जन सेवा विकास समिति, दूधवाखारा द्वारा ऐतिहासिक जोहड़ एवं घाट की मरमत जीवणोद्वार के लिए सरकार से बजट की मांग
जन सेवा विकास समिति, दूधवाखारा द्वारा ऐतिहासिक जोहड़ एवं घाट की मरमत जीवणोद्वार के लिए सरकार से बजट की मांग
जनमानस शेखावाटी सवांददाता : मोहम्मद अली पठान
दुधवाखारा : ग्राम दूधवाखारा के ऐतिहासिक जोहड़ एवं घाट की मरम्मत, जीवणोद्वार तथा वर्षा जल संरक्षण के लिए राजस्थान सरकार से विशेष बजट की मांग करते हुए समिति के अध्यक्ष डॉक्टर मुस्तकीम अली शेख,सचिव दयाराम कस्वा, कोषाध्यक्ष राजेंद्र बुडानिया, ने मुख्यमंत्री के नाम पत्र लिखा ग्राम दूधवाखारा की जनसेवा विकास समिति एवं समस्त ग्रामीणों की ओर से गाँव के ऐतिहासिक जोहड़ एवं घाट यह जोहड़ लगभग 127 वर्ष पूर्व (सन् 1899) संवत् 1956 में सेठ तेजपालजी जमना दास बजाज बिसाऊ निवासी मिर्जापुर वालो के द्वारा निर्मित किया गया था, जिसका उद्देश्य वर्षा जल का संरक्षण कर मनुष्यों एवं पशुओं के लिए पेयजल की व्यवस्था करना था।
उक्त जोहड़ की एक बार सन् 1960 संवत् 2017 (लगभग 66 वर्ष पूर्व) मरम्मत की गई थी, जिसमें पंचायत समिति रतननगर द्वारा ₹10,000 तथा समाजसेवी स्वर्गीय श्री द्वारका प्रसाद जी बजाज द्वारा ₹5,000 की सहायता प्रदान की गई थी। मात्र ₹15,000 की लागत से उस समय पूरे जोहड़ का जीवणोद्वार एवं मरम्मत कार्य संपन्न हुआ था।

वर्तमान में यह ऐतिहासिक जल स्रोत अत्यंत जर्जर अवस्था में है। इसकी पाल एवं घाट क्षतिग्रस्त हो चुके हैं तथा पानी का अत्यधिक रिसाव होने के कारण वर्षा जल भूमि में समा जाता है, जिससे गाँव में पेयजल एवं पशुओं के लिए पानी की गंभीर समस्या उत्पन्न हो रही है। जोहड़ का आकार लगभग 203 फुट x 203 फुट है तथा घाट की लंबाई 126 फुट, चौड़ाई 60 फुट है। यदि इसका वैज्ञानिक तरीके से जीवणोद्वार एवं मरम्मत कर दी जाए तो बड़ी मात्रा में वर्षा जल का संरक्षण किया जा सकता है, जिससे भविष्य में ग्राम दूधवाखारा एवं आसपास के क्षेत्र में जल संकट से राहत मिल सकेगी।
प्रधानमंत्री एवं राज्य सरकार द्वारा संचालित “जल जीवन मिशन”, जल संरक्षण एवं वर्षा जल संचयन अभियानों को सफल बनाने में यह कार्य एक आदर्श उदाहरण सिद्ध होगा। अतःमुख्यमंत्री सहायता कोष अथवा अन्य उपयुक्त योजना के माध्यम से आवश्यक बजट स्वीकृत कर ग्राम दूधवाखारा के ऐतिहासिक जोहड एवं घाट के जीवणोद्वार का कार्य करवाने की कृपा करें। यह कार्य न केवल जल संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए अमूल्य जल संपदा को सुरक्षित रखने का भी माध्यम बनेगा।
देश
विदेश
प्रदेश
संपादकीय
वीडियो
आर्टिकल
व्यंजन
स्वास्थ्य
बॉलीवुड
G.K
खेल
बिजनेस
गैजेट्स
पर्यटन
राजनीति
मौसम
ऑटो-वर्ल्ड
करियर/शिक्षा
लाइफस्टाइल
धर्म/ज्योतिष
सरकारी योजना
फेक न्यूज एक्सपोज़
मनोरंजन
क्राइम
चुनाव
ट्रेंडिंग
Covid-19





Total views : 2222269

