[pj-news-ticker post_cat="breaking-news"]

झुंझुनूं में आवारा जानवरों का बढ़ता आतंक: 4 महीने में 1630 लोग हुए शिकार, रोजाना 13 से ज्यादा पशु दंश के मामले


निष्पक्ष निर्भीक निरंतर
  • Download App from
  • google-playstore
  • apple-playstore
  • jm-qr-code
X
झुंझुनूंटॉप न्यूज़राजस्थानराज्य

झुंझुनूं में आवारा जानवरों का बढ़ता आतंक: 4 महीने में 1630 लोग हुए शिकार, रोजाना 13 से ज्यादा पशु दंश के मामले

झुंझुनूं में आवारा जानवरों का बढ़ता आतंक: 4 महीने में 1630 लोग हुए शिकार, रोजाना 13 से ज्यादा पशु दंश के मामले

झुंझुनूं : जिले में आवारा और हिंसक जानवरों के हमले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। नेशनल रेबीज कंट्रोल प्रोग्राम (NRCP) की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2026 के जनवरी से अप्रैल तक जिले में 1630 लोग पशु दंश (एनिमल बाइट) के बाद अस्पताल पहुंचे। आंकड़ों के मुताबिक जिले में हर दिन औसतन 13 से अधिक लोग आवारा जानवरों के हमले का शिकार हो रहे हैं।

आवारा कुत्तों के हमले सबसे ज्यादा
रिपोर्ट के अनुसार सबसे अधिक मामले आवारा कुत्तों के काटने के सामने आए हैं। कुल 1630 मामलों में 1411 लोगों को कुत्तों ने काटा। इसके अलावा बिल्ली और बंदरों के काटने के मामले भी सामने आए हैं। बीडीके अस्पताल प्रशासन के अनुसार इन दिनों ओपीडी में प्रतिदिन औसतन 14 से 15 डॉग बाइट के मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं।

63 फीसदी से ज्यादा मरीज गंभीर श्रेणी के
बीडीके अस्पताल के पीएमओ डॉ. जितेंद्र भाम्बू ने बताया कि कुल मामलों में 1039 मरीज कैटेगरी-3 के रहे, जो कुल संख्या का करीब 63.7 प्रतिशत है। कैटेगरी-3 में गहरे घाव या खून निकलने की स्थिति में रेबीज का खतरा अधिक रहता है। ऐसे मरीजों को तुरंत एंटी रेबीज सीरम (ARS) लगाया गया। वहीं 565 मरीज कैटेगरी-2 के रहे, जिन्हें एंटी रेबीज वैक्सीन देकर उपचार किया गया।

बच्चे और महिलाएं ज्यादा प्रभावित
आंकड़ों के अनुसार आवारा जानवरों के हमलों में बच्चे और महिलाएं अधिक प्रभावित हुए हैं। जनवरी से मार्च के बीच 15 वर्ष से कम उम्र के 381 बच्चे पशु दंश का शिकार हुए, जिनमें 248 लड़के और 133 लड़कियां शामिल हैं। अप्रैल माह में भी 5 वर्ष से कम उम्र के 24 बच्चों के गंभीर मामले सामने आए।

3273 वैक्सीन डोज का हुआ उपयोग, रेबीज से कोई मौत नहीं
स्वास्थ्य विभाग की ओर से मरीजों के उपचार के लिए एंटी रेबीज वैक्सीन उपलब्ध कराई गई। जनवरी से अप्रैल के बीच कुल 3273 वैक्सीन डोज का उपयोग किया गया। समय पर उपचार मिलने के कारण इस अवधि में जिले में रेबीज से कोई मौत दर्ज नहीं हुई।

अस्पताल में इलाज की पूरी व्यवस्था
डॉ. जितेंद्र भाम्बू ने बताया कि बीडीके अस्पताल में डॉग बाइट और अन्य पशु दंश के इलाज के लिए आवश्यक दवाएं और सुविधाएं उपलब्ध हैं। पर्याप्त स्टॉक होने के कारण अब तक किसी मरीज को उच्च चिकित्सा केंद्र के लिए रेफर करने की आवश्यकता नहीं पड़ी।जिले में बढ़ते पशु दंश के मामलों ने आवारा जानवरों के नियंत्रण और आमजन की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

Related Articles