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नानीबाई रो मायरो कथा का श्रद्धा-भक्ति के साथ समापन:भगवान के मायरा भरने की झांकी ने मोहा मन, 108 मीटर लंबी चुनरी बनी आकर्षण


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नानीबाई रो मायरो कथा का श्रद्धा-भक्ति के साथ समापन:भगवान के मायरा भरने की झांकी ने मोहा मन, 108 मीटर लंबी चुनरी बनी आकर्षण

नानीबाई रो मायरो कथा का श्रद्धा-भक्ति के साथ समापन:भगवान के मायरा भरने की झांकी ने मोहा मन, 108 मीटर लंबी चुनरी बनी आकर्षण

रघुनाथगढ़ : श्रीसियपिय मिलन महोत्सव के तहत हुई नानीबाई रो मायरो कथा का समापन श्रद्धा और भक्ति के साथ हुआ। कथा के आखिरी दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु कार्यक्रम में पहुंचे। इस दौरान कथा स्थल पर सजी आकर्षक झांकियां श्रद्धालुओं के लिए खास आकर्षण रहीं।

कथावाचक राधाकृष्णदास महाराज ने नानीबाई रो मायरो प्रसंग को भावपूर्ण तरीके से बताया। उन्होंने कहा कि धन-संपत्ति का घमंड नहीं करना चाहिए। व्यक्ति की आर्थिक स्थिति चाहे जैसी हो, उसे जरूरतमंदों की मदद और सम्मान करना चाहिए। महाराज ने यह भी कहा कि भगवान के प्रति सच्ची आस्था और भक्ति ही जीवन का सबसे बड़ा सहारा है।

कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं पर आधारित भव्य झांकियां दिखाई गईं। आयोजन में भगवान कृष्ण द्वारा मायरा भरने का प्रसंग खास तौर पर दिखाया गया, जिसे देखकर श्रद्धालु भावुक हो गए। मायरे के समय पंडाल जयकारों से गूंज उठा।

इस आयोजन में 108 मीटर लंबी चुनरी को मायरे के रूप में दिखाया गया। श्रद्धालुओं ने चुनरी के साथ नाचते हुए खुशी जताई। वहीं, अलग-अलग धार्मिक प्रसंगों पर आधारित झांकियों में नानीबाई, श्रीकृष्ण, राधा और रुक्मिणी के स्वरूपों ने सभी का ध्यान खींचा।

इस मौके पर राजेंद्रदास देवाचार्य महाराज समेत कई संत-महात्माओं ने श्रद्धालुओं को आशीर्वाद दिया। कथा के समापन पर आयोजकों और संतों को सम्मानित किया गया। पूरे कार्यक्रम के दौरान भजन-कीर्तन और धार्मिक जयकारों से माहौल भक्ति से भरा रहा।

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