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हाइवे पर पुलिस ने लगाए ‘पत्थर’ खाकी की मनमानी, आम गाड़ियों पर सख्ती और बालवाहिनियों पर मेहरबानी! स्कूल बस ने मासूम को उतारा, बाइक ने मारी टक्कर, FIR दर्ज


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हाइवे पर पुलिस ने लगाए ‘पत्थर’ खाकी की मनमानी, आम गाड़ियों पर सख्ती और बालवाहिनियों पर मेहरबानी! स्कूल बस ने मासूम को उतारा, बाइक ने मारी टक्कर, FIR दर्ज

क्या बीच सड़क पर पत्थर डालकर चालान काटने वाली कोतवाली पुलिस रसूखदारो आगे नतमस्तक हैं..? हेलमेट पर सख्ती तो रसूखदारों पर भक्ति, आखिर क्यों? किसके दबाव में कोतवाल..?

जनमानस शेखावाटी सवांददाता : अनिल शेखीसर

फतेहपुर : फतेहपुर कस्बे में कोतवाली पुलिस इन दिनों सोशल मीडिया पर अपनी ‘अनोखी इंजीनियरिंग’ के लिए खूब वाह-वाही बटोर रही है। दिनेश रिपोर्टर नाम के पेज पर अपलोड एक वीडियो में पुलिस द्वारा बीच सड़क पर पत्थरों का जाल बिछाकर आमजन के साथ जानलेवा खेल साफ देखा गया हैं। नियम और कायदे कहते हैं कि सड़क पर वाहनों की चेकिंग के लिए बाकायदा पुलिस बैरिकेड्स का इस्तेमाल होना चाहिए। लेकिन फतेहपुर कोतवाली पुलिस की कलाकारी तो बेमिसाल है-जहां बीच सड़क पर बीचों-बीच बड़े-बड़े पत्थर बिछाकर दुपहिया वाहन सवारों को रोकने का एक जानलेवा खेल खेला जा रहा है। जहां पुलिस एनएचएआई और राजस्थान पुलिस दोनो के नियमो की खुलेआम धज्जियां खाकी खुद उड़ा रही हैं। आम जनता और गरीब बाइक सवारों पर इस तरह पथरीली मुस्तैदी’ दिखाने वाली पुलिस की नजरें तब अचानक बंद हो क्यों हो जाती हैं, जब बात नामचीन निजी स्कूलों की बेलगाम गाड़ियों पर लगाम कसने की आती है।

वो बात अलग हैं कि मीडिया द्वारा प्रकाशित किए गए बिना कागजों वाले जानलेवा वाहनों की खबर देखकर उसी वाहन की जगह उसी स्कूल के दूसरे वाहन (जो कागजों में सही हैं ) को फतेहपुर कोतवाल खुद थाने में बंद करके व्हाट्सएप ग्रुप्स में डालकर वाह वाही लेते नजर आए हैं।

खून से सने कपड़े

मीडिया ने बार बार उठाया मासूमों से जुड़ा मुद्दा फिर भी पुलिस मोन
जनमानस शेखावाटी न्यूज ने पूर्व में भी कई बार प्रमाणों के साथ स्कूली वाहनों की इस जानलेवा लापरवाही को प्रमुखता से प्रकाशित किया है। लेकिन कोतवाली पुलिस का यह रहस्यमयी मौन व्रत सोचने पर मजबूर करता है कि आखिर कोतवाल साहब पर किस रसूखदार का साया है? आखिर वो कौन सा अदृश्य दबाव है जिसके कारण आज तक इन बेलगाम और लापरवाह निजी स्कूलों के खिलाफ कोई विशेष जांच अभियान नहीं चलाया गया? और मासूमों की मौत के कुछ सौदागरों पर कानूनी हंटर देखने को नहीं मिला।

