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झुंझुनूं के वार्ड-38 में अपनों से घिरी कांग्रेस, भाजपा बाहर:चार निर्दलीय बिगाड़ रहे जीत के समीकरण, प्रत्याशियों के बीच कांटे का मुकाबला


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झुंझुनूं के वार्ड-38 में अपनों से घिरी कांग्रेस, भाजपा बाहर:चार निर्दलीय बिगाड़ रहे जीत के समीकरण, प्रत्याशियों के बीच कांटे का मुकाबला

झुंझुनूं के वार्ड-38 में अपनों से घिरी कांग्रेस, भाजपा बाहर:चार निर्दलीय बिगाड़ रहे जीत के समीकरण, प्रत्याशियों के बीच कांटे का मुकाबला

झुंझुनूं : नगर परिषद चुनाव में वार्ड-38 इस बार सबसे चर्चित सीट बन गया है। भाजपा के चुनाव मैदान से बाहर रहने के बाद भी यहां प्रत्याशियों में कड़ी टक्कर है। कांग्रेस ने पूर्व पालिकाध्यक्ष तैय्यब अली को प्रत्याशी बनाया है, लेकिन उन्हें चुनौती कांग्रेस की ही राजनीतिक पृष्ठभूमि से जुड़े निर्दलीय प्रत्याशियों से मिल रही है।

कांग्रेस प्रत्याशी तैय्यब अली के सामने पूर्व कांग्रेस जिला प्रवक्ता एडवोकेट शहबाज फारूकी निर्दलीय मैदान में हैं। इनके अलावा एडवोकेट इरशाद फारूकी, कांग्रेस से जुड़े आजम भाटी की बहू कोमल निर्बान और रिजवाना भी निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ रही हैं। कुल पांच प्रत्याशियों के मैदान में होने से मुकाबला बहुकोणीय हो गया है।

निवर्तमान सभापति नगमा बानो का निर्वाचन क्षेत्र

वार्ड-38 इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह निवर्तमान सभापति नगमा बानो का निर्वाचन क्षेत्र रहा है। इस बार नगमा बानो चुनाव नहीं लड़ रही हैं। सभापति का पद सामान्य वर्ग के लिए खुलने के बाद कांग्रेस ने उनके ससुर और पूर्व पालिकाध्यक्ष तैय्यब अली पर भरोसा जताया है। पार्टी को उनके राजनीतिक अनुभव, पुराने जनाधार और संगठन में पकड़ का लाभ मिलने की उम्मीद है।

हालांकि, तैय्यब अली के लिए राह आसान नहीं मानी जा रही है। उनके सामने मैदान में उतरे कई निर्दलीय प्रत्याशियों की जड़ें कांग्रेस की राजनीति से जुड़ी रही हैं। ऐसे में मुकाबला केवल पार्टी के चुनाव चिह्न का नहीं, बल्कि व्यक्तिगत जनाधार, संपर्क और स्थानीय प्रभाव का भी बन गया है।

वार्ड 38 में चुनावी चर्चा करते लोग।
वार्ड 38 में चुनावी चर्चा करते लोग।

दो वार्डों के हिस्सों को मिलाकर बनाया नया वार्ड 38

परिसीमन के बाद वार्ड-38 का सियासी गणित भी पूरी तरह बदल गया है। पहले यह क्षेत्र वार्ड-34 और वार्ड-40 में बंटा हुआ था। दोनों वार्डों के हिस्सों को मिलाकर नया वार्ड-38 बनाया गया है। पुराने वार्ड-34 से कांग्रेस की जुबेदा पार्षद थीं, जबकि वार्ड-40 से नगमा बानो निर्वाचित हुई थीं। अब दोनों क्षेत्रों के एक वार्ड में आने से पुराने समीकरण भी नए सिरे से बन रहे हैं।

भाजपा ने नहीं उतारा अपना प्रत्याशी

अल्पसंख्यक बहुल इस वार्ड में भाजपा ने इस बार प्रत्याशी नहीं उतारा है। ऐसे में चुनावी मुकाबला मुख्य रूप से कांग्रेस प्रत्याशी और कांग्रेस की पृष्ठभूमि वाले निर्दलीय चेहरों के बीच दिखाई दे रहा है। भाजपा के मैदान से बाहर रहने से मुकाबले का पूरा फोकस इन्हीं प्रत्याशियों पर केंद्रित हो गया है।

कांग्रेस के तय्यब अली और कांग्रेस से बागी आजम भाटी की बहू में कड़ा मुकाबला है।
कांग्रेस के तय्यब अली और कांग्रेस से बागी आजम भाटी की बहू में कड़ा मुकाबला है।

2211 मतदाताओं वाले वार्ड में बिरादरी का गणित

करीब 2211 मतदाताओं वाले वार्ड में बिरादरी का गणित भी चुनाव परिणाम में अहम भूमिका निभा सकता है। चोपदार समाज से कोमल निर्बान और रिजवाना, जबकि पीरजादगान समाज से एडवोकेट शहबाज फारूकी और एडवोकेट इरशाद फारूकी मैदान में हैं। ऐसे में बिरादरी के वोटों का बंटवारा किस तरह होता है, यह चुनाव परिणाम को प्रभावित करने वाला महत्वपूर्ण पहलू रहेगा।

वार्ड में 1121 पुरुष और 1090 महिला मतदाता हैं। पांच प्रत्याशियों में कांग्रेस का एक और चार निर्दलीय हैं, जबकि भाजपा का कोई प्रत्याशी नहीं है। राजनीतिक पृष्ठभूमि, बदले परिसीमन और बिरादरी समीकरणों के चलते वार्ड-38 के नतीजे पर पूरे नगर परिषद चुनाव के दौरान खास नजर रहेगी।

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