“जंतर-मंतर से लोकतंत्र का अपहरण” – सोनम वांगचुक के साथ अपराधियों जैसा व्यवहार मोदी सरकार की तानाशाही का जीवंत प्रमाण : विजय शंकर नायक
लोकतंत्र में संवाद की जगह दमन, असहमति की जगह पुलिस और संविधान की जगह सत्ता का अहंकार—यही है भाजपा का नया शासन मॉडल
रांची : झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमिटी के प्रदेश प्रवक्ता विजय शंकर नायक ने सामाजिक कार्यकर्ता एवं पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से पुलिस द्वारा हटाकर सफदरजंग अस्पताल ले जाने की कार्रवाई की कड़ी भर्त्सना करते हुए कहा कि यह केवल एक व्यक्ति के साथ हुआ व्यवहार नहीं, बल्कि देश के लोकतंत्र, संविधान और नागरिक स्वतंत्रता पर सीधा हमला है।
विजय शंकर नायक ने कहा कि जिस प्रकार पूरी रात और सुबह जंतर-मंतर क्षेत्र को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया, चारों ओर घेराबंदी की गई, कपड़ों की आड़ लगाकर पूरे घटनाक्रम को जनता और मीडिया की नज़रों से छिपाने का प्रयास किया गया तथा एक शांतिपूर्ण अनशनकारी को ऐसे उठाया गया मानो वह कोई आतंकवादी या दुर्दांत अपराधी हो, वह मोदी सरकार के लोकतांत्रिक चरित्र पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार को आज देश की जनता की आवाज़ से डर लगने लगा है। किसानों का आंदोलन हो, युवाओं का आंदोलन हो, महिलाओं का आंदोलन हो, छात्रों का आंदोलन हो या अब सोनम वांगचुक का शांतिपूर्ण सत्याग्रह-हर जगह सरकार का पहला जवाब पुलिस, बैरिकेड और दमन बन गया है।

विजय शंकर नायक ने कहा कि जो सरकार एक अनशनकारी से संवाद करने का साहस नहीं जुटा सकती, वह लोकतंत्र चलाने का नैतिक अधिकार खो देती है। लोकतंत्र में सरकारें जनता से बात करती हैं, जनता पर बल प्रयोग नहीं करतीं। उन्होंने कहा कि आज भाजपा लोकतंत्र को बहुमत का अहंकार समझ बैठी है, जबकि भारतीय संविधान सरकार को जवाबदेह बनाता है, निरंकुश नहीं। यदि सरकार हर असहमति को अपराध मानेगी, तो यह देश लोकतंत्र नहीं बल्कि भय और दमन की राजनीति की ओर धकेला जाएगा।उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की राजनीति का मूल मंत्र अब “प्रश्न पूछो तो देशद्रोही, विरोध करो तो अपराधी और अधिकार मांगो तो पुलिस कार्रवाई” बन गया है। लेकिन देश की जनता यह सब देख रही है और लोकतांत्रिक अधिकारों पर किसी भी हमले को कभी स्वीकार नहीं करेगी।
विजय शंकर नायक ने कहा कि कांग्रेस पार्टी राहुल गांधी के नेतृत्व में संविधान, लोकतंत्र, सामाजिक न्याय और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार की रक्षा के लिए सड़क से संसद तक संघर्ष करती रहेगी। महात्मा गांधी की धरती पर सत्याग्रह को अपराध की तरह कुचलने का हर प्रयास लोकतंत्र के इतिहास में काले अध्याय के रूप में दर्ज होगा। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि सोनम वांगचुक के साथ हुई कार्रवाई पर तत्काल स्पष्टीकरण दिया जाए, आंदोलनरत पक्षों के साथ सम्मानजनक संवाद शुरू किया जाए तथा देश में लोकतांत्रिक अधिकारों के संरक्षण की संवैधानिक जिम्मेदारी निभाई जाए। “देश संविधान से चलेगा, सत्ता के अहंकार से नहीं; लोकतंत्र संवाद से बचेगा, दमन से नहीं।” यही भारत की लोकतांत्रिक आत्मा है और कांग्रेस पार्टी इसकी रक्षा के लिए हर स्तर पर संघर्ष करती रहेगी।
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