मानसून की बारिश से किसानों के चेहरे खिले, खेतों में खरपतवार हटाने का काम शुरू, पशुओं के लिए हरे चारे की समस्या हुई दूर
मानसून की बारिश से किसानों के चेहरे खिले, खेतों में खरपतवार हटाने का काम शुरू, पशुओं के लिए हरे चारे की समस्या हुई दूर
जनमानस शेखावाटी सवांददाता : गजराज शर्मा
सुजानगढ़ : क्षेत्र में प्री-मानसून की अच्छी बारिश होने के बाद कृषि गतिविधियों ने रफ्तार पकड़ ली है। मानसून से पहले दो तीन बार हुई अच्छी बारिश जेठ के बाजरा के लिए वरदान साबित हो सकती है। समय पर हुई इस बरसात से उत्साहित होकर किसानों द्वारा अपने खेतों में खरीफ की मुख्य फसल बाजरा, मूंग और मोठ की बुआई का कार्य पूरा करने के बाद अब आगामी मानसून की झमाझम बारिश का इंतजार है, जो फसलों के लिए बेहद गुणकारी साबित होगी। वर्तमान में किसानों द्वारा अपने खेतों में खड़ी फसलों की सुरक्षा और बेहतर ग्रोथ के लिए खरपतवार हटाने का काम किया जा रहा है।
किसान रामनारायण रूलाणिया ने बताया कि मानसून की बारिश होने से पहले अगर खेतों से खरपतवार साफ कर ली जाए, तो बारिश का पानी सीधे मुख्य फसल को ही मिलेगा। खेतों में अनचाही घास और खरपतवार नही होने से जमीन में मौजूद खाद, उर्वरक और जरूरी खनिज लवण सीधे पौधों को मिलेंगे, जिससे फसल की ग्रोथ काफी अच्छी होगी। किसानों को उम्मीद है कि यदि इस बार समय-समय पर थोड़े-थोड़े अंतराल पर मानसून की बारिश होती रही, तो क्षेत्र में फसलों की बंपर पैदावार होगी।
रामनारायण रूलाणियां ने बताया कि इस बार जेठ के महीने में ही प्री-मानसून की अच्छी बारिश हो गई थी। आमतौर पर जेठ के महीने में बोई गई फसल के खाली जाने की आशंका कम रहती है। चूंकि हमारे यहां अधिकांश खेती बारानी (वर्षा आधारित) है, इसलिए सुजानगढ़ और आस-पास के क्षेत्रों के किसान पूरी तरह से मानसून की बारिश पर ही निर्भर रहते हैं। यही वजह है कि निराई का काम पूरा करते ही अब किसानों की नजरें आसमान की ओर टिकी हैं।
रूलाणिया ने बताया कि प्री-मानसून की मेहरबानी से क्षेत्र के पशुपालकों को भी बड़ी राहत मिली है। अच्छी बारिश के चलते चारों तरफ मैदानों और गोचर भूमि में हरी घास लहलहाने लगी है। इससे किसानों को अपने पशुधन के लिए भरपूर मात्रा में हरा चारा मिलने लगा है, जिससे अब उन्हें सूखा चारा या कुत्तर डालने की जरूरत नहीं पड़ रही है। इसके साथ ही सडक़ों और ग्रामीण इलाकों में घूमने वाले आवारा नंदी और बेसहारा गायों के लिए भी अब पेट भरने के लिए पर्याप्त मात्रा में हरा चारा सुलभ हो गया है। रूलाणियां ने उम्मीद जताई कि यदि मानसून समय पर दस्तक देता है, तो यह बारिश इस बार किसानों और पशुपालकों दोनों के लिए एक बड़ा वरदान साबित होगी।
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