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इस्लामपुर के मुसलमानों के साथ नाइंसाफी नहीं होने देंगे: राजेंद्र सिंह गुढ़ा; बोले- कॉलेज या यूनिवर्सिटी खोलकर कोई भी नाम रख दो, किसी को आपत्ति नहीं


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इस्लामपुर के मुसलमानों के साथ नाइंसाफी नहीं होने देंगे: राजेंद्र सिंह गुढ़ा; बोले- कॉलेज या यूनिवर्सिटी खोलकर कोई भी नाम रख दो, किसी को आपत्ति नहीं

इस्लामपुर के मुसलमानों के साथ नाइंसाफी नहीं होने देंगे: राजेंद्र सिंह गुढ़ा; बोले- कॉलेज या यूनिवर्सिटी खोलकर कोई भी नाम रख दो, किसी को आपत्ति नहीं

जनमानस शेखावाटी सवांददाता : मोहम्मद आरिफ चंदेल 

इस्लामपुर : गांव के नाम परिवर्तन को लेकर चल रहे विवाद के बीच गुरुवार शाम अंबेडकर चौक में सर्वसमाज की ओर से जनसभा आयोजित की गई। सभा में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे पूर्व मंत्री राजेंद्र सिंह गुढ़ा ने कहा कि इस्लामपुर गांव का नाम किसी भी सूरत में नहीं बदला जाएगा और इसके लिए लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रहेगा।

उन्होंने 15 जून को इस्लामपुर से झुंझुनूं कलेक्ट्रेट तक प्रस्तावित पैदल मार्च को सफल बनाने की अपील करते हुए कहा कि सर्वसमाज को बड़ी संख्या में इसमें भाग लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि पैदल मार्च के बाद जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा जाएगा। यदि प्रशासन की ओर से संतोषजनक आश्वासन नहीं मिला तो कलेक्ट्रेट के सामने धरना, प्रदर्शन, भूख हड़ताल और आमरण अनशन जैसे कदम भी उठाए जाएंगे।

‘इतिहास से छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं’

राजेंद्र सिंह गुढ़ा ने कहा कि इस्लामपुर केवल एक गांव का नाम नहीं, बल्कि एक ऐतिहासिक धरोहर है। गांवों और शहरों के नामों के साथ उनका इतिहास और सांस्कृतिक पहचान जुड़ी होती है। ऐसे में नाम बदलने के प्रयास इतिहास से छेड़छाड़ के समान हैं।

उन्होंने कहा कि राजस्थान में अनेक स्थानों के नाम ऐतिहासिक व्यक्तित्वों और घटनाओं से जुड़े हुए हैं। यदि सरकार इसी प्रकार नाम बदलने की परंपरा शुरू कर देगी तो यह समाज और इतिहास दोनों के लिए उचित नहीं होगा।

‘शेखावाटी का इतिहास भी समझना होगा’

गुढ़ा ने शेखावाटी के इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि इस क्षेत्र की पहचान और इतिहास विभिन्न समुदायों के योगदान से बना है। उन्होंने कहा कि सदियों पहले यहां के मुसलमानों ने भी क्षेत्र के विकास और सामाजिक सौहार्द में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

उन्होंने कहा कि आज भी वे इस्लामपुर के लोगों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं और किसी भी प्रकार की नाइंसाफी नहीं होने देंगे।

विधायक पर साधा निशाना

सभा को संबोधित करते हुए गुढ़ा ने स्थानीय विधायक पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि गांव का नाम बदलने की सिफारिश कर दो समुदायों के बीच दूरी बढ़ाने का प्रयास किया गया है। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों को विकास की राजनीति करनी चाहिए, न कि समाज को बांटने वाली राजनीति।

उन्होंने कहा कि क्षेत्र में कॉलेज, अस्पताल, तहसील और अन्य बुनियादी सुविधाओं का विस्तार होना चाहिए ताकि सभी वर्गों को लाभ मिल सके।

‘कॉलेज खोलो, कोई भी नाम रख दो’

गुढ़ा ने कहा कि यदि किसी को नामकरण का इतना ही शौक है तो इस्लामपुर में कोई यूनिवर्सिटी या कॉलेज खोला जाए और उसका नाम किसी भी महापुरुष के नाम पर रखा जाए। इससे किसी को कोई आपत्ति नहीं होगी। लेकिन गांव की ऐतिहासिक पहचान बदलना उचित नहीं है।

पैदल मार्च को सफल बनाने का आह्वान

सभा को संबोधित करते हुए इंजीनियर इब्राहिम खान ने कहा कि 15 जून के प्रस्तावित पैदल मार्च को लेकर सभी लोगों को तैयार रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि आंदोलन पूरी तरह लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण रहेगा तथा गांव के नाम परिवर्तन का विरोध संविधान सम्मत तरीके से किया जाएगा।

प्रोफेसर शैलेश भारतीय ने कहा कि समाज में भाईचारा और सौहार्द बनाए रखना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि किसी भी मुद्दे को लेकर समाज में नफरत फैलाने की कोशिश नहीं होनी चाहिए।

सर्वसमाज के लोगों ने लिया भाग

सभा में सरपंच अमीन मनियार ने भी आमजन से अधिकाधिक संख्या में पैदल मार्च में शामिल होने की अपील की। कार्यक्रम में पूर्व सरपंच आशाराम बरवड़, अनिल कुमार गर्वा, अरविंद, मुकेश, बृजेंद्र, मनोज कुमार, दिनेश कुमार, बशीर मनियार, याकूब कुरैशी, नंदलाल कड़वासरा, विक्की टेलर, फैज मोहम्मद, कामिल चौहान सहित बड़ी संख्या में सर्वसमाज के लोग मौजूद रहे।

सभा के दौरान 15 जून को इस्लामपुर से झुंझुनूं तक निकाले जाने वाले पैदल मार्च की रूपरेखा पर भी चर्चा की गई और आंदोलन को शांतिपूर्ण व लोकतांत्रिक तरीके से संचालित करने की रणनीति बनाई गई।

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