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शहीद भाई की प्रतिमा पर बहन ने बांधी राखी:चूरू में शहीद कमल सिंह तंवर को याद कर नम हुईं आंखें


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शहीद भाई की प्रतिमा पर बहन ने बांधी राखी:चूरू में शहीद कमल सिंह तंवर को याद कर नम हुईं आंखें

शहीद भाई की प्रतिमा पर बहन ने बांधी राखी:चूरू में शहीद कमल सिंह तंवर को याद कर नम हुईं आंखें

जनमानस शेखावाटी सवांददाता : मोहम्मद अली पठान

चूरू : चूरू जिले के बालरासर तंवरान गांव में रक्षाबंधन के अवसर पर भावुक कर देने वाला दृश्य सामने आया। शहीद कमल सिंह तंवर की बहन सोनू कंवर ने अपने भाई की प्रतिमा पर राखी बांधी। भाई की कलाई की जगह प्रतिमा पर राखी बांधते समय उनकी आंखें नम हो गईं। शहीद कमल सिंह तंवर एसडब्ल्यूआर 68 आर्मड रेजीमेंट के जवान थे और 14 अप्रैल 2024 को देश की रक्षा करते हुए वीरगति को प्राप्त हुए थे।

राखी बांधने के बाद सोनू कंवर ने कहा कि उन्हें अपने भाई की शहादत पर गर्व है।
राखी बांधने के बाद सोनू कंवर ने कहा कि उन्हें अपने भाई की शहादत पर गर्व है।

शहादत पर गर्व, सीमा पर तैनात जवानों के लिए मांगी सलामती

राखी बांधने के बाद सोनू कंवर ने कहा कि उन्हें अपने भाई की शहादत पर गर्व है। उन्होंने सीमा पर तैनात सभी फौजी भाइयों की सलामती के लिए दुआ मांगी। उन्होंने कहा कि कमल सिंह ने देश की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया और वह आज भी उन्हें अमर मानती हैं। सोनू ने कहा कि उनका भाई सिर्फ उनका नहीं, बल्कि देश की करोड़ों बहनों का भाई था।

22 साल की उम्र में देश के लिए दिया बलिदान

शहीद कमल सिंह के पिता रतन सिंह ने बताया कि उनके बेटे ने महज 22 वर्ष की उम्र में अपनों को छोड़कर देश के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी। कमल सिंह 13 दिसंबर 2019 को सेना में भर्ती हुए थे। अंतिम समय में वह जम्मू-कश्मीर के कालू चक्क में 68 आर्मड रेजीमेंट में तैनात थे।

बचपन से था फौज में जाने का सपना

रतन सिंह के अनुसार कमल सिंह बचपन से ही सेना में जाने के इच्छुक थे। वह मिलनसार और मेहनतकश व्यक्तित्व के धनी थे। अविवाहित कमल सिंह दो भाइयों और दो बहनों में दूसरे नंबर के थे। उनके बाद एक बहन और एक भाई हैं।

शेखावाटी में शहीदों की प्रतिमाओं पर निभती है राखी की रस्म

शेखावाटी अंचल देश को बड़ी संख्या में सैनिक और शहीद देने के लिए जाना जाता है। यहां रक्षाबंधन का पर्व शहीद परिवारों के लिए भावनाओं से जुड़ा अवसर होता है। कई शहीदों की बहनें अपने भाइयों को खोने के बावजूद उन्हें अमर मानते हुए उनकी आदमकद प्रतिमाओं पर राखी बांधती हैं। यह परंपरा भाई-बहन के रिश्ते के साथ देश के लिए दिए गए सर्वोच्च बलिदान की याद को भी जीवंत रखती है।

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