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एथेनॉल की दौड़ में महंगी हुई मिठास, चीनी पहली बार ₹60 के पार


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एथेनॉल की दौड़ में महंगी हुई मिठास, चीनी पहली बार ₹60 के पार

गन्ना पेट्रोल में गया तो रसोई में बढ़ी मिठास की कीमत, त्योहारों से पहले महंगाई की नई मार, कारोबारियों का कहना... अभी और बढ़ सकते हैं दाम, आगामी महीनों में रक्षाबंधन, गणेश चतुर्थी, जन्माष्टमी, दीवाली जैसे त्योहार

जयपुर : त्योहारों के मौसम से पहले आम लोगों की रसोई पर महंगाई का असर साफ दिखाई देने लगा है। पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण बढ़ाने की नीति के कारण चीनी की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। थोक बाजार में चीनी के दाम तीन साल में करीब 47 रुपए प्रति किलो से बढ़कर 58.50 से 60 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गए हैं, जबकि खुदरा बाजार में उपभोक्ताओं को 61 रुपए या उससे अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है।

कारोबारियों का कहना है कि यह पहली बार है जब चीनी के दाम इतने ऊंचे स्तर पर पहुंचे हैं और आने वाले महीनों में इनमें और बढ़ोतरी की संभावना बनी हुई है। रक्षाबंधन, जन्माष्टमी, गणेश चतुर्थी और दीपावली जैसे त्योहारों के कारण मांग बढ़ने से बाजार पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।

एथेनॉल उत्पादन का असर

सरकार पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण को बढ़ावा दे रही है। एथेनॉल मुख्य रूप से गन्ने के रस और शीरे से तैयार होता है। चीनी मिलों द्वारा गन्ने का अधिक उपयोग एथेनॉल उत्पादन में किए जाने से चीनी बनाने के लिए उपलब्ध कच्चे माल में कमी आई है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, जब तक एथेनॉल नीति और चीनी आपूर्ति के बीच संतुलन नहीं बनाया जाता, तब तक कीमतों में राहत की संभावना कम है।

मिठाइयों और घरेलू बजट पर असर

चीनी की कीमत बढ़ने से मिठाई उद्योग की उत्पादन लागत भी बढ़ रही है। हलवाइयों और कारोबारियों का कहना है कि इसका सीधा असर उपभोक्ताओं पर पड़ेगा और त्योहारों के दौरान मिठाइयां महंगी हो सकती हैं। यदि यही स्थिति बनी रही तो आने वाले समय में चीनी के दाम और बढ़ सकते हैं।

आंकड़ों में चीनी और एथेनॉल का असर

  • चीनी के दाम: थोक बाजार में करीब ₹58.50–60 प्रति किलो, खुदरा बाजार में करीब ₹61 प्रति किलो तक।
  • 15 दिन में बढ़ोतरी: हालिया रिपोर्टों के अनुसार कुछ बाजारों में चीनी के दाम करीब ₹17 प्रति किलो तक बढ़े हैं।
  • 2021-22 में चीनी उत्पादन: करीब 357.60 लाख टन
  • 2022-23 में उत्पादन: करीब 328.15 लाख टन
  • 2023-24 में उत्पादन: करीब 319.64 लाख टन
  • 2025-26 में 15 अप्रैल तक उत्पादन: करीब 273.90 लाख टन
  • 2025-26 में गन्ने की पेराई: करीब 2,865.21 लाख टन
  • औसत चीनी रिकवरी: करीब 9.56%
  • 2025-26 में एथेनॉल के लिए डायवर्ट होने वाली चीनी: उद्योग अनुमानों के अनुसार करीब 31–35 लाख टन
  • एथेनॉल ब्लेंडिंग: 2024-25 में पेट्रोल में 19.24% एथेनॉल मिश्रण हासिल हुआ, जबकि 2025-26 के लिए 20% का लक्ष्य रखा गया है।
  • सरकार की मौजूदा चिंता: रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची चीनी कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार एथेनॉल के लिए गन्ने के इस्तेमाल को सीमित करने और चीनी की घरेलू उपलब्धता बढ़ाने जैसे विकल्पों पर विचार कर रही है।

राजस्थान की निर्भरता

राजस्थान में चीनी उत्पादन बहुत कम होने के कारण राज्य को अपनी आवश्यकता के लिए अन्य राज्यों पर निर्भर रहना पड़ता है। उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात, बिहार और हरियाणा जैसे राज्यों से चीनी की आपूर्ति होती है। यदि राष्ट्रीय स्तर पर उत्पादन में कमी आती है, तो राजस्थान में कीमतों पर इसका प्रभाव और अधिक देखने को मिल सकता है।

राष्ट्रीय उत्पादन में गिरावट

राष्ट्रीय स्तर पर भी चीनी उत्पादन में कमी दर्ज की गई है। प्रमुख उत्पादक राज्यों में उत्पादन घटने से बाजार में आपूर्ति प्रभावित हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि उत्पादन और मांग के बीच अंतर बढ़ता रहा, तो आने वाले महीनों में चीनी के दाम और बढ़ सकते हैं।

त्योहारी सीजन के बीच बढ़ती चीनी कीमतें आम परिवारों के बजट के साथ-साथ मिठाई उद्योग के लिए भी चिंता का विषय बनती जा रही हैं।

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