि न्यू राजस्थान स्कूल की बस के दस्तावेज 2022 से समाप्त हैं तो इतने लंबे समय तक परिवहन विभाग की निगरानी में यह वाहन कैसे चलता रहा? क्या आरटीओ की फ्लाइंग टीम ने इसकी जांच की या वाहन कभी कार्रवाई के दायरे में नहीं आया?
पुलिस-आरटीओ की कार्रवाई का इंतजार
स्कूली वाहनों से जुड़े इन आरोपों के बाद अब अभिभावकों की नजर परिवहन विभाग और पुलिस की कार्रवाई पर है। संबंधित बसों के दस्तावेज, फिटनेस, बीमा, परमिट और संचालन की मौके पर जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।
साथ ही रॉन्ग साइड में वाहन चलाने के मामले में भी सीसीटीवी या अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की जरूरत है।
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