एक बार फिर मासूम हुई लापरवाही शिकार
पुलिस की इसी लापरवाही और रसूखदारों को मिले मौन संरक्षण का नतीजा आखिरकार एक बड़े हादसे के रूप में फतेहपुर में सामने आया है। एक निजी स्कूल की कक्षा 2 की 7 वर्षीय मासूम छात्रा हर्षिता घायल होकर इस सिस्टम की शिकार बनी है। कोतवाली थाने में दर्ज आधिकारिक FIR संख्या 0208, (दिनांक : 17/07/2026) के अनुसार, 17 जुलाई 2026 को दोपहर करीब 1:30 PM बजे स्कूल से छुट्टी होने के बाद स्कूल वाहन (नंबर RJ 14 TE 7234) के चालक ने घोर लापरवाही का परिचय दिया। चालक ने बच्ची को उसकी कॉलोनी के बाहर सही जगह उतारने के बजाय, घर से दूर सड़क की बिल्कुल विपरीत (गलत) दिशा में उतार दिया। 7 साल की एक अबोध बच्ची जब मजबूरन अकेली उस व्यस्त सड़क को पार करके अपने घर की तरफ आने लगी, तभी तेज रफ्तार से आ रही एक मोटरसाइकिल (नंबर RJ 23 US 7887) ने उसे जोरदार टक्कर मार दी।

बीच सड़क पर पत्थर बिछाकर बाइकर्स को रोकती पुलिस

गंभीर रूप से घायल हुई मासूम, पिता ने दर्ज कराया मुकदमा
एफआईआर के मुताबिक बाइक की टक्कर इतनी भीषण थी कि मासूम हर्षिता सीधे स्कूल बस से जा टकराई । इस दर्दनाक हादसे में बच्ची के सिर, चेहरे और नाक पर काफी गंभीर चोटें आईं और अत्यधिक खून बहने से वह मौके पर ही अचेत हो गई। घटना के बाद पीड़िता के पिता अशोक कुमार (निवासी वार्ड नंबर 28, जाट कॉलोनी, फतेहपुर) ने तुरंत कोतवाली पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पीड़ित पिता की रिपोर्ट पर पुलिस ने स्कूल वाहन चालक और मोटरसाइकिल चालक दोनों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। मामले की जांच अब कोतवाली थाने के सहायक उप-निरीक्षक एएसआई हरलाल सिंह के जिम्मे की गई है। हालांकि इस इस बात की अब तक पुष्टि नहीं हो पाई हैं कि वाहन सीज किया गया या नहीं

क्या बाइकर्स के लिए पत्थर, रसूखदारों के लिए ‘रेड कारपेट’?
अब फतेहपुर की जनता इस दोहरी व्यवस्था पर तीखे सवाल दाग रही है। आमजन में चर्चा हैं कि अगर कोई आम बाइक सवार पुलिस के बिछाए इन पत्थरों से उलझकर गिर जाए और कोई बड़ी अनहोनी हो जाए, तो क्या कोतवाल खुद उसकी जिम्मेदारी लेंगे? एक तरफ आम जनता की जेब ढीली करने के लिए कानून की तमाम बारीकियां याद आ जाती हैं, तो दूसरी तरफ मासूमों को ‘मौत का सफर’ करवाने वाले इन निजी स्कूलों के आगे कोतवाल के हाथ-पैर क्यों फूल जाते हैं? और पुलिस मोन क्यों हो जाती हैं।

इस से पहले भी फतेहपुर कोतवाल महेंद्र मीणा की कार्यशैली पर लगे हैं एफ आई आर में आरोप
प्राप्त जानकारी के अनुसार पहले भी कस्बे के एक नाबालिक और उसके पिता ने न्यायालय के आदेश से हुई दर्ज एफआईआर संख्या 0183 में आरोप लगाए थे कि कोतवाल महेंद्र मीणा ने डॉक्टर आबिद खत्री के साथ सांठ गांठ कर मेरी रिपोर्ट दर्ज नही की और मुझे नाबालिक को 8 घंटे अवैध रूप से पुलिस थाना फतेहपुर के कमरे में बंद रखा । ऐसे आरोप नाबालिक और उसके पिता ने एफ आई आर में लगाए हैं। जो गंभीर प्रश्न खड़े कर रहे हैं।

जन मानस शेखावाटी न्यूज की लगातार चेतावनियों और इस गंभीर हादसे के बाद भी क्या पुलिस महकमा जागेगा, या फिर रसूखदारों के दबाव में इस एफआईआर को भी ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा? जनता तमाशा देख रही है और जवाब का इंतजार कर रही है। क्या कोतवाली पुलिस स्कूली वाहनों को लेकर कोई विशेष अभियान चलाएगी क्या एसपी सीकर इन मासूमों की जिंदगी के कुछ सोदागरों पर कार्रवाई करेंगे ये देखना होगा।

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