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सिंगरावट का 350 साल पुराना गोपीनाथ मंदिर:नागा साधुओं ने की थी प्राण-प्रतिष्ठा; औरंगजेब के शासन में वृंदावन से लाई गई दुर्लभ मूर्ति


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सिंगरावट का 350 साल पुराना गोपीनाथ मंदिर:नागा साधुओं ने की थी प्राण-प्रतिष्ठा; औरंगजेब के शासन में वृंदावन से लाई गई दुर्लभ मूर्ति

सिंगरावट का 350 साल पुराना गोपीनाथ मंदिर:नागा साधुओं ने की थी प्राण-प्रतिष्ठा; औरंगजेब के शासन में वृंदावन से लाई गई दुर्लभ मूर्ति

धोद : धोद इलाके के सिंगरावट गांव में भगवान गोपीनाथ का 350 साल पुराना मंदिर है। जन्माष्टमी पर मंदिर को खास तौर पर सजाया जाता है और आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं।

वृंदावन से लाई गई थी प्रतिमा

मंदिर के पुजारी परिवार के सदस्य मोनू पुजारी ने बताया कि औरंगजेब के समय वृंदावन की सात दुर्लभ मूर्तियों को बचाने के लिए उनकी हजारों प्रतिकृतियां बनाई गई थीं। इन्हीं में से एक दिव्य प्रतिमा को नागा साधु सिंगरावट लाए थे। इसके बाद यहां काले पत्थर से बनी ठाकुर जी और महारानी की मूर्तियों की प्राण-प्रतिष्ठा की गई।

मंदिर की बनावट भी खास है। भारी लकड़ी के मजबूत किले जैसे ढांचे और मजबूत सिंहद्वार इसकी प्राचीन स्थापत्य शैली को दिखाते हैं। मंदिर में स्थापित मूर्तियों की अलौकिक छवि आज भी श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है।

दिव्य प्रतिमा को नागा साधु सिंगरावट लाए थे।
दिव्य प्रतिमा को नागा साधु सिंगरावट लाए थे।

मंदिर परिसर में 300 साल पुराना पेड़

मंदिर की दीवारों पर बने पुराने चित्र इसकी ऐतिहासिक पहचान को और खास बनाते हैं। मंदिर के अंदर के चित्र शेखावाटी की पारंपरिक भित्तिचित्र कला से जुड़े हुए बताए जाते हैं। मंदिर परिसर में बरगद और पीपल का एक जुड़ा हुआ पेड़ भी है, जो श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। स्थानीय मान्यता के अनुसार, यह पेड़ 300 साल से भी ज्यादा पुराना है और सदियों से मंदिर के इतिहास का गवाह रहा है।

नागा साधुओं ने की थी मंदिर की प्रतिष्ठा

मोनू पुजारी बताते हैं कि नागा साधुओं ने मंदिर की स्थापना और प्राण-प्रतिष्ठा की थी। कुछ समय बाद मंदिर की सेवा का जिम्मा सिंगरावट के पुजारी परिवार को सौंप दिया गया। तब से इस परिवार की कई पीढ़ियां लगातार ठाकुर जी की पूजा और सेवा कर रही हैं।

राजीव गांधी भी कर चुके हैं दर्शन इस ऐतिहासिक मंदिर के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी भी यहां दर्शन करने पहुंच चुके हैं। इससे मंदिर की ऐतिहासिक पहचान और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। जन्माष्टमी के अवसर पर गोपीनाथ जी मंदिर को आकर्षक ढंग से सजाया जाता है। विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक आयोजन होते हैं। आसपास के क्षेत्र के श्रद्धालु बड़ी संख्या में यहां पहुंचकर ठाकुर जी के दर्शन करते हैं।

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