थार की पारंपरिक जल प्रबंधन प्रणालियां वैश्विक जलवायु चुनौतियों का समाधान बन सकती हैं : अर्जुन राम मेघवाल
थार की पारंपरिक जल प्रबंधन प्रणालियां वैश्विक जलवायु चुनौतियों का समाधान बन सकती हैं : अर्जुन राम मेघवाल
जनमानस शेखावाटी सवांददाता : मोहम्मद अली पठान
चूरू : केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल की पहल पर गंगनहर शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में रविवार को चूरू में यूएनसीसीडी कोप-17 प्री-कोप संवाद का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में थार क्षेत्र की जलवायु सहनशीलता, भूमि पुनर्स्थापन और सतत जल प्रबंधन पर विशेषज्ञों ने विस्तृत मंथन किया।
केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि गंगनहर केवल सिंचाई परियोजना नहीं, बल्कि पश्चिमी राजस्थान के सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय परिवर्तन की ऐतिहासिक धरोहर है। उन्होंने कहा कि थार की पारंपरिक जल एवं भूमि प्रबंधन प्रणालियां आज वैश्विक जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का प्रभावी समाधान बन सकती हैं। विज्ञान, संस्कृति और जनभागीदारी के समन्वय से ही भावी पीढ़ियों के लिए सुरक्षित एवं समृद्ध भविष्य का निर्माण संभव है।
कार्यक्रम में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, भारतीय मौसम विज्ञान विभाग, इसरो, सीआईएएच, आईजीएफआरआई, एएफआरआई, डब्ल्यूआईआई सहित विभिन्न संस्थानों के वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने भूमि पुनर्स्थापन, जल सुरक्षा, जैव विविधता, गोडावण संरक्षण, जलवायु-अनुकूल कृषि, घासभूमि संरक्षण तथा उपग्रह आधारित भूमि परिवर्तन विश्लेषण जैसे विषयों पर अपने विचार साझा किए।
इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री ने अर्द्ध-शुष्क क्षेत्रों की सामाजिक एवं पारिस्थितिक विरासत पर आधारित विशेष कलाकृति का लोकार्पण भी किया। कार्यक्रम में विभिन्न केंद्रीय एवं राज्य स्तरीय संस्थानों के अधिकारी, वैज्ञानिक, शोधकर्ता, जनप्रतिनिधि, विद्यार्थी तथा पर्यावरण संरक्षण से जुड़े बड़ी संख्या में प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
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