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यमुना जल समझौते पर हाईकोर्ट में सरकार ने नहीं दी स्टेटस रिपोर्ट, नए एमओए की प्रति भी नहीं की पेश


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यमुना जल समझौते पर हाईकोर्ट में सरकार ने नहीं दी स्टेटस रिपोर्ट, नए एमओए की प्रति भी नहीं की पेश

यमुना जल समझौते पर हाईकोर्ट में सरकार ने नहीं दी स्टेटस रिपोर्ट, नए एमओए की प्रति भी नहीं की पेश

जनमानस शेखावाटी सवांददाता : चंद्रकांत बंका

झुंझुनूं : राजस्थान उच्च न्यायालय में वर्ष 2017 से लंबित यमुना जल समझौते से संबंधित जनहित याचिका पर हुई सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने हाल ही में हरियाणा के साथ हस्ताक्षरित नए एमओए (मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट) की प्रति न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत नहीं की। साथ ही परियोजना की अद्यतन स्टेटस रिपोर्ट भी दाखिल नहीं की गई, जिस पर याचिकाकर्ता ने सवाल उठाए हैं।

याचिकाकर्ता ने कहा कि यदि सरकार का दावा है कि यमुना जल परियोजना में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है, तो उसे न्यायालय और आमजन के समक्ष पूरी जानकारी रखनी चाहिए थी। एमओए और स्टेटस रिपोर्ट पेश नहीं किए जाने से परियोजना की पारदर्शिता पर सवाल खड़े होते हैं।

उन्होंने बताया कि इससे पहले 17 फरवरी 2024 को राजस्थान और हरियाणा के बीच हुए एमओयू को भी लंबे समय तक सार्वजनिक नहीं किया गया था। अब नए एमओए के मामले में भी ऐसी ही स्थिति सामने आई है। उनका कहना है कि करोड़ों लोगों के हित से जुड़ी इस परियोजना में पारदर्शिता सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

याचिका में कहा गया है कि यह मामला केवल समझौतों तक सीमित नहीं है, बल्कि वर्ष 1994 के यमुना जल समझौते के वास्तविक क्रियान्वयन से जुड़ा है। जब तक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर), आवश्यक स्वीकृतियां और निर्माण कार्य शुरू नहीं होता, तब तक केवल समझौतों के आधार पर परियोजना की प्रगति नहीं मानी जा सकती।

प्रमुख मांगें

  • नए हस्ताक्षरित एमओए की प्रमाणित प्रति सार्वजनिक की जाए।
  • परियोजना की विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट उच्च न्यायालय में प्रस्तुत की जाए।
  • सरकार शपथपत्र देकर निर्माण कार्य शुरू होने की तिथि स्पष्ट करे।
  • उच्च न्यायालय परियोजना की नियमित निगरानी जारी रखते हुए समय-समय पर प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दे।

याचिकाकर्ता का कहना है कि तीन दशक से अधिक समय से लंबित इस महत्वपूर्ण परियोजना को अब और विलंबित नहीं किया जाना चाहिए तथा सरकार को इसकी प्रगति के संबंध में स्पष्ट और पारदर्शी जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए।

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