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दयाल संत आश्रम में श्रीमद्भागवत कथा: श्रद्धा और भक्ति में डूबा बीदासर, जयघोषों से गूंजा दादुदयाल संत आश्रम परिसर


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दयाल संत आश्रम में श्रीमद्भागवत कथा: श्रद्धा और भक्ति में डूबा बीदासर, जयघोषों से गूंजा दादुदयाल संत आश्रम परिसर

दयाल संत आश्रम में श्रीमद्भागवत कथा: श्रद्धा और भक्ति में डूबा बीदासर, जयघोषों से गूंजा दादुदयाल संत आश्रम परिसर

जनमानस शेखावाटी सवांददाता : गजराज शर्मा

बीदासर : स्थित दादू दयाल संत आश्रम में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के अंतर्गत कथा में श्रद्धालु भक्ति रस में ऐसे डूबे कि अनेक की आंखें भाव-विभोर होकर नम हो गईं। पूरे आश्रम परिसर में भजनों, मंत्रोच्चार और आध्यात्मिक वातावरण की अनूठी छटा देखने को मिली। सुबह से ही आसपास के गांवों सहित बीदासर क्षेत्र से बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा श्रवण के लिए पहुंचे। कथा प्रारंभ से पूर्व वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भगवान श्रीकृष्ण, श्रीराधा एवं श्रीमद्भागवत महापुराण का विधिवत पूजन-अर्चन किया गया।

कथा व्यास देवकीनंदन शर्मा ने भगवान श्रीकृष्ण का मार्मिक वर्णन करते हुए कहा कि जब पृथ्वी पर अधर्म और अत्याचार बढ़ गया था, तब भगवान श्रीहरि ने श्रीकृष्ण के रूप में अवतार लेकर धर्म की पुनः स्थापना की। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जीवन केवल एक ऐतिहासिक घटना नहीं, बल्कि मानवता के लिए सत्य, धर्म, प्रेम और करुणा का शाश्वत संदेश है। कथा के दौरान देवकी-वसुदेव की पीड़ा, कारागार का दृश्य, यमुना पार करने और नंद भवन पहुंचने का प्रसंग इतना जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया कि श्रद्धालु स्वयं को उस युग में उपस्थित महसूस करने लगे। कथा व्यास ने अपने प्रवचन में श्रीमद्भगवद्गीता के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने मानव को कर्मयोग, भक्तियोग और ज्ञानयोग का अमूल्य संदेश दिया है। उन्होंने युवाओं से भारतीय संस्कृति अपनाने, नशे व सामाजिक बुराइयों से दूर रहने और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।

भव्य सजावट और सामूहिक महाआरती पूरे आश्रम परिसर को रंग-बिरंगी रोशनी, पुष्प सज्जा एवं धार्मिक झांकियों से सजाया गया। कथा के समापन पर सामूहिक महाआरती का आयोजन हुआ, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने दीप प्रज्वलित कर भगवान की आराधना की। इसके पश्चात प्रसाद वितरण किया गया। आयोजन समिति के अनुसार आगामी दिनों में श्रीकृष्ण की बाल लीलाएं, कालिया नाग दमन, गोवर्धन पूजा, सुदामा चरित्र सहित विभिन्न प्रसंगों का वर्णन किया जाएगा। कथा का समय प्रतिदिन प्रातः 9 बजे से 12 बजे तक एवं दोपहर 2 बजे से 5 बजे तक निर्धारित किया गया है। कथा आयोजन पूरे क्षेत्र में आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है, जहां प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु पहुंचकर आध्यात्मिक आनंद प्राप्त कर रहे हैं।

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