अगस्त से बारिश नहीं, खेतों में फसलें सूखने लगीं:किसानों के सामने कर्ज और पशुओं के चारे का संकट गहराया
अगस्त से बारिश नहीं, खेतों में फसलें सूखने लगीं:किसानों के सामने कर्ज और पशुओं के चारे का संकट गहराया
सीकर : इलाके में अगस्त से बारिश नहीं हुई है, जिससे खेतों में खड़ी फसलें सूखने लगी हैं। पर्याप्त नमी न मिलने के कारण पौधों के मुरझाने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। उन्हें अब फसल उत्पादन कम होने और कृषि कर्ज चुकाने की फिक्र सता रही है।
किसानों ने बताया कि खेती में बीज, खाद और कीटनाशक पर पहले ही बहुत खर्च हो चुका है। बारिश न होने से फसलें कमजोर पड़ रही हैं। अगर जल्द अच्छी बारिश नहीं हुई, तो उत्पादन में बड़ी कमी आ सकती है। इससे किसानों के लिए बैंक और दूसरे कृषि कर्ज की किस्तें चुकाना मुश्किल हो जाएगा।
बारिश की कमी का असर सिर्फ खेतों तक ही नहीं है, पशुओं के चारे पर भी पड़ रहा है। हरा चारा न मिलने से पशुपालकों की परेशानी बढ़ गई है। सूखे चारे के दाम भी लगातार बढ़ रहे हैं। किसानों का कहना है कि जिस समय पशुओं को सबसे ज्यादा चारे की जरूरत है, उसी समय कीमतें बहुत ऊंची हो गई हैं।
किसानों के सामने अब दोहरी चुनौती है। एक तरफ खेतों में फसलें सूखने वाली हैं, वहीं दूसरी तरफ पशुओं के लिए चारा जुटाना महंगा पड़ रहा है। किसानों ने बताया कि अगर जल्द अच्छी बारिश नहीं हुई, तो फसल उत्पादन के साथ ग्रामीण परिवारों की आर्थिक हालत पर भी बुरा असर पड़ सकता है।
किसानों ने प्रशासन और सरकार से मांग की है कि फसल की स्थिति का सर्वे कराया जाए। साथ ही, किसानों को राहत दी जाए और पशुओं के लिए पर्याप्त चारा उचित दामों पर उपलब्ध कराया जाए।
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